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Kanpur News: 40 फीसदी महिलाएं जननी सुरक्षा योजना से वंचित, मिला डी ग्रेड

Sat, 04 Jul 2026 02:33 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jul 2026 02:33 AM IST
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40% of women deprived of Janani Suraksha Yojana; scheme receives 'D' grade.
कानपुर। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने और मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से चलाई जा रही जननी सुरक्षा योजना को सीएम डैशबोर्ड पर डी ग्रेड मिला है। इसका एक मुख्य कारण हैलट और डफरिन जैसे प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव कराने वाली करीब 40 प्रतिशत महिलाओं को योजना के तहत वित्तीय लाभ न मिलना है। इस पर शासन ने जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। वहीं डीएम ने सीएमओ कार्यालय और वहां से संबंधित सीएचसी और प्रमुख अस्पतालों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने भी हालात की समीक्षा को लेकर बैठक की है। अधिकारियों के अनुसार योजना में लाभ न मिलने के पीछे सबसे बड़ी बाधा लाभार्थियों के बैंक खाते और पहचान पत्रों का अभाव है। हैलट और डफरिन अस्पतालों में कानपुर नगर के साथ-साथ कानपुर देहात, उन्नाव, फतेहपुर, हमीरपुर और बांदा जैसे जिलों से बड़ी संख्या में गर्भवती रेफर होकर आती हैं। इनमें से अधिकांश महिलाएं ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि की होती हैं जिनके पास आवश्यक दस्तावेज नहीं होते।
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सरकारी नियमों के अनुसार जननी सुरक्षा योजना के तहत दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजी जाती है। शहरी क्षेत्र में यह राशि 1000 रुपये और ग्रामीण क्षेत्र में 1400 रुपये निर्धारित है। बैंक खाता न होने या आधार, पहचान पत्र और पैन कार्ड जैसे दस्तावेज उपलब्ध न होने के कारण महिलाएं सुविधा से वंचित रह जा रही हैं। अस्पतालों में बैंक खाता खोलने की सुविधा शुरू की गई है लेकिन वहां भी दस्तावेजों की कमी बाधा बन रही है। वहीं कुछ मामलों में खाते खुलने के बाद भी न्यूनतम बैलेंस और निष्क्रियता के कारण समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
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दोबारा न लौटना भी एक बड़ी चुनौती

एक और बड़ी चुनौती यह है कि प्रसव के बाद महिलाएं नवजात के साथ अपने गांव या दूरदराज जिलों में लौट जाती हैं। बाद में जब स्वास्थ्य कर्मी दस्तावेज जमा करने के लिए संपर्क करते हैं तो महिलाएं दूरी और खर्च का हवाला देकर दोबारा अस्पताल आने से इन्कार कर देती हैं। ऐसे में कई लाभार्थी योजना के भुगतान से स्थायी रूप से वंचित रह जाते हैं। चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार इस समस्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश जारी किए हैं कि गर्भवती महिलाओं की पहली जांच के समय ही उनका बैंक खाता खुलवाने की प्रक्रिया शुरू की जाए ताकि प्रसव के समय तक सभी दस्तावेज पूरे हो सकें।




वर्जन

डफरिन और हैलट जैसे बड़े अस्पतालों में अन्य जिलों और राज्यों से भी मरीज आते हैं जिनमें से कई के पास दस्तावेज नहीं होते। अब स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि गर्भावस्था की शुरुआत से ही लाभार्थियों के खाते खुलवाए जाएं और आवश्यक दस्तावेज पूरे कराए जाएं, ताकि किसी भी महिला को योजना के लाभ से वंचित न रहना पड़े। - डॉ. हरिदत्त नेमी, सीएमओ
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