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लॉकडाउन: महाराष्ट्र से प्रतापगढ़ के लिए पैदल चले 25 मजदूर, 1252 किमी का सफर, पैरों में पड़े छाले
Sat, 09 May 2020 07:05 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 09 May 2020 07:05 PM IST
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15 दिन पहले महाराष्ट्र से प्रतापगढ़ के लिए चले थे 25 मजदूर
- फोटो : amar ujala
लाॅकडाउन के दौरान घर पहुंचने की चाह में महाराष्ट्र से पैदल निकले 25 मजदूरों ने साथ चल रहे 8 मासूम बच्चों का भी हौसला टूटने नहीं दिया। पैर में छाले देख कभी उन्हें गोद में उठाया तो कभी कंधे पर बैठा आगे बढ़ते रहे। पुलिस के डर से कोसों खेत और जंगल में भी चले।
भूख-प्यास मिटाने में लोगों ने मदद भी की। 15 दिन में 1252 किमी का सफर तय कर सभी शनिवार को उन्नाव के पास ललऊखेड़ा गांव पहुंचे। यहां एक गेस्ट हाउस संचालक ने सभी को खाना खिलाया, दवा दिलाई और खुद के खर्च पर लोडर से भेजा।
प्रतापगढ़ के ब्लॉक आसपुर के प्रतापपुरा गांव निवासी गुरुदीन, रानी कमला, सुरेश, अरविंद समेत लगभग 25 लोग एक साल से महाराष्ट्र के भिवंडी जिले में बच्चों के साथ रहकर एक कपड़ा फैक्टरी में काम कर रहे थे। 25 मार्च को लॉकडाउन होने से फैक्टरी बंद हो गई।
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भूख-प्यास मिटाने में लोगों ने मदद भी की। 15 दिन में 1252 किमी का सफर तय कर सभी शनिवार को उन्नाव के पास ललऊखेड़ा गांव पहुंचे। यहां एक गेस्ट हाउस संचालक ने सभी को खाना खिलाया, दवा दिलाई और खुद के खर्च पर लोडर से भेजा।
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प्रतापगढ़ के ब्लॉक आसपुर के प्रतापपुरा गांव निवासी गुरुदीन, रानी कमला, सुरेश, अरविंद समेत लगभग 25 लोग एक साल से महाराष्ट्र के भिवंडी जिले में बच्चों के साथ रहकर एक कपड़ा फैक्टरी में काम कर रहे थे। 25 मार्च को लॉकडाउन होने से फैक्टरी बंद हो गई।
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सभी को कराया भोजन
- फोटो : amar ujala
कई दिनों तक सभी घर में उपलब्ध राशन से थोड़ा-थोड़ा खर्चकर अपना व बच्चों का पेट भरते रहे। आर्थिक तंगी होने पर पेट भरने का संकट खड़ा हो गया। इससे किसी तरह घर पहुंचने के सिवा कोई विकल्प नहीं बचा। 15 दिन पहले सभी महिला-पुरुष बच्चों के साथ पैदल ही घर के लिए चल पड़े।
1252 किमी सफर तय कर शनिवार को वह सभी सदर कोतवाली के ललऊखेड़ा गांव पहुंचे। व्यवसायी आशुतोष त्रिपाठी ने इन श्रमिकों का हाल देखा तो मदद की। सभी को अपने गेस्ट हाउस में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बैठाकर खाना खिलाया।
8 साल के एक बच्चे के पैर में छाले देख दवा मंगवाई। आराम करने के बाद सभी फिर पैदल ही आगे चलने के तैयारी करने लगे तो आशुतोष ने रायबरेली तक जा रहे एक लोडर को रोकवाया और अपने पास से किराया देकर सभी को लोडर से भेजा।
1252 किमी सफर तय कर शनिवार को वह सभी सदर कोतवाली के ललऊखेड़ा गांव पहुंचे। व्यवसायी आशुतोष त्रिपाठी ने इन श्रमिकों का हाल देखा तो मदद की। सभी को अपने गेस्ट हाउस में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बैठाकर खाना खिलाया।
8 साल के एक बच्चे के पैर में छाले देख दवा मंगवाई। आराम करने के बाद सभी फिर पैदल ही आगे चलने के तैयारी करने लगे तो आशुतोष ने रायबरेली तक जा रहे एक लोडर को रोकवाया और अपने पास से किराया देकर सभी को लोडर से भेजा।