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Kanpur News: 1.60 लाख किसानों तक सिमटी सम्मान निधि की 22वीं किस्त
Wed, 08 Apr 2026 01:32 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Wed, 08 Apr 2026 01:32 AM IST
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कानपुर देहात। जिले में किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त 160527 किसानों को मिली है। पंजीयन के बाद भी किस्त न आने पर हर दिन किसान माती स्थित कृषि कार्यालय में वजह जानने पहुंचते हैं।
जिले में तीन लाख से अधिक पंजीकृत किसान हैं। पति पत्नी व पुत्र-पुत्री के नियम तोड़कर सम्मान निधि लेने पर संदिग्ध डेटा की किस्तें रोकी गई हैं। इसमें करीब सात हजार से अधिक किसान हैं। वहीं ई-केवाईसी या फिर एनपीसीआई न होने की औपचारिकताएं भी किसान सम्मान निधि किस्तें न मिलने की वजह है। फिर नियम तोड़कर पति व पत्नी या फिर पुत्र-पुत्री के सम्मान निधि लेने पर निर्णय होना है। ऐसे में पति या फिर पत्नी की किस्तें लौटाने वाले किसानों की भी संदिग्ध डेटा के आधार पर किस्तें रुकी है।
किस्तें रुकने में फार्मर रजिस्ट्री न होना या भूमि सत्यापन की अटकी प्रक्रिया भी वजह है। बीते दिनों सम्मान निधि की 22वीं किस्त जारी की गई। जिले में केवल 160527 किसानों के खाते में किस्त भेजी गई है। यही स्थित 21वीं किस्त में भी रही थी। पीएम किसान सम्मान निधि पटल के वरिष्ठ सहायक आदित्य मिश्रा ने बताया कि हर दिन पचास से अधिक किसान आते हैं। किस्तें रुकी होने की सही वजह बताई जाती है। भारत सरकार के स्तर पर रुकी किस्तें जारी करने पर निर्णय लिया जाना है।
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वर्जन
सभी औपचारिकताएं पूरी करने वाले किसानों को ही सम्मान निधि किस्तें मिल रही हैं। लाभार्थी किसान के मृत होने पर वारिसानों को मृतक किसान का मृत्यु प्रमाण व आधार कार्ड उपलब्ध कराना है इसे पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। इसके बाद ही किस्तें जारी होती हैं। यदि किसी मृतक के खाते में किस्तें गई हैं तो वारिस को लौटना पड़ेगा तभी उसे सम्मान निधि का लाभ मिलेगा। - हरीशंकर भार्गव, उप कृषि निदेशक
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केस एक :
पति का मृत्यु प्रमाण पत्र अपलोड न होने से नहीं मिली किस्त
पति छोटेलाल ने 2019 में पंजीयन कराया था। इसके बाद उनकी मृत्यु हो गई। दो किस्तें उनके खाते में आयी। वारिस के तौर पर 2024 में आवेदन किया है, लेकिन कोई किस्त नहीं मिली। अब पति का मृत्यु प्रमाण पत्र व आधार कृषि कार्यालय में दिया है। - मंजू देवी, बारा अकबरपुर।
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एनपीसीआई न होने से रुकी थी किस्त
सम्मान निधि की 19वीं किस्त मिली थी। इसके बाद से किस्तें रुक गई थी। जानकारी करने पर एनपीसीआई मैपर न होने की जानकारी मिली। इसपर यह औपचारिकता पूरी कराई। अब 22वीं किस्त मिल गई है। 20वीं व 21वीं किस्त नहीं आयी है। - रामलाल, उसरी रसूलाबाद।
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जिले में तीन लाख से अधिक पंजीकृत किसान हैं। पति पत्नी व पुत्र-पुत्री के नियम तोड़कर सम्मान निधि लेने पर संदिग्ध डेटा की किस्तें रोकी गई हैं। इसमें करीब सात हजार से अधिक किसान हैं। वहीं ई-केवाईसी या फिर एनपीसीआई न होने की औपचारिकताएं भी किसान सम्मान निधि किस्तें न मिलने की वजह है। फिर नियम तोड़कर पति व पत्नी या फिर पुत्र-पुत्री के सम्मान निधि लेने पर निर्णय होना है। ऐसे में पति या फिर पत्नी की किस्तें लौटाने वाले किसानों की भी संदिग्ध डेटा के आधार पर किस्तें रुकी है।
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किस्तें रुकने में फार्मर रजिस्ट्री न होना या भूमि सत्यापन की अटकी प्रक्रिया भी वजह है। बीते दिनों सम्मान निधि की 22वीं किस्त जारी की गई। जिले में केवल 160527 किसानों के खाते में किस्त भेजी गई है। यही स्थित 21वीं किस्त में भी रही थी। पीएम किसान सम्मान निधि पटल के वरिष्ठ सहायक आदित्य मिश्रा ने बताया कि हर दिन पचास से अधिक किसान आते हैं। किस्तें रुकी होने की सही वजह बताई जाती है। भारत सरकार के स्तर पर रुकी किस्तें जारी करने पर निर्णय लिया जाना है।
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सभी औपचारिकताएं पूरी करने वाले किसानों को ही सम्मान निधि किस्तें मिल रही हैं। लाभार्थी किसान के मृत होने पर वारिसानों को मृतक किसान का मृत्यु प्रमाण व आधार कार्ड उपलब्ध कराना है इसे पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। इसके बाद ही किस्तें जारी होती हैं। यदि किसी मृतक के खाते में किस्तें गई हैं तो वारिस को लौटना पड़ेगा तभी उसे सम्मान निधि का लाभ मिलेगा। - हरीशंकर भार्गव, उप कृषि निदेशक
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केस एक :
पति का मृत्यु प्रमाण पत्र अपलोड न होने से नहीं मिली किस्त
पति छोटेलाल ने 2019 में पंजीयन कराया था। इसके बाद उनकी मृत्यु हो गई। दो किस्तें उनके खाते में आयी। वारिस के तौर पर 2024 में आवेदन किया है, लेकिन कोई किस्त नहीं मिली। अब पति का मृत्यु प्रमाण पत्र व आधार कृषि कार्यालय में दिया है। - मंजू देवी, बारा अकबरपुर।
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एनपीसीआई न होने से रुकी थी किस्त
सम्मान निधि की 19वीं किस्त मिली थी। इसके बाद से किस्तें रुक गई थी। जानकारी करने पर एनपीसीआई मैपर न होने की जानकारी मिली। इसपर यह औपचारिकता पूरी कराई। अब 22वीं किस्त मिल गई है। 20वीं व 21वीं किस्त नहीं आयी है। - रामलाल, उसरी रसूलाबाद।