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चना और सरसों की बुवाई शुरू कर दें किसान
Updated Thu, 11 Oct 2018 01:24 AM IST
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घाटमपुर (कानपुर)। कृषि सूचना तंत्र के सुदृढ़ीकरण एवं कृषक जागरूकता कार्यक्रम के तहत बुधवार को पतारा और घाटमपुर में ब्लाक स्तरीय कृषि मेलों के आयोजन किए गए। इसमें कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को कृषि की नई तकनीक समझाने के साथ ही फसलों की बुवाई के तरीके भी समझाए। कृषि मेले में चयनित किसानों को रबी फसलों चना और सरसों के मिनी किट भी बांटे गए।
घाटमपुर स्थित ब्लाक मुख्यालय सभागार में आयोजित कृषि गोष्ठी में वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डा. आरएस कमलवंशी ने बताया कि रबी में चना और लाही की फसलें बोने का समय शुरू हो चुका है। बताया कि असिंचित इलाकों में किसान अक्तूबर के दूसरे सप्ताह में बुवाई कर सकते हैं। जबकि, सिंचित इलाके में इन फसलों की बुवाई नवंबर के प्रथम सप्ताह तक कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि सब्जी वाले मटर की बुवाई चालू है जो किसान बोना चाहते हैं शीघ्र बुआई करें।
कृषि वैज्ञानिक श्रीकृष्ण यादव ने किसानों को मृदा परीक्षण के फायदे समझाने के साथ ही खेतों में रासायनिक उर्वरकों की जगह जैविक, कंपोस्ट और गोबर की खाद का प्रयोग अधिक करें। उन्होंने बीज बोने से पूर्व उनका उपचार करने के तरीके भी समझाए।
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कृषि वैज्ञानिक आरके सचान, कृषि विषयवस्तु विशेषज्ञ रमाकांत वर्मा, राजकीय कृषि बीज भंडार के प्रभारी संजीव कुमार, कृषि रक्षा इकाई के प्रभारी गोपालकृष्ण यादव, तकनीकी सहायक विवेक सिंह और पुष्पेंद्र सिंह ने भी किसानों को खेती-किसानी से संबंधित टिप्स दिए।
कृषि मेला में घाटमपुर ब्लाक प्रमुख देविका सिंह के पति इंद्रजीत सिंह कुशवाहा भी शामिल हुए। उन्होंने यमुनापट्टी (तिरहर) इलाके में बोई जाने वाली परंपरागत फसलों के संरक्षण के बारे में जोर दिया। बताया कि अन्ना मवेशियों और नीलगायों के चलते खरीफ में ज्वार-बाजरा, लोबिया और मूंग की फसलें बोने से किसान हिचक रहे हैं। जबकि, तिरहर इलाके में बड़े पैमाने पर की जाने वाली चना और मटर की खेती भी कम होती जा रही है।
इधर, पतारा विकास खंड में आयोजित कृषि मेले में वरिष्ठ तकनीकी सहायक संतोष कुमार त्रिपाठी, उदय नारायण पांडेय, मुरलीधर राजपूत, अरुण कुमार सिंह, अनुराग शुक्ला, सुनील कुमार यादव, राघवेंद्र सिंह और सुमित कुमार ने किसानों को जानकारियां दीं। इस मौके पर उदयनरायण सचान, संत सिंह, हेतनरायण त्रिवेदी, दुर्गाचरण बाजपेई, विजय बहादुर सिंह और रजोल तिवारी सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
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घाटमपुर स्थित ब्लाक मुख्यालय सभागार में आयोजित कृषि गोष्ठी में वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डा. आरएस कमलवंशी ने बताया कि रबी में चना और लाही की फसलें बोने का समय शुरू हो चुका है। बताया कि असिंचित इलाकों में किसान अक्तूबर के दूसरे सप्ताह में बुवाई कर सकते हैं। जबकि, सिंचित इलाके में इन फसलों की बुवाई नवंबर के प्रथम सप्ताह तक कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि सब्जी वाले मटर की बुवाई चालू है जो किसान बोना चाहते हैं शीघ्र बुआई करें।
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कृषि वैज्ञानिक श्रीकृष्ण यादव ने किसानों को मृदा परीक्षण के फायदे समझाने के साथ ही खेतों में रासायनिक उर्वरकों की जगह जैविक, कंपोस्ट और गोबर की खाद का प्रयोग अधिक करें। उन्होंने बीज बोने से पूर्व उनका उपचार करने के तरीके भी समझाए।
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कृषि वैज्ञानिक आरके सचान, कृषि विषयवस्तु विशेषज्ञ रमाकांत वर्मा, राजकीय कृषि बीज भंडार के प्रभारी संजीव कुमार, कृषि रक्षा इकाई के प्रभारी गोपालकृष्ण यादव, तकनीकी सहायक विवेक सिंह और पुष्पेंद्र सिंह ने भी किसानों को खेती-किसानी से संबंधित टिप्स दिए।
कृषि मेला में घाटमपुर ब्लाक प्रमुख देविका सिंह के पति इंद्रजीत सिंह कुशवाहा भी शामिल हुए। उन्होंने यमुनापट्टी (तिरहर) इलाके में बोई जाने वाली परंपरागत फसलों के संरक्षण के बारे में जोर दिया। बताया कि अन्ना मवेशियों और नीलगायों के चलते खरीफ में ज्वार-बाजरा, लोबिया और मूंग की फसलें बोने से किसान हिचक रहे हैं। जबकि, तिरहर इलाके में बड़े पैमाने पर की जाने वाली चना और मटर की खेती भी कम होती जा रही है।
इधर, पतारा विकास खंड में आयोजित कृषि मेले में वरिष्ठ तकनीकी सहायक संतोष कुमार त्रिपाठी, उदय नारायण पांडेय, मुरलीधर राजपूत, अरुण कुमार सिंह, अनुराग शुक्ला, सुनील कुमार यादव, राघवेंद्र सिंह और सुमित कुमार ने किसानों को जानकारियां दीं। इस मौके पर उदयनरायण सचान, संत सिंह, हेतनरायण त्रिवेदी, दुर्गाचरण बाजपेई, विजय बहादुर सिंह और रजोल तिवारी सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।