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मंदी की आहट: चाय कारोबार को 200 करोड़ की चपत, बीते तीन माह में घटी 25 फीसदी बिक्री
Mon, 26 Aug 2019 01:15 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 26 Aug 2019 01:15 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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देश भर के कारोबारी जगत पर छाई मंदी का असर रोजमर्रा की जरूरत वाली वस्तुओं पर भी दिखने लगा है। बीते तीन माह के दौरान ही कानपुर के चाय कारोबार को करीब 200 करोड़ रुपये की चपत लग चुकी है। चाय कारोबारियों की मानें तो मई अंत से चाय की थोक और फुटकर बिक्री में कमी आनी शुरू हो गई थी।
तीन माह के दौरान औसत बिक्री में करीब 25 फीसदी की कमी आई है। बिक्री में इतनी तेजी से गिरावट आने का अंदाजा कारोबारी भी नहीं लगा पा रहे हैं। कुछ कारोबारियों का मानना है कि ऑनलाइन बिक्री के कारण बाजार में ग्राहकों की आवक घटी है।
कानपुर में नयागंज, एक्सप्रेस रोड, कलक्टरगंज आदि बाजार चाय की खुदरा और थोक बिक्री के प्रमुख केंद्र हैं। यहां करीब 80 से अधिक व्यापारी चाय के थोक कारोबार से जुड़े हैं। शहर भर में फुटकर व्यापारियों की संख्या 250 से 300 के बीच है। कानपुर के आसपास के गांवों और करीब 100 से 150 किलोमीटर क्षेत्र के फुटकर चाय विक्रेता इन्हीं बाजारों से खरीदारी करते हैं।
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कानपुर में कई बड़ी चाय कंपनियां भी पैकेजिंग और कारोबार से जुड़ी हैं। शहर के बाजारों से ही सालाना करीब 800 करोड़ का कारोबार होता है। इसमें बड़ी कंपनियों का हिस्सा शामिल नहीं है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से शहर में करीब 25 से 30 हजार लोग इस कारोबार से जुड़े हैं।
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तीन माह के दौरान औसत बिक्री में करीब 25 फीसदी की कमी आई है। बिक्री में इतनी तेजी से गिरावट आने का अंदाजा कारोबारी भी नहीं लगा पा रहे हैं। कुछ कारोबारियों का मानना है कि ऑनलाइन बिक्री के कारण बाजार में ग्राहकों की आवक घटी है।
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कानपुर में नयागंज, एक्सप्रेस रोड, कलक्टरगंज आदि बाजार चाय की खुदरा और थोक बिक्री के प्रमुख केंद्र हैं। यहां करीब 80 से अधिक व्यापारी चाय के थोक कारोबार से जुड़े हैं। शहर भर में फुटकर व्यापारियों की संख्या 250 से 300 के बीच है। कानपुर के आसपास के गांवों और करीब 100 से 150 किलोमीटर क्षेत्र के फुटकर चाय विक्रेता इन्हीं बाजारों से खरीदारी करते हैं।
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कानपुर में कई बड़ी चाय कंपनियां भी पैकेजिंग और कारोबार से जुड़ी हैं। शहर के बाजारों से ही सालाना करीब 800 करोड़ का कारोबार होता है। इसमें बड़ी कंपनियों का हिस्सा शामिल नहीं है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से शहर में करीब 25 से 30 हजार लोग इस कारोबार से जुड़े हैं।
लिखापढ़ी-स्कीम से घटी बिक्री
शहर के बाजारों से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में फुटकर विक्रेता आते हैं। जीएसटी लागू होने के बाद अब 50 हजार रुपये से अधिक का माल लेने पर ई-वे बिल जेनरेट करना पड़ता है। भुगतान भी बैंक के माध्यम से होता है। लिखा-पढ़ी बढ़ने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के विक्रेता कम माल खरीदते हैं।
- सत्य प्रकाश बंसल, अध्यक्ष, कानपुर चाय व्यापार मंडल
ऑनलाइन कारोबार जिम्मेदार
तीन माह से बिक्री में करीब 25 फीसदी की कमी देखने को मिल रही है। चाय ही नहीं अन्य रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं की बिक्री घटने का एक कारण ऑनलाइन कारोबार भी है। लोग विभिन्न वेबसाइट के जरिए खरीदारी कर रहे हैं। इस कारण थोक और फुटकर बाजार में ग्राहकों की आमद घटी है।
- श्याम अग्रहरि, महामंत्री, चाय व्यापार मंडल
नई योजनाएं स्थगित
चाय की भी डिमांड 10 से 15 फीसदी घटी है। बाजार में कैश का फ्लो कम होने के कारण खरीदार सीमित मात्रा में ही माल मंगवा रहे हैं। साथ ही युवाओं में पारंपरिक चाय के बजाय ग्रीन टी आदि का चलन बढ़ा है। इसका भी असर है।
- दिनेश चंद्र अग्रवाल, निदेशक, मोहिनी चाय
नहीं बढ़ेंगे दाम
अगस्त में चाय के दामों में तेजी आती है। बीते तीन माह से बिक्री की जो स्थिति है, उससे लगता नहीं कि कोई दाम बढ़ाने का जोखिम उठा सकेगा। शहर के थोक बाजार में 120 रुपये किलो से लेकर 300 रुपये प्रति किलो वाली चाय मौजूद है।
- सतीश बंसल, चाय कारोबारी
शहर के बाजारों से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में फुटकर विक्रेता आते हैं। जीएसटी लागू होने के बाद अब 50 हजार रुपये से अधिक का माल लेने पर ई-वे बिल जेनरेट करना पड़ता है। भुगतान भी बैंक के माध्यम से होता है। लिखा-पढ़ी बढ़ने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के विक्रेता कम माल खरीदते हैं।
- सत्य प्रकाश बंसल, अध्यक्ष, कानपुर चाय व्यापार मंडल
ऑनलाइन कारोबार जिम्मेदार
तीन माह से बिक्री में करीब 25 फीसदी की कमी देखने को मिल रही है। चाय ही नहीं अन्य रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं की बिक्री घटने का एक कारण ऑनलाइन कारोबार भी है। लोग विभिन्न वेबसाइट के जरिए खरीदारी कर रहे हैं। इस कारण थोक और फुटकर बाजार में ग्राहकों की आमद घटी है।
- श्याम अग्रहरि, महामंत्री, चाय व्यापार मंडल
नई योजनाएं स्थगित
चाय की भी डिमांड 10 से 15 फीसदी घटी है। बाजार में कैश का फ्लो कम होने के कारण खरीदार सीमित मात्रा में ही माल मंगवा रहे हैं। साथ ही युवाओं में पारंपरिक चाय के बजाय ग्रीन टी आदि का चलन बढ़ा है। इसका भी असर है।
- दिनेश चंद्र अग्रवाल, निदेशक, मोहिनी चाय
नहीं बढ़ेंगे दाम
अगस्त में चाय के दामों में तेजी आती है। बीते तीन माह से बिक्री की जो स्थिति है, उससे लगता नहीं कि कोई दाम बढ़ाने का जोखिम उठा सकेगा। शहर के थोक बाजार में 120 रुपये किलो से लेकर 300 रुपये प्रति किलो वाली चाय मौजूद है।
- सतीश बंसल, चाय कारोबारी