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काला बच्चा हत्याकांडः जला शव मिलने पर भड़का था दंगा, गिरीश बाजपेई हाईकोर्ट से दोषमुक्त

Fri, 31 May 2019 04:24 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रशांत कुमार Updated Fri, 31 May 2019 04:24 PM IST
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1994 bjp leader kala baccha murder case
प्रतीकात्मक तस्वीर
कानपुर के बाबूपुरवा में चर्चित भाजपा नेता काला बच्चा हत्याकांड के बाद भड़के दंगे में सेशन कोर्ट से उम्रकैद की सजा पाए गिरीश चंद्र बाजपेई को हाईकोर्ट ने सुबूतों के अभाव में दोषमुक्त ठहराया है। गिरीश पर दंगे के दौरान एक व्यक्ति की हत्या कर शव जलाने का आरोप था। परवाना पहुंचने के बाद गिरीश को जेल से रिहा कर दिया गया।
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बाबूपुरवा के खटिकाना पसियाना में 10 फरवरी 1994 को जला हुआ शव मिला था। एसआई मामचंद ने अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई थी। बगाही की रहने वाली नगमा परवीन ने मृतक की अपने पति नफीस अहमद के रूप में शिनाख्त की और पोस्टमार्टम के बाद 13 फरवरी को हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

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नगमा का कहना था कि कल्लू की बल्ब फैक्ट्री में नफीस और पिता जाकिर अली काम करते थे। नौ फरवरी को काला बच्चा की हत्या के बाद माहौल गर्म था। आरोप थे कि जब उसके पति और पिता घर आ रहे थे, तभी पप्पू उर्फ बंता, राकेश सोनकर उर्फ मक्कू, मनोज कंजा, रमेश, कमल और गिरीश चंद्र बाजपेई ने रात 12 बजे नफीस को पकड़ लिया और हत्या कर शव जला दिया।

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अहमद अली और महबूब भी घटना के चश्मदीद थे। 24 फरवरी 1994 को जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी गई थी। विवेचक ने गिरीश चंद्र बाजपेई, पप्पू उर्फ बंता, मक्कू और रमेश उर्फ मनोज कंजा के खिलाफ बलवा और हत्या के मामले में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। सुनवाई के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 16 नवंबर 2006 को गिरीश को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जबकि अन्य तीनों को बरी कर दिया था। गिरीश ने हाईकोर्ट में अपील की थी।

 

न्यायमूर्ति शशिकांत और अजय भनोट की खंडपीठ ने गिरीश के खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने पर उन्हें दोषमुक्त करार दिया। लगभग 13 साल तक जेल में बंद रहने के बाद गुरुवार को गिरीश जेल से रिहा हुए।

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