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बैंक हड़ताल से 45 करोड़ का लेनदेन प्रभावित
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उरई। केंद्र सरकार की नीतियों, बैंकों को समायोजित व अन्य लंबित मांगों को लेकर बुधवार को राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारी एक बार फिर हड़ताल पर रहे। हड़ताल से जहां नेशनल बैंक बंद रहे वहीं ग्रामीण बैंके खुले नजर आए। बैंक अधिकारियों ने एसबीआई व पंजाब नेशनल बैंक के सामने प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की।
बैंक यूनियन के नेताओं का दावा है कि बुधवार को बैंक बंदी से करीब 45 करोड़ रुपये का लेन देन प्रभावित हुआ है वही करीब पांच लाख रुपये के राजस्व को चपत लगी है।
बात दें कि 11 वां वेतनमान और न्यू पेंशन स्कीम के विरोध में 21 दिसंबर दिन शुक्रवार को देश भर के राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारियों ने ताला बंदी कर हड़ताल की घोषणा की थी।
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इसके बाद शनिवार व रविवार को सार्वजनिक अवकाश होने के बाद एक बार फिर बुधवार को बैंक यूनियन के नेताओं ने बैंकों के समायोजित करने के सरकार के फैसले के विरोध में हड़ताल की।
बैंक बंदी से जहां व्यापार व उद्योग बुरी तरह प्रभावित रहे, तो वहीं आम ग्राहकों को भी खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। बैंक यूनियन के नेताओं ने पीएनबी बैंक व एसबीआई बैंक के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की।
इस दौरान पंजाब नेशनल बैंक यूनियन के नेता नारायण शरण मिश्रा ने कहा कि यह हड़ताल बैंक कर्मचारियों के लिए नहीं बल्कि आम जनता के हितों के लिए है और देश के कुबेर माफिया के खिलाफ है। देश में कुछ माफिया सरकार की गलत नीतियों के चलते अरबों रुपया का कर्ज लेकर डकार जाते है।
स्टेट बैंक यूनियन के नेता के हरिहर सक्सेना ने कहा कि इन बड़े-बड़े कर्जदारों के कारण ही बैंक कमजोर हुई है अब गलतियां छुपाने के लिए सरकार बैंकों का विलय करना चाहती है, जो सही नहीं है।
इलाहाबाद बैंक के नेता सुंदर लाल वर्मा ने बताया कि इस हड़ताल से जिले में करीब 45 से 50 करोड़ का लेन देन प्रभावित हुआ है। इस दौरान महाबीर प्रजापति, नारायण शरण, ओम प्रकाश, शिवपाल सिंह, उमेश तिवारी, शिव कुमार, देवेन्द्र सिंह, त्रिलोक सिंह, राकेश त्रिपाठी, हरिहर सक्सेना आदि कर्मचारी मौजूद रहे।
माह के अंत में भारी पड़ रही बंदी
आम ग्राहकों व व्यापारियों को माह के अंतिम सप्ताह में बैंकों से अधिक लेन-देन करना पड़ता है, लेकिन इस माह लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति यह है कि शुक्रवार के बाद सिर्फ सोमवार को एक दिन बैंक के लिए बैंक खुली। बुधवार को बैंक हड़ताल से ग्राहक मायूस नजर आए।
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बैंक यूनियन के नेताओं का दावा है कि बुधवार को बैंक बंदी से करीब 45 करोड़ रुपये का लेन देन प्रभावित हुआ है वही करीब पांच लाख रुपये के राजस्व को चपत लगी है।
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बात दें कि 11 वां वेतनमान और न्यू पेंशन स्कीम के विरोध में 21 दिसंबर दिन शुक्रवार को देश भर के राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारियों ने ताला बंदी कर हड़ताल की घोषणा की थी।
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इसके बाद शनिवार व रविवार को सार्वजनिक अवकाश होने के बाद एक बार फिर बुधवार को बैंक यूनियन के नेताओं ने बैंकों के समायोजित करने के सरकार के फैसले के विरोध में हड़ताल की।
बैंक बंदी से जहां व्यापार व उद्योग बुरी तरह प्रभावित रहे, तो वहीं आम ग्राहकों को भी खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। बैंक यूनियन के नेताओं ने पीएनबी बैंक व एसबीआई बैंक के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की।
इस दौरान पंजाब नेशनल बैंक यूनियन के नेता नारायण शरण मिश्रा ने कहा कि यह हड़ताल बैंक कर्मचारियों के लिए नहीं बल्कि आम जनता के हितों के लिए है और देश के कुबेर माफिया के खिलाफ है। देश में कुछ माफिया सरकार की गलत नीतियों के चलते अरबों रुपया का कर्ज लेकर डकार जाते है।
स्टेट बैंक यूनियन के नेता के हरिहर सक्सेना ने कहा कि इन बड़े-बड़े कर्जदारों के कारण ही बैंक कमजोर हुई है अब गलतियां छुपाने के लिए सरकार बैंकों का विलय करना चाहती है, जो सही नहीं है।
इलाहाबाद बैंक के नेता सुंदर लाल वर्मा ने बताया कि इस हड़ताल से जिले में करीब 45 से 50 करोड़ का लेन देन प्रभावित हुआ है। इस दौरान महाबीर प्रजापति, नारायण शरण, ओम प्रकाश, शिवपाल सिंह, उमेश तिवारी, शिव कुमार, देवेन्द्र सिंह, त्रिलोक सिंह, राकेश त्रिपाठी, हरिहर सक्सेना आदि कर्मचारी मौजूद रहे।
माह के अंत में भारी पड़ रही बंदी
आम ग्राहकों व व्यापारियों को माह के अंतिम सप्ताह में बैंकों से अधिक लेन-देन करना पड़ता है, लेकिन इस माह लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति यह है कि शुक्रवार के बाद सिर्फ सोमवार को एक दिन बैंक के लिए बैंक खुली। बुधवार को बैंक हड़ताल से ग्राहक मायूस नजर आए।