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शासन ने मांगी डस्टबिन खरीद की रिपोर्ट
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अमर उजाला ब्यूरो
कानपुर देहात। ग्राम पंचायतों में डस्टबिन खरीद घोटाले की रिपोर्ट शासन ने तबल की है। पिछले वर्ष 267 ग्राम पंचायतों में डस्टबिन खरीद में वित्तीय अनियमितता की गई थी। डीएम के आदेश पर हुई जांच में घोटाला उजागर होने के बावजूद किसी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई। अब शासन ने डस्टबिन खरीद के अलावा स्ट्रीट लाइट, सोलर लाइट और सफाईकर्मियों की किट खरीद का ब्योरा भी तलब कर लिया है।
वर्ष 2018 में तत्कालीन डीपीआरओ के मौखिक आदेश पर 267 ग्राम पंचायतों में दो फार्मों ने 10-10 डस्टबिन की आपूर्ति की थी। प्रत्येक डस्टबिन की कीमत 3600 रुपये लगाई गई थी। अधिकारियों ने दबाव डालकर 36 ग्राम प्रधानों से 36000-36000 रुपये का भुगतान भी करवा दिया। डस्टबिन की गुणवत्ता खराब होने के कारण कई प्रधानों ने भुगतान करने से मना करने के साथ जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह से शिकायत कर दी। इस पर डीएम ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट राजू उपाध्याय की अगुवाई में तीन सदस्यीय कमेटी से डस्टबिन की गुणवत्ता और खरीद के नियमों की जांच कराई। जांच कमेटी को खरीद में तत्कालीन डीपीआरओ की भूमिका गड़बड़ी मिली। इसके अलावा कीमत की तुलना में गुणवत्ता भी खराब पाई गई।
खरीद में वित्तीय नियमों का पालन भी नहीं किया गया। जांच रिपोर्ट में डस्टबिन की कीमत 13000 रुपये अधिक बताई गई थी। उपाध्याय की टीम ने जांच कर रिपोर्ट डीएम को सौंपी दी थी लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया। डस्टबिन समेत अन्य खरीद में प्रदेश के अन्य जिलों में भी गड़बड़ी की शिकायतें शासन तक पहुंचीं। इस पर निदेशक पंचायती राज विभाग मासूम अली सरवर ने डीपीआरओ से ग्राम पंचायतों में डस्टबिन खरीद, स्ट्रीट लाइट, सोलर लाइट और सफाईकर्मियों की किट खरीद का विवरण तलब किया है। डीपीआरओ शिवशंकर सिंह ने बताया कि निर्धारित प्रारूप में निदेशक ने सूचना मांगी गई है। सभी बीडीओ को पत्र लिखकर पांच दिन में विवरण मांगा गया है। जिले में डस्टबिन खरीद में घोटाले पर डीपीआरओ चुप्पी साथ गए।
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शासन ने मांगी डस्टबिन खरीद की रिपोर्ट
267 ग्राम पंचायतों में खरीदे गए थे 10-10 डस्टबिन
3600 रुपये लगाई गई थी प्रत्येक डस्टबिन की कीमत
36प्रधानों पर दबाव डालकर भुगतान भी करा दिया गया
क्रासर
तीन सदस्यीय कमेटी की जांच में उजागर हुआ था घोटाला
कानपुर देहात। ग्राम पंचायतों में डस्टबिन खरीद घोटाले की रिपोर्ट शासन ने तबल की है। पिछले वर्ष 267 ग्राम पंचायतों में डस्टबिन खरीद में वित्तीय अनियमितता की गई थी। डीएम के आदेश पर हुई जांच में घोटाला उजागर होने के बावजूद किसी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई। अब शासन ने डस्टबिन खरीद के अलावा स्ट्रीट लाइट, सोलर लाइट और सफाईकर्मियों की किट खरीद का ब्योरा भी तलब कर लिया है।
वर्ष 2018 में तत्कालीन डीपीआरओ के मौखिक आदेश पर 267 ग्राम पंचायतों में दो फार्मों ने 10-10 डस्टबिन की आपूर्ति की थी। प्रत्येक डस्टबिन की कीमत 3600 रुपये लगाई गई थी। अधिकारियों ने दबाव डालकर 36 ग्राम प्रधानों से 36000-36000 रुपये का भुगतान भी करवा दिया। डस्टबिन की गुणवत्ता खराब होने के कारण कई प्रधानों ने भुगतान करने से मना करने के साथ जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह से शिकायत कर दी। इस पर डीएम ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट राजू उपाध्याय की अगुवाई में तीन सदस्यीय कमेटी से डस्टबिन की गुणवत्ता और खरीद के नियमों की जांच कराई। जांच कमेटी को खरीद में तत्कालीन डीपीआरओ की भूमिका गड़बड़ी मिली। इसके अलावा कीमत की तुलना में गुणवत्ता भी खराब पाई गई।
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खरीद में वित्तीय नियमों का पालन भी नहीं किया गया। जांच रिपोर्ट में डस्टबिन की कीमत 13000 रुपये अधिक बताई गई थी। उपाध्याय की टीम ने जांच कर रिपोर्ट डीएम को सौंपी दी थी लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया। डस्टबिन समेत अन्य खरीद में प्रदेश के अन्य जिलों में भी गड़बड़ी की शिकायतें शासन तक पहुंचीं। इस पर निदेशक पंचायती राज विभाग मासूम अली सरवर ने डीपीआरओ से ग्राम पंचायतों में डस्टबिन खरीद, स्ट्रीट लाइट, सोलर लाइट और सफाईकर्मियों की किट खरीद का विवरण तलब किया है। डीपीआरओ शिवशंकर सिंह ने बताया कि निर्धारित प्रारूप में निदेशक ने सूचना मांगी गई है। सभी बीडीओ को पत्र लिखकर पांच दिन में विवरण मांगा गया है। जिले में डस्टबिन खरीद में घोटाले पर डीपीआरओ चुप्पी साथ गए।
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शासन ने मांगी डस्टबिन खरीद की रिपोर्ट
267 ग्राम पंचायतों में खरीदे गए थे 10-10 डस्टबिन
3600 रुपये लगाई गई थी प्रत्येक डस्टबिन की कीमत
36प्रधानों पर दबाव डालकर भुगतान भी करा दिया गया
क्रासर
तीन सदस्यीय कमेटी की जांच में उजागर हुआ था घोटाला