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मौनी अमावस्या आज, स्नान से मिलता पुण्य
Updated Mon, 15 Jan 2018 11:13 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। मौनी अमावस्या मंगलवार को मनाई जाएगी। मान्यताओं के अनुसार इस दिन संगम में देवताओं का निवास होता है इसलिए इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस मास को भी कार्तिक के समान पुण्य मास कहा गया है। गंगा तट पर भक्त जन एक मास तक कुटी बनाकर रहते हैं।
आचार्य दुर्गा दत्त शास्त्री ने बताया कि संगम में स्नान के संदर्भ में एक अन्य सागर मंथन की कथा का उल्लेख किया गया है। कथा के अनुसार जब सागर मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए उस समय देवताओं एवं असुरों में अमृत कलश के लिए खींचातानी शुरू हो गई। इससे अमृत की कुछ बूंदे छलक कर इलाहाबाद, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में जा गिरीं। यही कारण है कि यहां कि नदियों में स्नान करने पर अमृत स्नान का पुण्य प्राप्त होता है।
आचार्य पंडित कृष्ण दत्त अवस्थी ने बताया कि मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने के बाद सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, धन, गो, भूमि, स्वर्ण दान देना चाहिए। इस दिन तिल दान भी उत्तम माना गया है। आज के दिन भगवान विष्णु और शिव जी दोनों की पूजा का विधान है। पीपल में अर्घ्य देकर परिक्रमा करें और दीप दान दें। इस दिन जिनके लिए व्रत करना संभव नहीं हो वह मीठा भोजन करे।
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फतेहपुर। मौनी अमावस्या मंगलवार को मनाई जाएगी। मान्यताओं के अनुसार इस दिन संगम में देवताओं का निवास होता है इसलिए इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस मास को भी कार्तिक के समान पुण्य मास कहा गया है। गंगा तट पर भक्त जन एक मास तक कुटी बनाकर रहते हैं।
आचार्य दुर्गा दत्त शास्त्री ने बताया कि संगम में स्नान के संदर्भ में एक अन्य सागर मंथन की कथा का उल्लेख किया गया है। कथा के अनुसार जब सागर मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए उस समय देवताओं एवं असुरों में अमृत कलश के लिए खींचातानी शुरू हो गई। इससे अमृत की कुछ बूंदे छलक कर इलाहाबाद, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में जा गिरीं। यही कारण है कि यहां कि नदियों में स्नान करने पर अमृत स्नान का पुण्य प्राप्त होता है।
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आचार्य पंडित कृष्ण दत्त अवस्थी ने बताया कि मौनी अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने के बाद सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, धन, गो, भूमि, स्वर्ण दान देना चाहिए। इस दिन तिल दान भी उत्तम माना गया है। आज के दिन भगवान विष्णु और शिव जी दोनों की पूजा का विधान है। पीपल में अर्घ्य देकर परिक्रमा करें और दीप दान दें। इस दिन जिनके लिए व्रत करना संभव नहीं हो वह मीठा भोजन करे।
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