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Kanpur News: निवेश के नाम पर फेसबुक के जरिये 1.31 करोड़ की ठगी
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कानपुर। फेसबुक के जरिये निवेश का जाल बिछाकर आजादनगर निवासी देवेश दुबे से 1.31 करोड़ रुपये अलग-अलग बैंक खातों में जमा करा लिए गए। साइबर ठग ऑनलाइन खाते में निवेश की बढ़ती रकम और मुनाफा दिखाते रहे। रकम निकालने की कोशिश की तो 34,08,654 रुपये कमीशन के नाम पर और जमा करने को कहा। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है।
देवेश दुबे ने दर्ज प्राथमिकी में बताया कि फेसबुक पर मिले एक संपर्क के जरिये वह फोर्ब्स एक्सपीरियंस सर्विसेज ग्रुप नाम के समूह से जुड़े। करीब 92 सदस्यों वाले इस समूह में प्रो. रोहन वर्मा खुद को फोर्ब्स ईएमएफ का सह-मालिक बताता था। उन्हें अलग ऑनलाइन खाता खोलने के लिए एक संपर्क दिया गया। इसमें फोटो, पहचान पत्र, ई-मेल, मोबाइल नंबर, ग्राहक पहचान संबंधी विवरण और डिजिटल हस्ताक्षर लिए गए। अनीता देसाई ने खुद को फोर्ब्स की प्रतिनिधि बताते हुए अलग-अलग लाभार्थी बैंक खातों की जानकारी दी। 10 अगस्त से सात सितंबर के बीच देवेश ने 1,31,62,466 रुपये बताए गए खातों में भेज दिए। ऑनलाइन खाते में रकम पर कारोबार और मुनाफा दिखता रहा।
रकम निकालने पर कमीशन के नाम पर 34.08 लाख रुपये और मांगे गए तब ठगी का पता चला। साइबर इंस्पेक्टर अभय कुमार सिंह के अनुसार अज्ञात पर धोखाधड़ी, आईटीएक्ट की धारा में प्राथमिकी दर्ज कर बैंक खातों और लेनदेन के साथ फेसबुक समूह, मोबाइल नंबर, ऑनलाइन खाते की जांच की जा रही है।
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देवेश दुबे ने दर्ज प्राथमिकी में बताया कि फेसबुक पर मिले एक संपर्क के जरिये वह फोर्ब्स एक्सपीरियंस सर्विसेज ग्रुप नाम के समूह से जुड़े। करीब 92 सदस्यों वाले इस समूह में प्रो. रोहन वर्मा खुद को फोर्ब्स ईएमएफ का सह-मालिक बताता था। उन्हें अलग ऑनलाइन खाता खोलने के लिए एक संपर्क दिया गया। इसमें फोटो, पहचान पत्र, ई-मेल, मोबाइल नंबर, ग्राहक पहचान संबंधी विवरण और डिजिटल हस्ताक्षर लिए गए। अनीता देसाई ने खुद को फोर्ब्स की प्रतिनिधि बताते हुए अलग-अलग लाभार्थी बैंक खातों की जानकारी दी। 10 अगस्त से सात सितंबर के बीच देवेश ने 1,31,62,466 रुपये बताए गए खातों में भेज दिए। ऑनलाइन खाते में रकम पर कारोबार और मुनाफा दिखता रहा।
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रकम निकालने पर कमीशन के नाम पर 34.08 लाख रुपये और मांगे गए तब ठगी का पता चला। साइबर इंस्पेक्टर अभय कुमार सिंह के अनुसार अज्ञात पर धोखाधड़ी, आईटीएक्ट की धारा में प्राथमिकी दर्ज कर बैंक खातों और लेनदेन के साथ फेसबुक समूह, मोबाइल नंबर, ऑनलाइन खाते की जांच की जा रही है।
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