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13065 बच्चे कुपोषित, 2104 अतिकुपोषित, कैसे लड़ेंगे कारोना से जंग

Fri, 28 May 2021 12:55 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 28 May 2021 12:55 AM IST
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13065 children malnourished, 2104 undernourished, how to fight against Karona
कानपुर देहात। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों को बचाने में प्रशासन व स्वास्थ्य महकमे के सामने बड़ी चुनौती होगी। जिले में 13065 बच्चे कुपोषित हैं, वहीं 2104 अतिकुपोषित की श्रेणी में हैं।
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ऐसे में इन बच्चों के स्वास्थ्य पर अगर समय से ध्यान नहीं दिया गया तो यह कोरोना की संभावित तीसरी लहर से कैसे जंग लड़ सकेंगे। अति कुपोषित बच्चों को उपचार व बेहतर देखभाल के लिए जिला कुपोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती करने की व्यवस्था भी इस समय ध्वस्त है।
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कोरोना काल की दूसरी लहर अभी खत्म भी नहीं हुई है कि तीसरी लहर को लेकर चिंता दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों ने तीसरी लहर को खासतौर पर बच्चों के लिए नुकसानदायक बताया है। ऐसे में अभिभावक चिंतित हैं। जिला प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 13065 बच्चे कुपोषित हैं। वहीं 2104 अतिकुपोषित की श्रेणी में हैं।
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अगर विशेषज्ञों की बात सही साबित हुई तो सबसे अधिक कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों के जीवन पर खतरा मंडराने लगेगा। कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चे गरीब परिवारों से हैं। उन्हें पौष्टिक आहार व पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराने की जिम्मेदारी बाल विकास विभाग की है। कोरोना संक्रमण फैलने पर पुष्टाहार मिलने की योजना धड़ाम हो गई है।
स्वास्थ्य विभाग एवं प्रशासन ने कोई तैयारी नहीं की है। अप्रैल में पुनर्वास केंद्र में कुछ बच्चे भर्ती थे जिन्हें कोरोना संक्रमण को देखते हुए छुट्टी देकर घर भेज दिया गया था। वहीं वहां के डॉक्टर व कर्मियों की अन्य स्थानों पर ड्यूटी लगा दी गई है। आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को कोरोना मरीजों के सर्वे में लगा दिया गया है। ऐसे में शून्य से छह वर्षों तक के बच्चों के लिए चलाई जा रही योजना का सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है।
बच्चों का नहीं किया जा रहा फॉलोअप
कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों को टेलीमेडिसन के माध्यम से इलाज और जानकारी देने का दावा किया जा रहा है। टेलीमेडिसन व्यवस्था को चालू तो किया गया लेकिन बच्चों का फॉलोअप नहीं किया जा रहा है। अगर कोई पारिवारिक सदस्य जागरूकता दिखाते हुए खुद फोन करके पूछ ले तो जानकारी मिल जाएगी। वहीं स्वास्थ्य विभाग की तरफ से बच्चों की कोई निगरानी नहीं की जा रही है।
नहीं की गई कोई तैयारी
कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों को सुरक्षित करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं दिखाई दे रही है, जबकि शासन के निर्देश हैं कि एसएनसीयू वार्ड को दस बेड का कोविड अस्पताल बनाया जाए। इसके बाद भी अभी तक धरातल पर कोई कार्य नजर नहीं आ रहा है। अगर समस्या बढ़ी तो हालात बेकाबू हो सकते हैं।
1788 आंगनबाड़ी केंद्रों में 194156 बच्चे पंजीकृत
जिले के दस ब्लॉकों में कुल मिलाकर 1788 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों में 194156 बच्चे पंजीकृत हैं। इन बच्चों को पौष्टिक आहार के नाम पर गेहूं, चावल, चने की दाल व खाद्य तेल दिया जा रहा है। इतनी खाद्य सामग्री से कुपोषित बच्चों को स्वस्थ करने की सरकारी कवायद चल रही है। जिम्मेदार शासन की ओर से दी जा रही राशन सामग्री का वितरण कराने की बात कह रहे हैं। हालांकि वितरण व्यवस्था पर भी गांवों में सवाल उठाए जा रहे हैं।

आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों को अतिरिक्त राशन दिए जाने की व्यवस्था है। केंद्रों में राशन वितरण की निगरानी की जा रही है। शत-प्रतिशत वितरण कराया जा रहा है। अभी शासन की ओर से इस बाबत कोई खास निर्देश नहीं मिले हैं।
- राकेश कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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