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आबादी वाले इलाकों में बारूद के ढेर
Updated Sat, 07 Oct 2017 12:39 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। लगता है कि जिला प्रशासन ने कानपुर के सरसौल में हुए हादसे से सबक नहीं लिया है। यहां के भी शहर और कस्बों में कई ऐसे इलाके हैं, जहां आबादी के अंदर बारूद के ढेर लगे हैं।
यहां वैध और अवैध तरीके से पटाखे बनाने और स्टोर करने का कारोबार तेजी से चल रहा है। जरा सी लापरवाही से बड़ा हादसा हो सकता है। पहले भी पुलिस और प्रशासन की अनदेखी से हादसे हो चुके हैं।
दिवाली में अब चंद दिन ही बचे हैं। इस कारण आतिशबाजों ने पटाखे बनाने और स्टोर करने का कार्य तेज कर दिया है। सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन की तैयारियां दिखाई नहीं दे रही हैं। कई आतिशबाज बिना लाइसेंस आबादी वाले इलाकों में पटाखे तैयार कर रहे हैं। इन लोगों ने बारूद, पोटाश, गंधक जैसी घातक सामग्री जुटा रखी है।
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कुछ ही लोगों के पास लाइसेंस हैं, जो नियमों के अनुसार कारोबार करते हैं। कई पुराने लाइसेंस धारकों के भी हालात ठीक नहीं हैं। उनके पास दशकों पहले के लाइसेंस हैं। उनके पटाखे बनाने की जगह का नक्शा और आबादी क्षेत्र भी बदल चुका है, लेकिन वे पुरानी जगह ही पटाखे बना और स्टोर कर रहे हैं, जबकि विस्फोटक एडवाइजरी कमेटी नई दिल्ली ने ऐसी दुकानों और पटाखे बनाने के अड्डों को हटाने के आदेश दिए हैं।
एफएसओ उमाशंकर यादव का कहना है कि सभी को नोटिस जारी कर दी गई है। यदि नहीं हटाते हैं तो इसकी सूचना प्रशासन को दी जाएगी। प्रशासन अपने स्तर से कार्रवाई करेगा।
आबादी के बीच दुकानें
फायर विभाग के मुताबिक घनी आबादी में फतेहपुर शहर के अंदर दोे, धाता में दो, जहानाबाद में दो, छिवलहा में तीन, बिंदकी में एक, थरियांव में एक और जाफरगंज में दो दुकानें हैं। इनके पास देशी, विदेशी पटाखे बनाने और बेंचने का लाइसेंस है।
इनसेट...
जिले में कुल दुकानें 63
सदर तहसील 28
बिंदकी तहसील 14
खागा तहसील 21
इनसेट...
इन इलाकों में बनते हैं अवैध पटाखे
अवैध पटाखे बनाने वाले कुछ इलाके चिह्नित किए जा रहे हैं। उधन्नापुर, आधारपुर, उनवा, उसरैना, हथगाम, हंसवा, नौबस्ता, थरियांव, आमापुर, बहरामपुर, मलवां के आदमपुर, सूपा, जहानाबाद, जाफरगंज, धाता, खखरेरू, गाजीपुर, असोथर, ललौली, हुसैनगंज समेत कई इलाकों में अवैध रूप से पटाखे बनाए जा रहे हैं। पटाखे के कारोबार में मुखिया और परिवार के कई सदस्य शामिल हैं।
जिले में हुए अब तक बड़े हादसे
1. 2015 को दिवाली की रात पटाखों से लगी आग में आईटीआई सब्जी मंडी हो गई थी राख।
2. 2014 में मलवां के आदमपुर से अवैध रूप से बेचने के लिए लाई जा रही आतिशबाजी में धमाके से एक बाइक सवार की हो गई थी मौत।
3. 2010 में जाफरगंज कस्बे में बारूद के धमाके से एक ही परिवार के पांच लोगों की हो गई थी मौत।
4. 2007 में ललौली थाना क्षेत्र में पटाखों में विस्फोट से चली गई थी सात लोगों की जान।
5. 2001 में अमौली में आतिशबाज के घर में धमाके से दो बच्चों की हो गई थी मौत।
6. 1999 में जाफरगंज कस्बे में आतिशबाजी के विस्फोट में ग्रामीण की चली गई थी जान।
7. 1998 में बिंदकी के मुगलाही में मकान में बनाई जा रही आतिशबाजी में विस्फोट से तीन लोगों की जा चुकी है जान।
इनसेट...
इनसेट...
खागा में भी पटाखों का भंडारण शुरू
खागा (ब्यूरो)। दिवाली नजदीक आते ही पटाखों का भंडारण शुरू हो गया है। लाइसेंस धारक आतिशबाज भी निर्धारित मात्रा से अधिक पटाखे बना रहे हैं। गैर लाइसेंसी भी चोरी छिपे पटाखे बनाने में जुटे हैं। कानपुर, इलाहाबाद से खरीदकर पटाखों का स्टाक किया जा रहा है। तहसील के सभी थाना क्षेत्रों में 13 लाइसेंसी आतिशबाज हैं। इनके अलावा भी करीब आधा दर्जन लोग अवैध रूप से पटाखे बनाते हैं। हथगाम थाना क्षेत्र में चार, धाता में दो, कोतवाली में चार और घोष, खखरेरू, किशनपुर में एक एक लाइसेंसी आतिशबाज हैं। इनके अलावा नगर समेत हथगाम, धाता, खखरेरू कस्बों में पटाखों का स्टाक किया जा रहा है। एसडीएम अमित भट्ट ने बताया कि दो तीन दिन के अंदर सभी लाइसेंसियों के पटाखा बनाने के स्थानों का सत्यापन किया जाएगा। नियम विरुद्ध पाए जाने पर कार्रवाई होगी।
आबादी वाले इलाकों में बारूद के ढेर
कई इलाकों में अवैध तरीके से बनाए जा रहे हैं पटाखे
पुलिस व दमकल विभाग की खामोशी पड़ न जाए भारी
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फतेहपुर। लगता है कि जिला प्रशासन ने कानपुर के सरसौल में हुए हादसे से सबक नहीं लिया है। यहां के भी शहर और कस्बों में कई ऐसे इलाके हैं, जहां आबादी के अंदर बारूद के ढेर लगे हैं।
यहां वैध और अवैध तरीके से पटाखे बनाने और स्टोर करने का कारोबार तेजी से चल रहा है। जरा सी लापरवाही से बड़ा हादसा हो सकता है। पहले भी पुलिस और प्रशासन की अनदेखी से हादसे हो चुके हैं।
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दिवाली में अब चंद दिन ही बचे हैं। इस कारण आतिशबाजों ने पटाखे बनाने और स्टोर करने का कार्य तेज कर दिया है। सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन की तैयारियां दिखाई नहीं दे रही हैं। कई आतिशबाज बिना लाइसेंस आबादी वाले इलाकों में पटाखे तैयार कर रहे हैं। इन लोगों ने बारूद, पोटाश, गंधक जैसी घातक सामग्री जुटा रखी है।
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कुछ ही लोगों के पास लाइसेंस हैं, जो नियमों के अनुसार कारोबार करते हैं। कई पुराने लाइसेंस धारकों के भी हालात ठीक नहीं हैं। उनके पास दशकों पहले के लाइसेंस हैं। उनके पटाखे बनाने की जगह का नक्शा और आबादी क्षेत्र भी बदल चुका है, लेकिन वे पुरानी जगह ही पटाखे बना और स्टोर कर रहे हैं, जबकि विस्फोटक एडवाइजरी कमेटी नई दिल्ली ने ऐसी दुकानों और पटाखे बनाने के अड्डों को हटाने के आदेश दिए हैं।
एफएसओ उमाशंकर यादव का कहना है कि सभी को नोटिस जारी कर दी गई है। यदि नहीं हटाते हैं तो इसकी सूचना प्रशासन को दी जाएगी। प्रशासन अपने स्तर से कार्रवाई करेगा।
आबादी के बीच दुकानें
फायर विभाग के मुताबिक घनी आबादी में फतेहपुर शहर के अंदर दोे, धाता में दो, जहानाबाद में दो, छिवलहा में तीन, बिंदकी में एक, थरियांव में एक और जाफरगंज में दो दुकानें हैं। इनके पास देशी, विदेशी पटाखे बनाने और बेंचने का लाइसेंस है।
इनसेट...
जिले में कुल दुकानें 63
सदर तहसील 28
बिंदकी तहसील 14
खागा तहसील 21
इनसेट...
इन इलाकों में बनते हैं अवैध पटाखे
अवैध पटाखे बनाने वाले कुछ इलाके चिह्नित किए जा रहे हैं। उधन्नापुर, आधारपुर, उनवा, उसरैना, हथगाम, हंसवा, नौबस्ता, थरियांव, आमापुर, बहरामपुर, मलवां के आदमपुर, सूपा, जहानाबाद, जाफरगंज, धाता, खखरेरू, गाजीपुर, असोथर, ललौली, हुसैनगंज समेत कई इलाकों में अवैध रूप से पटाखे बनाए जा रहे हैं। पटाखे के कारोबार में मुखिया और परिवार के कई सदस्य शामिल हैं।
जिले में हुए अब तक बड़े हादसे
1. 2015 को दिवाली की रात पटाखों से लगी आग में आईटीआई सब्जी मंडी हो गई थी राख।
2. 2014 में मलवां के आदमपुर से अवैध रूप से बेचने के लिए लाई जा रही आतिशबाजी में धमाके से एक बाइक सवार की हो गई थी मौत।
3. 2010 में जाफरगंज कस्बे में बारूद के धमाके से एक ही परिवार के पांच लोगों की हो गई थी मौत।
4. 2007 में ललौली थाना क्षेत्र में पटाखों में विस्फोट से चली गई थी सात लोगों की जान।
5. 2001 में अमौली में आतिशबाज के घर में धमाके से दो बच्चों की हो गई थी मौत।
6. 1999 में जाफरगंज कस्बे में आतिशबाजी के विस्फोट में ग्रामीण की चली गई थी जान।
7. 1998 में बिंदकी के मुगलाही में मकान में बनाई जा रही आतिशबाजी में विस्फोट से तीन लोगों की जा चुकी है जान।
इनसेट...
इनसेट...
खागा में भी पटाखों का भंडारण शुरू
खागा (ब्यूरो)। दिवाली नजदीक आते ही पटाखों का भंडारण शुरू हो गया है। लाइसेंस धारक आतिशबाज भी निर्धारित मात्रा से अधिक पटाखे बना रहे हैं। गैर लाइसेंसी भी चोरी छिपे पटाखे बनाने में जुटे हैं। कानपुर, इलाहाबाद से खरीदकर पटाखों का स्टाक किया जा रहा है। तहसील के सभी थाना क्षेत्रों में 13 लाइसेंसी आतिशबाज हैं। इनके अलावा भी करीब आधा दर्जन लोग अवैध रूप से पटाखे बनाते हैं। हथगाम थाना क्षेत्र में चार, धाता में दो, कोतवाली में चार और घोष, खखरेरू, किशनपुर में एक एक लाइसेंसी आतिशबाज हैं। इनके अलावा नगर समेत हथगाम, धाता, खखरेरू कस्बों में पटाखों का स्टाक किया जा रहा है। एसडीएम अमित भट्ट ने बताया कि दो तीन दिन के अंदर सभी लाइसेंसियों के पटाखा बनाने के स्थानों का सत्यापन किया जाएगा। नियम विरुद्ध पाए जाने पर कार्रवाई होगी।
आबादी वाले इलाकों में बारूद के ढेर
कई इलाकों में अवैध तरीके से बनाए जा रहे हैं पटाखे
पुलिस व दमकल विभाग की खामोशी पड़ न जाए भारी