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जल स्तर गिरा, 150 नलकूपों ने छोड़ा पानी
Updated Thu, 09 Nov 2017 12:38 AM IST
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फतेहपुर। जलस्तर घटने से राजकीय खराब नलकूपों की संख्या बढ़ती जा रही है। 150 नलकूप जलस्तर नीचे जाने से बंद हो गए हैं। करीब 30 नलकूप तकनीकी खराबी व बिजली खराबी से बंद हैं। इससे खेत का पलेवा करने वाले किसानों की परेशानी बढ़ गई है।
राजकीय नलकूपों की मरम्मत में हर साल लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो रही है। जिले में 180 राजकीय नलकूप खराब हैं। अमौली ब्लाक में 35 नलकूप जलस्तर नीचे जाने से बंद हैं। खजुहा ब्लाक के 30, असोथर ब्लाक 15, हंसवा पांच, विजयीपुर 40 व धाता ब्लाक क्षेत्र में 30 राजकीय नलकूप जलस्तर नीचे जाने से बंद हैं। इससे चना, गेहूं बोने वाले किसान
खेतों का पलेवा नहीं कर पा रहे हैं। चंदापुर गांव के किसान सत्यप्रकाश ने बताया कि यमुना तिरहार में राजकीय नलकूप ही सिंचाई का साधन हैं। नलकूप खराब होने से खेतों का पलेवा नहीं कर पा रहे हैं।
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किसान राजेंद्र सिंह ने बताया कि इस साल पितृपक्ष व नवरात्रि में भी बारिश नहीं हुई। इससे खेतों की मिट्टी सूख गई है। फसल बोने के पहले खेतों में पलेवा करना पड़ेगा। नलकूप खराब होने से समस्या बढ़ गई है। लगता है कि खेत परती रह जाएंगे। किसान रामप्रकाश ने बताया कि गढ़ा का राजकीय नलकूप कई साल से बंद है। अधिकारी इसकी मरम्मत कराने में अनदेखी कर रहे हैं। निजी नलकूप से
किराए पर फसलों की सिंचाई करानी पड़ती है। अधिशासी अभियंता काशीराम राय ने बताया कि पुराने राजकीय नलकूप में 100 से 120 फीट में पाइप की हाउजिंग है। इससे नीचे मोटर नहीं जा सकती है। पुराने राजकीय नलकूप ही जलस्तर नीचे जाने से बंद हुए हैं। जलस्तर ऊपर आने पर ही नलकूपों का संचालन फिर शुरू होगा।
जलस्तर खिसका, 150 नलकूपों ने छोड़ा पानी
नलकूप खराब होने से किसान चिंतित, यमुना तिरहार में फसल बुआई का संकट
अमर उजाला ब्यूरो
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राजकीय नलकूपों की मरम्मत में हर साल लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो रही है। जिले में 180 राजकीय नलकूप खराब हैं। अमौली ब्लाक में 35 नलकूप जलस्तर नीचे जाने से बंद हैं। खजुहा ब्लाक के 30, असोथर ब्लाक 15, हंसवा पांच, विजयीपुर 40 व धाता ब्लाक क्षेत्र में 30 राजकीय नलकूप जलस्तर नीचे जाने से बंद हैं। इससे चना, गेहूं बोने वाले किसान
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खेतों का पलेवा नहीं कर पा रहे हैं। चंदापुर गांव के किसान सत्यप्रकाश ने बताया कि यमुना तिरहार में राजकीय नलकूप ही सिंचाई का साधन हैं। नलकूप खराब होने से खेतों का पलेवा नहीं कर पा रहे हैं।
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किसान राजेंद्र सिंह ने बताया कि इस साल पितृपक्ष व नवरात्रि में भी बारिश नहीं हुई। इससे खेतों की मिट्टी सूख गई है। फसल बोने के पहले खेतों में पलेवा करना पड़ेगा। नलकूप खराब होने से समस्या बढ़ गई है। लगता है कि खेत परती रह जाएंगे। किसान रामप्रकाश ने बताया कि गढ़ा का राजकीय नलकूप कई साल से बंद है। अधिकारी इसकी मरम्मत कराने में अनदेखी कर रहे हैं। निजी नलकूप से
किराए पर फसलों की सिंचाई करानी पड़ती है। अधिशासी अभियंता काशीराम राय ने बताया कि पुराने राजकीय नलकूप में 100 से 120 फीट में पाइप की हाउजिंग है। इससे नीचे मोटर नहीं जा सकती है। पुराने राजकीय नलकूप ही जलस्तर नीचे जाने से बंद हुए हैं। जलस्तर ऊपर आने पर ही नलकूपों का संचालन फिर शुरू होगा।
जलस्तर खिसका, 150 नलकूपों ने छोड़ा पानी
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अमर उजाला ब्यूरो