ठंड का कहर: कानपुर में हार्ट अटैक से 11, ब्रेन अटैक से दो की मौत
सर्दियों में हृदय रोगियों को दिक्कत बढ़ती है। इस मौसम में सचेत रहने की जरूरत होती है। ठंड दिल और दिमाग दोनों पर भारी पड़ रही है। कानपुर में हार्ट अटैक से 11 रोगियों की मौत हो गई।
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ठंड दिल और दिमाग दोनों पर भारी पड़ रही है। गलन की वजह से नसों में सिकुड़न आने से ब्लड प्रेशर उछाल मार रहा है। नसों में खून का थक्का जमने से हार्ट और ब्रेन अटैक पड़ रहा है। कानपुर में सोमवार को हार्ट अटैक से 11 रोगियों की मौत हो गई। वहीं, ब्रेन अटैक से बर्रा के निरंजन (62) और गोविंदनगर के कमलेश्वर वर्मा (51) की मौत हो गई।
उन्हें एंबुलेंस से हैलट लाया गया था। डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। ये मौतें सिर्फ एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में रिकॉर्ड की गई हैं। इनमें कार्डियोलॉजी में भर्ती छह हृदय रोगियों की मौत हो गई। इसके अलावा सात रोगी ऐसे थे जिन्हें भर्ती करने की नौबत ही नहीं आई। परिजन जब तक उन्हें इंस्टीट्यूट लेकर पहुंचे मौत हो गई थी। वहीं, निजी अस्पतालों और घरों में भी लोगों की मौतें हुई हैं। इसके अलावा ब्रेन अटैक से दो की मौत हुई है। इन रोगियों को हैलट तक एंबुलेंस ने पहुंचा दिया।
वहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। ब्रॉट डेड आने वाले रोगियों का कंट्रोल रूम में नाम-पता दर्ज नहीं किया जाता है। कार्डियोलॉजी की इमरजेंसी में 785 रोगियों का उपचार किया गया। इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर विनय कृष्णा का कहना है कि जाड़े में हार्ट अटैक के रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। रोगी लापरवाही कतई न करें। तबीयत अगर बिगड़े तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। मेडिकल कॉलेज के न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक वर्मा ने बताया कि ठंड के साथ ब्रेन अटैक के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के न्यूरो विभाग का वार्ड फुल हो गया है। रोगियों के लिए मेडिसिन का वार्ड न्यूरो ने लिया है। इसमें रोगियों का इलाज किया जा रहा है।
ज्यादातर रोगियों को ब्लड प्रेशर अनियंत्रित होने के बाद ब्रेन अटैक पड़ा है। 12 रोगी ऐसे हैं जिन्हें पहले एक बार अटैक पड़ चुका था और वे दवा से ठीक हो गए लेकिन लापरवाही बरतने के कारण दोबारा अटैक पड़ गया। इससे उनके मस्तिष्क की नस में खून का रिसाव हो गया। न्यूरो साइंसेज विभाग के प्रमुख डॉ. मनीष सिंह का कहना है कि कोरोना के असर से हार्ट और ब्रेन अटैक के मामले बढ़ गए हैं। ब्रेन अटैक के 40 फीसदी रोगियों की घर में या अस्पताल लाते वक्त मौत हो जाती है। 60 फीसदी ही अस्पताल तक पहुंच पाते हैं। न्यूरो साइंसेज में इस वक्त ब्रेन अटैक के 45 रोगी इलाज करा रहे हैं। 35 बेड का न्यूरो वार्ड फुल हो गया है।
डॉ. आलोक वर्मा ने दी ब्रेन अटैक से बचने की सलाह
- ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें।
- अपने डॉक्टर से दवा की डोज दुरुस्त करा लें।
- जिन्हें पहले ब्रेन अटैक हो चुका है, वे लापरवाही न बरतें।
- डायबिटीज के रोगी ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखें।
- कोमॉर्बिड रोगी ठंड से बचाव करें।