भूख-प्यास से मर गए 11 गोवंश, दो सचिव निलंबित, सपा नेता ने मुख्यमंत्री पर लगाया ये आरोप
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जेवां ग्राम पंचायत के मजरा भूलभुलैयापुर में जेवां और बसीरापुर भाट ग्राम पंचायतों की संयुक्त गोशाला संचालित हो रही है। यहां जेवां के प्रधान जितेंद्र सिंह गर्रा ने 26 और बसीरापुर भाट ग्राम पंचायत के प्रधान पुत्र अखिलेश ने 21 गोवंशों को रखा था। गोशाला में कुल 47 गोवंश रखे गए थे।
शुक्रवार को मामले ने तब तूल पकड़ा जब गांव के ही एक व्यक्ति ने पूर्व ब्लॉक प्रमुख और सपा नेता नवाब सिंह यादव को गोशाला में मवेशियों की मौत होने की जानकारी दी। कुछ ही देर में सपाई गोशाला पहुंच गए। गोशाला के पीछे छह मवेशियों के शव झाड़ियों में पड़े मिले। दो मवेशियों के अवशेष इधर-उधर बिखरे थे। दुर्गंध से सांस लेना दूभर था। गोशाला में सिर्फ छह मवेशी मिले। इनमें से एक मरणासन्न स्थिति में था। दो उठने की हालत में नहीं थे। चरही में सूखा भूसा पड़ा था। पानी के इंतजाम भी नहीं थे।
सपा नेता प्रदेश सरकार की इस पूरी कवायद पर सवाल खड़े करने लगे
यह देख सपाई भड़क गए। वह प्रदेश सरकार की इस पूरी कवायद पर सवाल खड़े करने लगे। सूचना पर सदर कोतवाल विनोद मिश्रा फोर्स के साथ पहुंच गए। उन्होंने इन्हें शांत किया। मामले की जानकारी कानपुर मीटिंग में गए जिलाधिकारी रवींद्र कुमार को हुई तो उन्होंने तुरंत बीडीओ जलालाबाद जेएन राव को जांच के निर्देश दिए।
शाम करीब चार बजे बीडीओ ने जांच की तो मामला सही पाया। बीडीओ ने स्वीकार किया कि गोशाला के संचालन में लापरवाही बरती जा रही थी। तीन मवेशियों की मौत शुक्रवार को और आठ मवेशियों की मौत आठ से दस दिनों के बीच होने की बात कही। उन्होंने बताया कि गोशाला में सिर्फ भूसा मवेशियों को दिया जा रहा था। चोकर और पानी कहीं भी नहीं मिला। रिपोर्ट जिलाधिकारी रवींद्र कुमार को भेजी गई है।
जिलाधिकारी रवींद्र कुमार ने शुक्रवार शाम को जेवां ग्राम पंचायत के सचिव दिनेश चंद्र गिहार और बसीरापुर भाट के सचिव अमर सिंह को सस्पेंड कर दिया। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी वीके त्रिवेदी और जलालाबाद ब्लॉक के पशु चिकित्साधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा है। दोनों ग्राम पंचायतों के प्रधानों को नोटिस जारी किया गया है।
बीमार मवेशियों को लोडर में लाद ले गए
गोशाला में मवेशियों की मौत का मामला गरमाता देख दोनों ग्राम पंचायतों के प्रधानों ने मवेशियों को गोशाला से हटवाना शुरू कर दिया। बीमार मवेशियों को लोडर में लादकर दूसरे स्थान पर ले जाया गया। उधर, जो मवेशी गोशाला के पीछे मृत पड़े थे, उन्हें भी पुलिस और ब्लाक अधिकारियों ने आनन फानन में उठवाकर दूसरी जगह दफन करा दिया।
पूर्व ब्लॉक प्रमुख और सपा नेता नवाब सिंह यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सिर्फ चुनाव के समय ही गाय और गंगा की याद आती है। चुनाव खत्म होने के बाद गाय आवारा जानवर हो गई है। गोशाला में गोवंशों की देखभाल के नाम पर उनकी हत्या की जा रही है। भूख और प्यास से तड़पा तड़पा कर उन्हें मारा जा रहा है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की जिलाधिकारी से मांग की। कहा कि गोवंशों के मरने के पीछे जो भी जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ गोहत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया जाए।