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Kanpur News: उत्कृष्ट कार्य करने वाले 101 शिक्षक सम्मानित
Sun, 06 Sep 2026 01:22 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sun, 06 Sep 2026 01:22 AM IST
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कानपुर देहात। माती स्थित ईको पार्क के सामुदायिक भवन में शनिवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 101 शिक्षकों, शिक्षामित्रों व एसआरजी को सम्मानित किया गया। साथ ही गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के संबोधन का सजीव प्रसारण देखा गया।
कैबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री व विधान परिषद सदस्य ने जिलाधिकारी व एसपी के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार अपनाने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में विशेष योगदान देने वाले जनपद के 101 शिक्षक-शिक्षकाओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने कहा कि शिक्षक बच्चों को शिक्षित बनाकर देश के बेहतर भविष्य का निर्माण करते हैं।
माता-पिता के बाद गुरु का ही स्थान होता है। उन्होंने सम्मानित शिक्षकों के सराहनीय प्रयासों की प्रशंसा करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला ने शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए कर्तव्यनिष्ठा से कार्य करने को कहा। एमएलसी डॉ. अरुण पाठक व अविनाश सिंह चौहान ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम का ज्ञान नहीं देते, बल्कि वे राष्ट्र निर्माता हैं। शिक्षकों के सकारात्मक मार्गदर्शन का प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है।
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जिलाधिकारी कपिल सिंह ने शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ-साथ उनके चरित्र और संस्कारों का निर्माण करना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेंद्र पांडेय ने कहा कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और शिक्षकों को बेहतर माहौल देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
ऐसे आयोजनों से शिक्षकों का मनोबल बढ़ता है और अन्य अध्यापकों को भी बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। इस दौरान बेसिक शिक्षा विभाग के छात्रों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी, जिसकी सभी ने सराहना की। सीडीओ विधान जायसवाल, एडीएम प्रशासन अमित कुमार, डीआईओएस बृजभूषण चौधरी, बीएसए आशीष कुमार पांडेय, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, एसडीएम अकबरपुर, बीईओ व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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शिक्षकों को मिला सम्मान, बोली मन की बात
शिक्षा में तकनीक का समावेश है जरूरी
शिक्षा में नवाचार और तकनीक का समावेश आज के समय की मुख्य आवश्यकता है। शिक्षा उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों में विश्लेषणात्मक सोच विकसित करना है। जब ग्रामीण अंचल के बच्चे नए तरीकों से सीखते हैं, तो उनका आत्मविश्वास देखते ही बनता है। - संत कुमार दीक्षित, एसआरजी
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सम्मान मिलने से बढ़ जाती है जिम्मेदारी
सम्मान मिलने से जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। विद्यालयों में ऐसा वातावरण तैयार करना जरूरी है जहां बच्चा बिना किसी डर के प्रश्न पूछ सके। प्राथमिक स्तर पर मजबूत नींव ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बनती है। - अवशेष कुमार, सहायक अध्यापक
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डिजिटल युग में शिक्षण विधियों का बदलाव स्वाभाविक
आज के डिजिटल युग में शिक्षण विधियों में बदलाव आना स्वाभाविक है। टीएलएम (शिक्षण-अधिगम सामग्री) और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से कठिन से कठिन विषयों को भी रोचक बनाया जा सकता है। बच्चों की जिज्ञासा को सही दिशा देना ही शिक्षक का मुख्य धर्म है। - अनुपम चक्रवर्ती, सहायक अध्यापक
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शिक्षा केवल अक्षर ज्ञान तक नहीं सीमित
शिक्षा केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं है बल्कि यह चरित्र निर्माण और नैतिक मूल्यों को गढ़ने का माध्यम है। जब हमारे पढ़ाए बच्चे समाज में बेहतर नागरिक बनकर योगदान देते हैं, वही एक शिक्षक के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार होता है। - शिवकुमार साहू, सहायक अध्यापक
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कैबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री व विधान परिषद सदस्य ने जिलाधिकारी व एसपी के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार अपनाने और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में विशेष योगदान देने वाले जनपद के 101 शिक्षक-शिक्षकाओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने कहा कि शिक्षक बच्चों को शिक्षित बनाकर देश के बेहतर भविष्य का निर्माण करते हैं।
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माता-पिता के बाद गुरु का ही स्थान होता है। उन्होंने सम्मानित शिक्षकों के सराहनीय प्रयासों की प्रशंसा करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला ने शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए कर्तव्यनिष्ठा से कार्य करने को कहा। एमएलसी डॉ. अरुण पाठक व अविनाश सिंह चौहान ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम का ज्ञान नहीं देते, बल्कि वे राष्ट्र निर्माता हैं। शिक्षकों के सकारात्मक मार्गदर्शन का प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है।
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जिलाधिकारी कपिल सिंह ने शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ-साथ उनके चरित्र और संस्कारों का निर्माण करना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेंद्र पांडेय ने कहा कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और शिक्षकों को बेहतर माहौल देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
ऐसे आयोजनों से शिक्षकों का मनोबल बढ़ता है और अन्य अध्यापकों को भी बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। इस दौरान बेसिक शिक्षा विभाग के छात्रों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी, जिसकी सभी ने सराहना की। सीडीओ विधान जायसवाल, एडीएम प्रशासन अमित कुमार, डीआईओएस बृजभूषण चौधरी, बीएसए आशीष कुमार पांडेय, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, एसडीएम अकबरपुर, बीईओ व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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शिक्षकों को मिला सम्मान, बोली मन की बात
शिक्षा में तकनीक का समावेश है जरूरी
शिक्षा में नवाचार और तकनीक का समावेश आज के समय की मुख्य आवश्यकता है। शिक्षा उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों में विश्लेषणात्मक सोच विकसित करना है। जब ग्रामीण अंचल के बच्चे नए तरीकों से सीखते हैं, तो उनका आत्मविश्वास देखते ही बनता है। - संत कुमार दीक्षित, एसआरजी
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सम्मान मिलने से बढ़ जाती है जिम्मेदारी
सम्मान मिलने से जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। विद्यालयों में ऐसा वातावरण तैयार करना जरूरी है जहां बच्चा बिना किसी डर के प्रश्न पूछ सके। प्राथमिक स्तर पर मजबूत नींव ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बनती है। - अवशेष कुमार, सहायक अध्यापक
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डिजिटल युग में शिक्षण विधियों का बदलाव स्वाभाविक
आज के डिजिटल युग में शिक्षण विधियों में बदलाव आना स्वाभाविक है। टीएलएम (शिक्षण-अधिगम सामग्री) और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से कठिन से कठिन विषयों को भी रोचक बनाया जा सकता है। बच्चों की जिज्ञासा को सही दिशा देना ही शिक्षक का मुख्य धर्म है। - अनुपम चक्रवर्ती, सहायक अध्यापक
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शिक्षा केवल अक्षर ज्ञान तक नहीं सीमित
शिक्षा केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं है बल्कि यह चरित्र निर्माण और नैतिक मूल्यों को गढ़ने का माध्यम है। जब हमारे पढ़ाए बच्चे समाज में बेहतर नागरिक बनकर योगदान देते हैं, वही एक शिक्षक के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार होता है। - शिवकुमार साहू, सहायक अध्यापक