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इस तरह जीने का सामान जुटाता क्यों है, खर्च करना ही नहीं है तो कमाता क्यों है...
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फोटो 16सीएचबीपी57: मंचासीन युवा कवि। संवाद
- फोटो : CHIBRAMAU
छिबरामऊ। हीरालाल कॉलेज के खेल मैदान में 17 अप्रैल तक चलने वाली प्रदर्शनी के 35वें दिन सांस्कृतिक मंच पर युवा साहित्यकारों का समागम हुआ।
उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की ओर से युवा राज्य कवि से सम्मानित फर्रुखाबाद निवासी उत्कर्ष अग्निहोत्री के संचालन में हुए कार्यक्रम में युवा हस्ताक्षरों ने गीत, गजल, दोहा और भजन की पंक्तियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
जब से हृदय मे बसे, नंद यशोदा लाल, तब से अपना हो गया बैरागी सा हाल... वियोग रस से शिवम शुक्ला ने कार्यक्रम की शुरुआत की। समाज पर तंज कसते हुए उत्कर्ष अग्निहोत्री ने इस तरह जीने का सामान जुटाता क्यों है, खर्च करना ही नहीं है तो कमाता क्यों है। देवेश दीक्षित ने शृंगार विधा में सुधियों की वो दे गया ऐसी एक किताब, जब खोलूूं तो महकते, सूखे हुए गुलाब। ज्ञानेंद्र यादव ने नगर पर लिखी कविता ‘छिबरामऊ नगर है, अपना इसको सुरम्य बनाना है।
नील सात्विक ने मोहब्बत का पियाला चाहते हैं, भूखे सो निवाला चाहते हैं, ये तीनों लोक ले जाओ सुदामा, ये मेरे नंद लाला चाहते हैं। गजलकार विशाल समर्पित ने पांव के संग धूल भी अंदर गई, द्वार पर हम पादुका से रह गए। कार्यक्रम में नवोदित कवयित्री सोनम सत्या ने मेरी मां कविता से समा बांध दिया।
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संस्थापक गौरव त्रिपाठी अमर ने बताया कि काव्य प्रतिभाओं के लिए महोत्सव समिति की ओर से साहित्यिक संस्था का गठन किया जाएगा। महोत्सव समिति की अध्यक्ष इंद्रा दुबे, रमा मिश्रा, शर्मा, धर्मेंद्र शर्मा, अरुणेश चतुर्वेदी, अक्षय त्रिपाठी, रामलीला कमेटी के अध्यक्ष विजय चौहान, बार एसोसिएशन महासचिव सुशील पांडेय, विशाल श्रीवास्तव, भूरे, गुड्डू, विपिन वर्मा, अमन यादव, आयुष पाल सहित कई लोग मौजूद रहे।
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उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की ओर से युवा राज्य कवि से सम्मानित फर्रुखाबाद निवासी उत्कर्ष अग्निहोत्री के संचालन में हुए कार्यक्रम में युवा हस्ताक्षरों ने गीत, गजल, दोहा और भजन की पंक्तियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
जब से हृदय मे बसे, नंद यशोदा लाल, तब से अपना हो गया बैरागी सा हाल... वियोग रस से शिवम शुक्ला ने कार्यक्रम की शुरुआत की। समाज पर तंज कसते हुए उत्कर्ष अग्निहोत्री ने इस तरह जीने का सामान जुटाता क्यों है, खर्च करना ही नहीं है तो कमाता क्यों है। देवेश दीक्षित ने शृंगार विधा में सुधियों की वो दे गया ऐसी एक किताब, जब खोलूूं तो महकते, सूखे हुए गुलाब। ज्ञानेंद्र यादव ने नगर पर लिखी कविता ‘छिबरामऊ नगर है, अपना इसको सुरम्य बनाना है।
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नील सात्विक ने मोहब्बत का पियाला चाहते हैं, भूखे सो निवाला चाहते हैं, ये तीनों लोक ले जाओ सुदामा, ये मेरे नंद लाला चाहते हैं। गजलकार विशाल समर्पित ने पांव के संग धूल भी अंदर गई, द्वार पर हम पादुका से रह गए। कार्यक्रम में नवोदित कवयित्री सोनम सत्या ने मेरी मां कविता से समा बांध दिया।
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संस्थापक गौरव त्रिपाठी अमर ने बताया कि काव्य प्रतिभाओं के लिए महोत्सव समिति की ओर से साहित्यिक संस्था का गठन किया जाएगा। महोत्सव समिति की अध्यक्ष इंद्रा दुबे, रमा मिश्रा, शर्मा, धर्मेंद्र शर्मा, अरुणेश चतुर्वेदी, अक्षय त्रिपाठी, रामलीला कमेटी के अध्यक्ष विजय चौहान, बार एसोसिएशन महासचिव सुशील पांडेय, विशाल श्रीवास्तव, भूरे, गुड्डू, विपिन वर्मा, अमन यादव, आयुष पाल सहित कई लोग मौजूद रहे।