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वाटर कूलर और आरओ सिस्टम हुए कबाड़, मरीज बोतल का पानी पी रहे
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फोटो 18:-जनरल वार्ड में खराब वाटर कूलर।संवाद
- फोटो : KANNAUJ
तिर्वा (कन्नौज)। मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने आने वाले सैकड़ों मरीजों को प्यास बुझाने के लिए हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। यहां लगे वाटर कूलर और आरओ सिस्टम खराब हो गए हैं। ये मरीज को ठंडा पानी तो दूर सादा पानी भी नहीं दे रहे हैं। इस वजह से मेडिकल कॉलेज आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को प्यास बुझाने के लिए पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना 800 से 900 मरीजों का आना-जाना होता है। मरीज और यहां आने वाले उनके तीमारदारों को प्यास बुझाने के लिए कॉलेज परिसर में 25 से ज्यादा वाटर कूलर और आरओ सिस्टम लगे हैं। इसके अलावा यहां दो हैंडपंप भी लगे हैं, मगर कॉलेज प्रशासन की अनदेखी के चलते वाटर कूलर और आरओ सिस्टम कई महीनों से बंद पड़े हैं।
ऐसे में मरीज और उनके तीमारदारों को प्यास बुझाने के लिए मेडिकल कॉलेज के बाहर बनीं दुकानों से खरीदकर बोतल का पानी पीना पड़ रहा है। हालात यह है कि कॉलेज प्रशासन को महीनों से खराब पड़े वाटर कूलर दिखाई नहीं देते हैं। वहीं कॉलेज परिसर में लगे दो हैंडपंपों में सिर्फ एक ही सही है। दूसरा कई महीनों से पानी नहीं दे रहा है।
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इस संबंध में मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. डीएस मार्तोलिया ने बताया कि यहां लगे वाटर कूलर काफी पुराने हो चुके हैं। जो वाटर कूलर खराब हैं उस सभी को बदला जाएगा।
हरदोई निवासी इंद्रेश कुमार ने बताया कि उन्होंने अपनी मां शारदा देवी को मेडिकल कॉलेज के जनरल वार्ड में भर्ती कराया है। जनरल वार्ड में लगा वाटर कूलर खराब है। इस कारण मेडिकल कॉलेज के बाहर पानी लेने के लिए जाना पड़ता है।
मलिहापुर गांव निवासी रधुनंदन दोहरे ने बताया कि वह अपने पुत्र की दवा लेने के लिए मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में आए हैं। ओपीडी में सिर्फ एक ही वाटर कूलर लगा हुआ है, वह भी खराब है। प्यास से मजबूर होकर वह बाहर से पानी की बोतल खरीद कर लाए हैं।
जलालाबाद निवासी इरशाद ने बताया कि वह सुबह दवा लेने के लिए मेडिकल कॉलेज में आए हैं, लेकिन यहां पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। पानी के लिए बाहर से बोतल खरीदकर ला रहे हैं।
मतौली गांव की सुनीता ने बताया कि दो दिन से बीमार हैं। सुबह मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने आई थीं। प्यास लगने पर वाटर कूलर के पास पहुंची तो वह खराब मिला। इससे निराश हो गई।
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मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना 800 से 900 मरीजों का आना-जाना होता है। मरीज और यहां आने वाले उनके तीमारदारों को प्यास बुझाने के लिए कॉलेज परिसर में 25 से ज्यादा वाटर कूलर और आरओ सिस्टम लगे हैं। इसके अलावा यहां दो हैंडपंप भी लगे हैं, मगर कॉलेज प्रशासन की अनदेखी के चलते वाटर कूलर और आरओ सिस्टम कई महीनों से बंद पड़े हैं।
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ऐसे में मरीज और उनके तीमारदारों को प्यास बुझाने के लिए मेडिकल कॉलेज के बाहर बनीं दुकानों से खरीदकर बोतल का पानी पीना पड़ रहा है। हालात यह है कि कॉलेज प्रशासन को महीनों से खराब पड़े वाटर कूलर दिखाई नहीं देते हैं। वहीं कॉलेज परिसर में लगे दो हैंडपंपों में सिर्फ एक ही सही है। दूसरा कई महीनों से पानी नहीं दे रहा है।
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इस संबंध में मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. डीएस मार्तोलिया ने बताया कि यहां लगे वाटर कूलर काफी पुराने हो चुके हैं। जो वाटर कूलर खराब हैं उस सभी को बदला जाएगा।
हरदोई निवासी इंद्रेश कुमार ने बताया कि उन्होंने अपनी मां शारदा देवी को मेडिकल कॉलेज के जनरल वार्ड में भर्ती कराया है। जनरल वार्ड में लगा वाटर कूलर खराब है। इस कारण मेडिकल कॉलेज के बाहर पानी लेने के लिए जाना पड़ता है।
मलिहापुर गांव निवासी रधुनंदन दोहरे ने बताया कि वह अपने पुत्र की दवा लेने के लिए मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में आए हैं। ओपीडी में सिर्फ एक ही वाटर कूलर लगा हुआ है, वह भी खराब है। प्यास से मजबूर होकर वह बाहर से पानी की बोतल खरीद कर लाए हैं।
जलालाबाद निवासी इरशाद ने बताया कि वह सुबह दवा लेने के लिए मेडिकल कॉलेज में आए हैं, लेकिन यहां पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। पानी के लिए बाहर से बोतल खरीदकर ला रहे हैं।
मतौली गांव की सुनीता ने बताया कि दो दिन से बीमार हैं। सुबह मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने आई थीं। प्यास लगने पर वाटर कूलर के पास पहुंची तो वह खराब मिला। इससे निराश हो गई।

फोटो 19 आर्थो वार्ड के बाहर लगा खराब वाटर कूलर।संवाद- फोटो : KANNAUJ