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Kannauj News: अखिलेश व सुब्रत में छिड़ी जुबानी जंग, इत्रनगरी का सियासी पारा गर्म

Fri, 05 Apr 2024 12:00 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 05 Apr 2024 12:00 AM IST
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War of words broke out between Akhilesh and Subrata, political temperature heated up in Itrangari
कन्नौज। अप्रैल के पहले सप्ताह में ही तापमान के बढ़ते ग्राफ के साथ इत्रनगरी का सियासी पारा चढ़ गया है। यह हाल तब है, जब अभी सभी प्रमुख दलों की ओर से उम्मीदवार तय नहीं हुए हैं। खासकर समाजवादी पार्टी ने अपने पत्ते अभी तक नहीं खोले हैं।
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नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने में भी अभी दो हफ्ते का समय है। उसके पहले ही यहां आरोप-प्रत्यारोप के चलते सियासी घमासान तेज हो गया है। इसका दायरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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सपा और भाजपा के बीच बयानों के तीर चलाने से यह तय हो गया है कि इस बार यहां का चुनाव काफी दिलचस्प और आक्रामक होने वाला है। दोनों ही खेमे एक-दूसरे पर बढ़त बनाने के लिए हर छोटे-बड़े मामले को मुद्दा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसकी शुरुआत सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद मैनपुरी में हुए उपचुनाव के दौरान ही हो गई थी।
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चुनाव और नतीजों के बीच इटावा में एक टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू के दौरान अखिलेश यादव ने सुब्रत पाठक पर टिप्पणी की थी। बदले में सुब्रत पाठक ने उन पर हमला बोलते हुए किसी भी सीट से लड़ने की चुनौती दे डाली थी। उसके कुछ ही दिन बाद अखिलेश यादव ने यहां भ्रमण किया था।

वह शहर के मां फूलमती देवी मंदिर में आयोजित भंडारे में शामिल हुए थे। शहर के कई संभ्रांत परिवारों से मिलकर यह संदेश दिया था कि वह यहीं से चुनाव लड़ेंगे।

अब दो अप्रैल को हुए कार्यकर्ता सम्मेलन में अखिलेश यादव ने सांसद का नाम लिए बिना ही उन पर कई कटाक्ष किए थे। उन्होंने कन्नौज का विकास रोकने का आरोप भी लगाया था।

साथ ही पिछली कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए भी सुब्रत पाठक को घेरा था। अगले दिन सुब्रत पाठक ने उनकी ओर से उम्मीदवारी का एलान न करने पर हैरानी जताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए।
दो अप्रैल को सपा कार्यालय में हुए कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान दिए गए जिस बयान को लेकर सुब्रत पाठक ने अखिलेश यादव पर हमला बोला है, उसके पीछे जनवरी में छापा और फरवरी में वायरल हुई एक ऑडियो क्लिप है। सपा नेता मनोज दीक्षित सांसद सुब्रत पाठक से इसलिए खफा हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि अखिलेश यादव का करीबी होने की वजह से उनके इत्र कारखाने पर जीएसटी का छापा डलवाया गया। इसके अलावा डेढ़ माह पहले 15 फरवरी की रात शहर के तिर्वा रोड पर दो गाड़ियों में टक्कर के बाद हुए विवाद के दौरान सांसद की ओर से एक कार्यकर्ता को फोन करने और उसी बातचीत में भगवान का नाम लेकर आपत्तिजनक शब्दों के प्रयोग ने भी माहौल गर्मा दिया।

उनका मानना है कि सांसद ने उनके परिवार को नीचा दिखाने के लिए उनके बाबा के नाम को तोड़-मरोड़ कर गाली दी। इसका ऑडियो भी वायरल हुआ था। सपा के मंच से मनोज दीक्षित ने सपा मुखिया अखिलेश यादव के सामने अपना जनेऊ निकालकर सौगंध खाई कि वह उनका साथ नहीं छोड़ेंगे।


उन्होंने कहा कि जिसने उनके बाबा को गाली दी हो, उसे माफ नहीं करेंगे। इसी जोश में उन्होंने एक जातिसूचक टिप्पणी भी कर दी। इस पर सपा नेताओं ने इशारा किया तो उन्होंने इसे सुधारने की कोशिश की।
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