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कन्नौजः न काम, न रुपये, बड़ोदरा से लौटे मजदूरों के हाल हैं बेहाल
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vadodara people dont have money and food in kannauj
- फोटो : KANNAUJ
सरकारें बड़े-बड़े दावे कर रही हैं, श्रमिक स्पेशल ट्रेन से सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर लौटने वालों का दर्द इन्हें झुठला रहा है। रोजी रोटी के लिए बड़े शहरों का रुख करने वाले लॉकडाउन में कर्जदार हो गए। एक-एक रुपये के लिए लोगों से मिन्नतें करनी पड़ीं। यह कर्ज लेकर घर लौटे हैं।
रायबरेली के रामरहीश पत्नी किरन व चार बच्चों के साथ बड़ोदरा में फैक्टरी में काम करते थे। यह होली पर परिवार समेत घर आए थे। 18 मार्च को बड़ोदरा वापस गए थे। 25 मार्च को लॉकडाउन हो गया। इन्होंने बताया कि पास के रुपये धीरे-धीरे खर्च हो गए। लॉकडाउन खुलने की आस में घर वालों से रुपये मंगवा लिए। वह भी खर्च हो गए।
बार-बार लॉकडाउन बढ़ने पर मकान मालिक किराये को लेकर दबाव बनाने लगे। रुपये न देने पर मकान छोड़ने की धमकी दी। बिना रोजगार के पांच लोगों का परिवार चलाना मुश्किल हो गया।
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तीसरा लॉकडाउन बढ़ने पर घर जाने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर दिया। घर आने के लिए रुपये नहीं थे। साथियों से कर्ज लेना पड़ा। बड़ोदरा से श्रमिक ट्रेन चली तो घर जाने की उम्मीद बढ़ गई। श्रमिक ट्रेन से अपने प्रदेश की धरती पर उतरे तो सुकून मिला। बताया कि गांव लौटकर खेती और मजदूरी करेंगे। अब दोबारा नहीं जाएंगे।
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रायबरेली के रामरहीश पत्नी किरन व चार बच्चों के साथ बड़ोदरा में फैक्टरी में काम करते थे। यह होली पर परिवार समेत घर आए थे। 18 मार्च को बड़ोदरा वापस गए थे। 25 मार्च को लॉकडाउन हो गया। इन्होंने बताया कि पास के रुपये धीरे-धीरे खर्च हो गए। लॉकडाउन खुलने की आस में घर वालों से रुपये मंगवा लिए। वह भी खर्च हो गए।
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बार-बार लॉकडाउन बढ़ने पर मकान मालिक किराये को लेकर दबाव बनाने लगे। रुपये न देने पर मकान छोड़ने की धमकी दी। बिना रोजगार के पांच लोगों का परिवार चलाना मुश्किल हो गया।
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तीसरा लॉकडाउन बढ़ने पर घर जाने के लिए ऑनलाइन आवेदन कर दिया। घर आने के लिए रुपये नहीं थे। साथियों से कर्ज लेना पड़ा। बड़ोदरा से श्रमिक ट्रेन चली तो घर जाने की उम्मीद बढ़ गई। श्रमिक ट्रेन से अपने प्रदेश की धरती पर उतरे तो सुकून मिला। बताया कि गांव लौटकर खेती और मजदूरी करेंगे। अब दोबारा नहीं जाएंगे।