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उपकरण आने के बाद भी चालू नहीं हो सका सोलर प्लांट
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तिर्वा(कन्नौज)। बिजली आपूर्ति के लिए लगा सोलर प्लांट 34 दिन बाद बंद हो गया। इसे चालू करने के लिए बंगलूरू से उपकरण मंगवाए गए हैं। इसके बाद भी शुरू नहीं हो सका। इसे करीब एक साल बंद रहने के बाद शुरू किया गया था। अब फिर समस्या है।
इंदरगढ़ थाना इलाके के गांव के लोगों को बिजली उपलब्ध कराने के लिए जुलाई 2015 में 615 लाख की लागत से 250 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट लगाया गया था। शिलान्यास पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने किया था। इसे नेडा से लगाया गया था। इस सोलर प्लांट की बिजली का उपयोग चंदुआहार व मन्सुखपुर्वा के लोग करते थे। यहां के लोगों को कनेक्शन दिए गए थे। 11 ट्यूबवेल भी इससे चलते थे। तीन चक्की के भी कनेक्शन हैं। इनमें से एक फरिकपुरा और दो चंदुआहार में लगी हैं।
देखरेख न होने से सोलर प्लांट में खामी आने लगी। इससे करीब एक साल पहले यह बंद हो गया। इलाकाई लोगों ने प्लांट शुरू करने के लिए जिले के अफसरों से शिकायत की। सुनवाई नहीं हुई। बाद में 14 फरवरी को प्लांट शुरू किया गया। 21 मार्च को उपकरण फुंकने से यह बंद हो गया। तब से ठप है। ग्रामीणों की कई बार की शिकायत के बाद अधिकारियों ने प्लांट का निरीक्षण किया। खराब उपकरणों को बंगलूरू से मंगवाया गया। तब भी प्लांट शुरू नहीं हो सका।
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नेडा के अधिकारी संजय वर्मा ने बताया कि उपकरणों को मंगवा लिया गया। कोविड संक्रमण के दौरान लॉकडाउन से बंगलूरू से इंजीनियर नहीं आ पाए। लॉकडाउन खत्म होने के बाद प्लांट चालू किया जाएगा। गांव के लोग कनेक्शन के बाद भी कटिया डालकर बिजली का दुरुपयोग कर रहे हैं। ओवरलोड होने से फाल्ट आ जाते हैं।
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इंदरगढ़ थाना इलाके के गांव के लोगों को बिजली उपलब्ध कराने के लिए जुलाई 2015 में 615 लाख की लागत से 250 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट लगाया गया था। शिलान्यास पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने किया था। इसे नेडा से लगाया गया था। इस सोलर प्लांट की बिजली का उपयोग चंदुआहार व मन्सुखपुर्वा के लोग करते थे। यहां के लोगों को कनेक्शन दिए गए थे। 11 ट्यूबवेल भी इससे चलते थे। तीन चक्की के भी कनेक्शन हैं। इनमें से एक फरिकपुरा और दो चंदुआहार में लगी हैं।
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देखरेख न होने से सोलर प्लांट में खामी आने लगी। इससे करीब एक साल पहले यह बंद हो गया। इलाकाई लोगों ने प्लांट शुरू करने के लिए जिले के अफसरों से शिकायत की। सुनवाई नहीं हुई। बाद में 14 फरवरी को प्लांट शुरू किया गया। 21 मार्च को उपकरण फुंकने से यह बंद हो गया। तब से ठप है। ग्रामीणों की कई बार की शिकायत के बाद अधिकारियों ने प्लांट का निरीक्षण किया। खराब उपकरणों को बंगलूरू से मंगवाया गया। तब भी प्लांट शुरू नहीं हो सका।
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नेडा के अधिकारी संजय वर्मा ने बताया कि उपकरणों को मंगवा लिया गया। कोविड संक्रमण के दौरान लॉकडाउन से बंगलूरू से इंजीनियर नहीं आ पाए। लॉकडाउन खत्म होने के बाद प्लांट चालू किया जाएगा। गांव के लोग कनेक्शन के बाद भी कटिया डालकर बिजली का दुरुपयोग कर रहे हैं। ओवरलोड होने से फाल्ट आ जाते हैं।