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ठठिया नरेश के पूर्वजों ने बनवाया था मंदिर
ब्यूरो/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Thu, 13 Aug 2015 11:48 PM IST
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कस्बा ठठिया स्थित श्री इंद्रेश्वरनाथ मंदिर करीब चार
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सौ साल से आस्था का केंद्र बना है। मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त मंदिर में
विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम कराते हैं। भक्तों को यहां आने पर मानसिक शांति
मिलती है।
सावन में तो पूरे महीने मंदिर परिसर में भक्तों का जमघट लगता है। परिसर में आरती और शिवपुराण, वेद मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय रहता है। संतों की टोली लोगों को परोपकार के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करती है।
जिला मुख्यालय से महज 15 किमी दूर ठठिया कस्बा प्राचीन काल में काफी समृद्धशाली नगर रहा है। बुजुर्गों की मानें तो पोहकर सिंह यहां के नरेश रहे हैं। उन्हीं के पूर्वजों ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। कस्बे में शिवमंदिरों की एक बड़ी श्रृंखला है। इनमें बावन मठ, पंचमुखी, बाबा जागेश्वर नाथ, गौरीशंकर आदि शिवमंदिर प्रमुख है।
मंदिर पहुंचने के लिए जीटी रोड मानीमऊ नेरा गांव होते हुए डामरीकृत मार्ग है। जब प्राचीन मंदिर पहुंचते हैं तो इसकी भव्यता देख भक्त भावविहोर हो जाते हैं। कस्बे के शोरगुल से दूर, मंदिर में खुले स्थान पर भक्त समय साधना करते हैं। मंदिर के गर्भगृह में पीतल के छत्र में भोलेशंकर विराजमान हैं।
मंदिर से सटे कई छोटे-छोटे मंदिर हैं। इनमें विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं। स्थानीय भक्त निरंकार अग्निहोत्री की मानें तो मंदिर की स्थापना करीब 1757 ई. में ठठिया नरेश पोहकर के पूर्वजों ने शिवमंदिर का निर्माण कराया। मुगलकाल व अंग्रेजों के समय भी मंदिर अपनी पौराणिक मान्यताओं के साथ प्रसिद्ध रहा है।
मंदिर की देखरेख के लिए वैसे तो कोई प्रबंध समिति नहीं है। हेमंत कुमार मिश्रा के नेतृत्व में स्थानीय भक्तों की एक कमेटी को मंदिर देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंदिर के पुजारी की जिम्मेदारी महंत लक्कड़ बाबा संभाले हुए हैं। चढ़ावे में जो पैसा आता है उसी से मंदिर परिसर की देखरेख व मरम्मत कराई जाती है।
भक्तों द्वारा सीधे तौर पर भी मंदिर व परिसर के जीर्णोद्धार का खर्च उठाया जाता है। महिला भक्तों की सुरक्षा के लिए प्रत्येक सोमवार को पुलिस बल तैनात नहीं किया जाता है।
सावन में तो पूरे महीने मंदिर परिसर में भक्तों का जमघट लगता है। परिसर में आरती और शिवपुराण, वेद मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय रहता है। संतों की टोली लोगों को परोपकार के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करती है।
जिला मुख्यालय से महज 15 किमी दूर ठठिया कस्बा प्राचीन काल में काफी समृद्धशाली नगर रहा है। बुजुर्गों की मानें तो पोहकर सिंह यहां के नरेश रहे हैं। उन्हीं के पूर्वजों ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। कस्बे में शिवमंदिरों की एक बड़ी श्रृंखला है। इनमें बावन मठ, पंचमुखी, बाबा जागेश्वर नाथ, गौरीशंकर आदि शिवमंदिर प्रमुख है।
मंदिर पहुंचने के लिए जीटी रोड मानीमऊ नेरा गांव होते हुए डामरीकृत मार्ग है। जब प्राचीन मंदिर पहुंचते हैं तो इसकी भव्यता देख भक्त भावविहोर हो जाते हैं। कस्बे के शोरगुल से दूर, मंदिर में खुले स्थान पर भक्त समय साधना करते हैं। मंदिर के गर्भगृह में पीतल के छत्र में भोलेशंकर विराजमान हैं।
मंदिर से सटे कई छोटे-छोटे मंदिर हैं। इनमें विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं। स्थानीय भक्त निरंकार अग्निहोत्री की मानें तो मंदिर की स्थापना करीब 1757 ई. में ठठिया नरेश पोहकर के पूर्वजों ने शिवमंदिर का निर्माण कराया। मुगलकाल व अंग्रेजों के समय भी मंदिर अपनी पौराणिक मान्यताओं के साथ प्रसिद्ध रहा है।
मंदिर की देखरेख के लिए वैसे तो कोई प्रबंध समिति नहीं है। हेमंत कुमार मिश्रा के नेतृत्व में स्थानीय भक्तों की एक कमेटी को मंदिर देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंदिर के पुजारी की जिम्मेदारी महंत लक्कड़ बाबा संभाले हुए हैं। चढ़ावे में जो पैसा आता है उसी से मंदिर परिसर की देखरेख व मरम्मत कराई जाती है।
भक्तों द्वारा सीधे तौर पर भी मंदिर व परिसर के जीर्णोद्धार का खर्च उठाया जाता है। महिला भक्तों की सुरक्षा के लिए प्रत्येक सोमवार को पुलिस बल तैनात नहीं किया जाता है।