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Kannauj News: जेल अधीक्षक का ड्राइवर सेकेंड जेलर, उड़ीं जेल मैनुअल की धज्जियां
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जलालाबाद (कन्नौज)। जिला कारागार में जेल अधीक्षक के ड्राइवर को सेकेंड जेलर माना जाता है। वैसे तो वह बंदी रक्षक है, लेकिन अधीक्षक का चहेता होने के कारण उसे विशेष तवज्जो दी जाती है। बताया जाता है कि कई बंदी रक्षक अवैध कमाई का जरिया बने हैं। वहीं अधीक्षक का कहना है कि षडयंत्र के तहत उनके ऊपर बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं। जांच में सब स्पष्ट हो जाएगा।
जिला कारागार में जेल मैनुअल की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जेल अधीक्षक अपनी सुविधानुसार जेल के अंदर आते हैं और उनके लिए मेन गेट पर रखी इंट्री बुक में एक लाइन खाली छोड़ दी जाती है। जब वह आते हैं, तो अपनी ड्यूटी के अनुसार समय डालकर हस्ताक्षर कर देते हैं। अधीक्षक द्वारा छोड़ी गई लाइन के बाद ही अन्य सभी कर्मचारी गेटबुक पर अपनी इंट्री करते हैं। सूत्रों का कहना है कि अधीक्षक शनिवार और रविवार को अपने घर आगरा चले जाते हैं और सोमवार को दो दिनों की खाली गेटबुक में खाली लाइन भरते हैं। जेल सूत्रों के अनुसार, जेल कैंटीन से लेकर बंदी रक्षकों की ड्यूटी तक, हर जगह अवैध कमाई का खेल चल रहा है। इसमें एक बंदी रक्षक, राहुल चौधरी, का नाम प्रमुखता से उभर रहा है। कहने को तो वह जेल अधीक्षक का ड्राइवर है, लेकिन उसका रौब इतना है कि बंदी उसे ''''सेकेंड जेलर'''' के नाम से जानते हैं। अधीक्षक का विश्वासपात्र होने के कारण, वह बंदी रक्षकों की ड्यूटी में भी हस्तक्षेप करता है। जिस सिपाही की ड्यूटी वह चाहता है, उसी की ड्यूटी लगाई जाती है। कैंटीन से होने वाली हजारों रुपयों की आमदनी की वसूली भी वही करता है। जेल में आने वाले नए बंदियों से भी भारी भरकम वसूली की जाती है। सूत्रों का यहां तक कहना है कि जेल अधीक्षक के बाद, यह बंदी रक्षक जेल के अंदर खुलेआम मोबाइल लेकर चलता है। यह सब कुछ सीसीटीवी कैमरों में कैद है।
इनसेट-- बंदी भागने पर सिपाही पर प्राथमिकी तो जेल कर्मियों पर क्यों नहीं
पांच दिन पूर्व जिला कारागार की दीवार फांदकर बंदी अंकित और डिंपी उर्फ शिवा फरार हो गए थे। जेलर विनय प्रताप सिंह ने इन बंदियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बाद, दो सिपाही नवीन कुमार, अतुल मिश्रा, शिवेंद्र यादव, डिप्टी जेलर बद्री प्रसाद और जेलर विनय प्रताप सिंह को निलंबित कर दिया गया है। फिलहाल इन निलंबित कर्मियों के खिलाफ जांच चल रही है। हालांकि, जेल प्रशासन निलंबित कर्मियों को दोषी मान रहा है, लेकिन मुख्य दोषियों, यानी फरार बंदियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यह सवाल उठता है कि जब निलंबित जेलर विनय प्रताप सिंह ने बंदियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। नियमानुसार तो जेल अधीक्षक को भी बंदियों के साथ-साथ जेलर के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज हाेनी चाहिए थी। एसपी विनोद कुमार ने बताया कि जेल प्रशासन ने जो तहरीर दी, उसी आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। अब मामले की विवेचना की जा रही है।
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इन मामलों में दर्ज हुई थी पुलिस के खिलाफ प्राथमिकी
29 अक्टूबर 2025: आरोपी अवनीश उर्फ लालू कोर्ट परिसर से भागा था, जिसके मामले में सिपाही विवेक कुमार और होमगार्ड सतीश चंद्र के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
17 नवंबर 2025: बंदी मोहित कुमार ने जेल गेट के पास बंदी रक्षकों को धक्का देकर फरार हो गया था, जिसमें एक सिपाही धीरू और होमगार्ड के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
वर्जन जिला कारागार में व्याप्त अनियमितताओं ने मैंने दूर किया है। फिर भी षड़यंत्र के तहत उनके ऊपर अनर्गल आरोप लगाए जा रहे हैं। घटना की उच्च स्तरीय जांच चल रही है, जिसमें सब स्पष्ट हो जाएगा।
-भीमसेन मुकुंद, जेल अधीक्षक
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जिला कारागार में जेल मैनुअल की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जेल अधीक्षक अपनी सुविधानुसार जेल के अंदर आते हैं और उनके लिए मेन गेट पर रखी इंट्री बुक में एक लाइन खाली छोड़ दी जाती है। जब वह आते हैं, तो अपनी ड्यूटी के अनुसार समय डालकर हस्ताक्षर कर देते हैं। अधीक्षक द्वारा छोड़ी गई लाइन के बाद ही अन्य सभी कर्मचारी गेटबुक पर अपनी इंट्री करते हैं। सूत्रों का कहना है कि अधीक्षक शनिवार और रविवार को अपने घर आगरा चले जाते हैं और सोमवार को दो दिनों की खाली गेटबुक में खाली लाइन भरते हैं। जेल सूत्रों के अनुसार, जेल कैंटीन से लेकर बंदी रक्षकों की ड्यूटी तक, हर जगह अवैध कमाई का खेल चल रहा है। इसमें एक बंदी रक्षक, राहुल चौधरी, का नाम प्रमुखता से उभर रहा है। कहने को तो वह जेल अधीक्षक का ड्राइवर है, लेकिन उसका रौब इतना है कि बंदी उसे ''''सेकेंड जेलर'''' के नाम से जानते हैं। अधीक्षक का विश्वासपात्र होने के कारण, वह बंदी रक्षकों की ड्यूटी में भी हस्तक्षेप करता है। जिस सिपाही की ड्यूटी वह चाहता है, उसी की ड्यूटी लगाई जाती है। कैंटीन से होने वाली हजारों रुपयों की आमदनी की वसूली भी वही करता है। जेल में आने वाले नए बंदियों से भी भारी भरकम वसूली की जाती है। सूत्रों का यहां तक कहना है कि जेल अधीक्षक के बाद, यह बंदी रक्षक जेल के अंदर खुलेआम मोबाइल लेकर चलता है। यह सब कुछ सीसीटीवी कैमरों में कैद है।
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इनसेट
पांच दिन पूर्व जिला कारागार की दीवार फांदकर बंदी अंकित और डिंपी उर्फ शिवा फरार हो गए थे। जेलर विनय प्रताप सिंह ने इन बंदियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बाद, दो सिपाही नवीन कुमार, अतुल मिश्रा, शिवेंद्र यादव, डिप्टी जेलर बद्री प्रसाद और जेलर विनय प्रताप सिंह को निलंबित कर दिया गया है। फिलहाल इन निलंबित कर्मियों के खिलाफ जांच चल रही है। हालांकि, जेल प्रशासन निलंबित कर्मियों को दोषी मान रहा है, लेकिन मुख्य दोषियों, यानी फरार बंदियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यह सवाल उठता है कि जब निलंबित जेलर विनय प्रताप सिंह ने बंदियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। नियमानुसार तो जेल अधीक्षक को भी बंदियों के साथ-साथ जेलर के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज हाेनी चाहिए थी। एसपी विनोद कुमार ने बताया कि जेल प्रशासन ने जो तहरीर दी, उसी आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। अब मामले की विवेचना की जा रही है।
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इन मामलों में दर्ज हुई थी पुलिस के खिलाफ प्राथमिकी
29 अक्टूबर 2025: आरोपी अवनीश उर्फ लालू कोर्ट परिसर से भागा था, जिसके मामले में सिपाही विवेक कुमार और होमगार्ड सतीश चंद्र के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
17 नवंबर 2025: बंदी मोहित कुमार ने जेल गेट के पास बंदी रक्षकों को धक्का देकर फरार हो गया था, जिसमें एक सिपाही धीरू और होमगार्ड के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
वर्जन जिला कारागार में व्याप्त अनियमितताओं ने मैंने दूर किया है। फिर भी षड़यंत्र के तहत उनके ऊपर अनर्गल आरोप लगाए जा रहे हैं। घटना की उच्च स्तरीय जांच चल रही है, जिसमें सब स्पष्ट हो जाएगा।
-भीमसेन मुकुंद, जेल अधीक्षक