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Kannauj News: जेल में बंद दिव्यांग को चोरी की तीन मामलों में अदालत ने किया बरी
Thu, 04 May 2023 12:44 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
Updated Thu, 04 May 2023 12:44 AM IST
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कन्नौज। पिछले छह साल से जेल में बंद दिव्यांग को चोरी की तीन मामलों से अदालत ने बरी कर दिया है। अदालत ने तीनों मामलों में अभियोजन की लचर पैरवी व प्रस्तुत किए गए साक्षियों के बयानों के आधार पर जेल में रह रहे दिव्यांग को दोषमुक्त कर दिया। न्यायिक मजिस्ट्रेट परविंदर सिंह ने मामले में फैसला सुनाया। उसे पहले भी चोरी के तीन मामलों में पहले भी दोषमुक्त करार दिया गया था। दिव्यांग की ओर से लीगल एड डिफेंस काउंसिल ने अदालत में मुफ्त पैरवी की।
चीफ डिफेंस काउसिंल श्वेतांक अरूण तिवारी ने बताया कि मामला तिर्वा कोतवाली क्षेत्र में वर्ष 2017 में हुई तीन अलग-अलग चोरी की घटना से जुड़ा है। तिर्वा कोतवाली पुलिस ने ठठिया थाना के पैथाना के रहने वाले बशीर अली के दिव्यांग पुत्र सुलेमान उर्फ खलीफा पुत्र बशीर अली को आरोपी बनाते हुए जेल भेज दिया। पुलिस ने इन मामलों में तीन अन्य व्यक्ति नरेश उर्फ टिन्ना, कुंवरपाल व फहीम को भी आरोपी बनाया था। पुलिस ने बताया था कि 16 फरवरी 2017 की रात मां अन्नपूर्णा देवी मंदिर में अज्ञात चोरों की ओर से आभूषण व नगदी चोरी की गई थी। जिसका मुकदमा मंदिर को पुजारी सत्यप्रकाश श्रीवास्त ने दर्ज कराया था। पुलिस ने चोरी के मामले में सुलेमान समेत उन सभी व्यक्तियों को आरोपी बनाते हुए जेल भेजा था। दौलेश्वर मार्के में हुई चोरी में भी पुलिस ने उसे आरोपी बनाया था। इस मामले में अन्य सभी आरोपियों की जमानत हो गई, लेकिन सुलेमान की पैरवी के लिए कोई अधिवक्ता नहीं मिला। ऐसे में सुलेमान ने जेल से चिट्ठी लिखकर निशुल्क कानूनी मदद की गुहार लगाई थी। उसी के मद्देनजर इस मामले में असिस्टेंट डिफेंस काउंसिल मोहम्मद सैफ व शिवशंकर दोहरे को सुलेमान की पैरवी के लिए नियुक्त किया गया। मुकदमे का विचारण न्यायिक मजिस्ट्रेट परविंदर सिंह के न्यायालय में हुआ। अभियोजन की ओर से चार साक्षी न्यायालय में प्रस्तुत किए गए, जो घटना में उन सभी आरोपियों की संलिप्तता साबित करने में असफल रहे। न्यायिक मजिस्ट्रेट परविंदर सिंह ने दिव्यांग सुलेमान समेत अन्य आरोपियों को तीनों मामलों में दोषमुक्त किया।
इनसेट
छह साल से जेल में बंद, मानवाधिकार का हनन
न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि कथित आरोपी सुलेमान छह वर्षों से जेल में है। अन्य व्यक्ति भी मुकदमा झेल रहे हैं। वाद को अनिश्चित काल तक लंबित रखना अभियुक्तगण के साथ अन्याय है। अभियुक्तगण के मौलिक अधिकारों व मानवाधिकारों का हनन हो रहा है। मजिस्ट्रेट ने निर्णय में अभियोजन की लचर पैरवी पर भी तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने तीनों मामलों में जेल में निरूद्ध दिव्यांग सुलेमान उर्फ खलीफा को रिहा करने का आदेश जारी किया है।
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चोरी की ही तीन मामलों में पहले भी अदालत से मिल चुकी है राहत
जेल में बंद दिव्यांग कैदी सुलेमान उर्फ खलीफा को तिर्वा कोतवाली पुलिस की ओर से चोरी के इन तीन मामलों के अलावा भी चोरी के ही तीन आरोप में रिपोर्ट दर्ज की थी। यह तीनों मामले तब दर्ज हुए थे जब वह पहले के मामले में जेल में बंद था। तीनों मामलों में कोटे ने पिछले दिनों 22 मार्च को अपना फैसला सुनाते हुए दिव्यांग सुलेमान उर्फ खलीफा को बरी किया था। इन तीनों मामलों में न्यायालय के समक्ष यह तथ्य आया था कि जिन घटनाओं में पुलिस ने सुलेमान को नामजद किया गया था, उन घटनाओं की तारीख में सुलेमान जेल में निरूद्ध था। हालांकि सुलेमान को अभी कुछ समय और जेल में रहना होगा, पुलिस ने इन्ही घटनाओं के आधार पर गैंगस्टर की कार्रवाई की थी, जिसमें अभी विचारण चल रहा है। लीगल एड डिफेंस काउंसिल की ओर से सुलेमान की सभी मामलों की निषुल्क पैरवी की जा रही है।
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चीफ डिफेंस काउसिंल श्वेतांक अरूण तिवारी ने बताया कि मामला तिर्वा कोतवाली क्षेत्र में वर्ष 2017 में हुई तीन अलग-अलग चोरी की घटना से जुड़ा है। तिर्वा कोतवाली पुलिस ने ठठिया थाना के पैथाना के रहने वाले बशीर अली के दिव्यांग पुत्र सुलेमान उर्फ खलीफा पुत्र बशीर अली को आरोपी बनाते हुए जेल भेज दिया। पुलिस ने इन मामलों में तीन अन्य व्यक्ति नरेश उर्फ टिन्ना, कुंवरपाल व फहीम को भी आरोपी बनाया था। पुलिस ने बताया था कि 16 फरवरी 2017 की रात मां अन्नपूर्णा देवी मंदिर में अज्ञात चोरों की ओर से आभूषण व नगदी चोरी की गई थी। जिसका मुकदमा मंदिर को पुजारी सत्यप्रकाश श्रीवास्त ने दर्ज कराया था। पुलिस ने चोरी के मामले में सुलेमान समेत उन सभी व्यक्तियों को आरोपी बनाते हुए जेल भेजा था। दौलेश्वर मार्के में हुई चोरी में भी पुलिस ने उसे आरोपी बनाया था। इस मामले में अन्य सभी आरोपियों की जमानत हो गई, लेकिन सुलेमान की पैरवी के लिए कोई अधिवक्ता नहीं मिला। ऐसे में सुलेमान ने जेल से चिट्ठी लिखकर निशुल्क कानूनी मदद की गुहार लगाई थी। उसी के मद्देनजर इस मामले में असिस्टेंट डिफेंस काउंसिल मोहम्मद सैफ व शिवशंकर दोहरे को सुलेमान की पैरवी के लिए नियुक्त किया गया। मुकदमे का विचारण न्यायिक मजिस्ट्रेट परविंदर सिंह के न्यायालय में हुआ। अभियोजन की ओर से चार साक्षी न्यायालय में प्रस्तुत किए गए, जो घटना में उन सभी आरोपियों की संलिप्तता साबित करने में असफल रहे। न्यायिक मजिस्ट्रेट परविंदर सिंह ने दिव्यांग सुलेमान समेत अन्य आरोपियों को तीनों मामलों में दोषमुक्त किया।
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छह साल से जेल में बंद, मानवाधिकार का हनन
न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि कथित आरोपी सुलेमान छह वर्षों से जेल में है। अन्य व्यक्ति भी मुकदमा झेल रहे हैं। वाद को अनिश्चित काल तक लंबित रखना अभियुक्तगण के साथ अन्याय है। अभियुक्तगण के मौलिक अधिकारों व मानवाधिकारों का हनन हो रहा है। मजिस्ट्रेट ने निर्णय में अभियोजन की लचर पैरवी पर भी तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने तीनों मामलों में जेल में निरूद्ध दिव्यांग सुलेमान उर्फ खलीफा को रिहा करने का आदेश जारी किया है।
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चोरी की ही तीन मामलों में पहले भी अदालत से मिल चुकी है राहत
जेल में बंद दिव्यांग कैदी सुलेमान उर्फ खलीफा को तिर्वा कोतवाली पुलिस की ओर से चोरी के इन तीन मामलों के अलावा भी चोरी के ही तीन आरोप में रिपोर्ट दर्ज की थी। यह तीनों मामले तब दर्ज हुए थे जब वह पहले के मामले में जेल में बंद था। तीनों मामलों में कोटे ने पिछले दिनों 22 मार्च को अपना फैसला सुनाते हुए दिव्यांग सुलेमान उर्फ खलीफा को बरी किया था। इन तीनों मामलों में न्यायालय के समक्ष यह तथ्य आया था कि जिन घटनाओं में पुलिस ने सुलेमान को नामजद किया गया था, उन घटनाओं की तारीख में सुलेमान जेल में निरूद्ध था। हालांकि सुलेमान को अभी कुछ समय और जेल में रहना होगा, पुलिस ने इन्ही घटनाओं के आधार पर गैंगस्टर की कार्रवाई की थी, जिसमें अभी विचारण चल रहा है। लीगल एड डिफेंस काउंसिल की ओर से सुलेमान की सभी मामलों की निषुल्क पैरवी की जा रही है।