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शीतगृह भरने के लिए बांटा करोड़ों रुपये का ऋण
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खेत में आलू की खुदाई के बाद लगे पैकेट।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। मौसम की मार से इस बार पक्की फसल की पैदावार कम हुई है। इससे खुदाई शुरू होने के बाद से दाम चढ़े चल रहे हैं। शीतगृह भरना मुश्किल है। ऐसे में शीतगृह संचालक किसानों को आलू भंडारित करने के लिए मनाने में लगे हैं। शीतगृहों के कर्मचारी खेतों में पहुंचकर किसानों को भंडारण के लिए मना रहे हैं। प्रलोभन भी दिया जा रहा है। 75 से लेकर 150 रुपये प्रति पैकेट ऋण का रेट खुला है। जानकारों के मुताबिक शीतगृह स्वामी एक माह में 50 से 60 करोड़ रुपये वितरित कर चुके हैं।
आलू की कच्ची फसल के दौरान करीब एक सप्ताह तक हुई बारिश से काफी हद तक फसल बर्बाद हो गई। जिले में दिवाली तक नया आलू मार्केट में नहीं आ सका। करीब 25 दिन लेट शुरू हुई कच्ची फसल की खुदाई का रेट खुला तो भाव आसमान छूने लगे। 900 से लेकर 1200 रुपये प्रति पैकेट तक आलू की बिक्री हुई। पहले किसान कच्ची फसल की खुदाई 15 से 20 फीसदी करते थे। भाव अच्छे मिलने से करीब 45 फीसदी कच्ची फसल किसानों ने खोद डाली। इसके बाद खराब मौसम के चलते पक्की फसल को बचाए रखना मुश्किल हो गया। तमाम कोशिशों के बाद भी झुलसा लग गया। इसके चलते आलू का साइज कम हो गया। पिछले साल प्रति बीघा 45 पैकेट तक आलू की पैदावार हुई थी। इस बार 20 से 22 पैकेट प्रति बीघा पैदावार मिली। कम पैदावार से शीतगृह स्वामी परेशान हैं। इस बार 30 से 35 फीसदी तक शीतगृह खाली रहने की उम्मीद है। सबसे अधिक घाटे में नए शीतगृह हैं।
जानकारों के मुताबिक किसानों को शीतगृह तक आलू लाने के लिए ऋण के ऑफर दिए जा रहे हैं। सहालग का मौसम होने से किसानों को पैसों की सख्त जरूरत है। किसान मौके का फायदा उठाकर शीतगृहों से ऋण उठा रहे हैं। शीतगृह स्वामियों ने अभी तक करीब 50 से 60 करोड़ रुपया किसानों को ऋण के रूप में बांटा है।
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खेतों में 600 से 650 रुपये तक खुला रेट
पक्की फसल का रेट पिछले वर्ष की तुलना में करीब 300 से 350 रुपये अधिक खुला है। इस बार खेतों में हालैंड प्रजाति का आलू 600 से 650, सफेद 500 व चिप्सोना 650 रुपये प्रति पैकेट बिक रहा है।
आलू पर इस बार मौसम की मार पड़ी है। इससे कच्ची फसल मार्केट में काफी देरी से आई। कम पैदावार से आलू के भाव चढ़े हैं। आसपास के प्रदेशों में भी मौसम की मार से फसल को नुकसान हुआ है। पक्की फसल में आलू की पैदावार पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम है। जिले में शीतगृहों की संख्या 127 से बढ़कर 135 पहुंच गई है। ऐसे में सभी शीतगृह भर पाना मुश्किल लग रहा है।
मनोज चतुर्वेदी, जिला उद्यान अधिकारी
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आलू की कच्ची फसल के दौरान करीब एक सप्ताह तक हुई बारिश से काफी हद तक फसल बर्बाद हो गई। जिले में दिवाली तक नया आलू मार्केट में नहीं आ सका। करीब 25 दिन लेट शुरू हुई कच्ची फसल की खुदाई का रेट खुला तो भाव आसमान छूने लगे। 900 से लेकर 1200 रुपये प्रति पैकेट तक आलू की बिक्री हुई। पहले किसान कच्ची फसल की खुदाई 15 से 20 फीसदी करते थे। भाव अच्छे मिलने से करीब 45 फीसदी कच्ची फसल किसानों ने खोद डाली। इसके बाद खराब मौसम के चलते पक्की फसल को बचाए रखना मुश्किल हो गया। तमाम कोशिशों के बाद भी झुलसा लग गया। इसके चलते आलू का साइज कम हो गया। पिछले साल प्रति बीघा 45 पैकेट तक आलू की पैदावार हुई थी। इस बार 20 से 22 पैकेट प्रति बीघा पैदावार मिली। कम पैदावार से शीतगृह स्वामी परेशान हैं। इस बार 30 से 35 फीसदी तक शीतगृह खाली रहने की उम्मीद है। सबसे अधिक घाटे में नए शीतगृह हैं।
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जानकारों के मुताबिक किसानों को शीतगृह तक आलू लाने के लिए ऋण के ऑफर दिए जा रहे हैं। सहालग का मौसम होने से किसानों को पैसों की सख्त जरूरत है। किसान मौके का फायदा उठाकर शीतगृहों से ऋण उठा रहे हैं। शीतगृह स्वामियों ने अभी तक करीब 50 से 60 करोड़ रुपया किसानों को ऋण के रूप में बांटा है।
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खेतों में 600 से 650 रुपये तक खुला रेट
पक्की फसल का रेट पिछले वर्ष की तुलना में करीब 300 से 350 रुपये अधिक खुला है। इस बार खेतों में हालैंड प्रजाति का आलू 600 से 650, सफेद 500 व चिप्सोना 650 रुपये प्रति पैकेट बिक रहा है।
आलू पर इस बार मौसम की मार पड़ी है। इससे कच्ची फसल मार्केट में काफी देरी से आई। कम पैदावार से आलू के भाव चढ़े हैं। आसपास के प्रदेशों में भी मौसम की मार से फसल को नुकसान हुआ है। पक्की फसल में आलू की पैदावार पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम है। जिले में शीतगृहों की संख्या 127 से बढ़कर 135 पहुंच गई है। ऐसे में सभी शीतगृह भर पाना मुश्किल लग रहा है।
मनोज चतुर्वेदी, जिला उद्यान अधिकारी