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Kannauj News: गैंगस्टर नवाब और नीलू को सुप्रीम कोर्ट से भी झटका, हाईकोर्ट का आदेश ठहराया सही
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कन्नौज। नवाब सिंह यादव के पॉक्सो एवं दुष्कर्म की गवाह महिला चिकित्सक को धमकी देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए सीजेएम कन्नौज के आदेश को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने एक जुलाई को हाईकोर्ट के आदेश को सही माना है और सीजेएम को इस मामले पर पुनर्विचार करने के आदेश दिए हैं। किशोरी दुष्कर्म कांड के आरोपी नवाब सिंह यादव को यह दूसरा बड़ा झटका लगा है। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट उसकी जमानत याचिका खारिज कर चुका है।
सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को नवाब सिंह यादव की तरफ से दायर की गई याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट नंबर दो में न्यायमूर्ति बीवी नागरत्न और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने राज्य सरकार की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए मामला दोबारा सीजेएम न्यायालय को भेज दिया। सीजेएम ने 20 सितंबर 2025 को पुलिस की ओर से दाखिल आरोपपत्र पर संज्ञान लेने से इन्कार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को कानून के अनुरूप नहीं माना और नए सिरे से आदेश पारित करने के निर्देश दिए और एक जुलाई के हाईकोर्ट के आदेश को सही ठहराया।
गवाही देने के बाद डॉक्टर को धमकी का था आरोप
मामला तिर्वा क्षेत्र की नाबालिग किशोरी से जुड़ा है। आरोप है कि पूर्व ब्लॉक प्रमुख नवाब सिंह यादव ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान जिला अस्पताल की महिला चिकित्सक डॉ. स्वास्तिका शालिनी ने चिकित्सा संबंधी साक्ष्य प्रस्तुत किए। आरोप है कि गवाही के बाद उन पर बयान बदलने का दबाव बनाया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। पुलिस ने इसकी अलग प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना के बाद आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया था। इसी मामले में नवाब सिंह यादव पहले हाईकोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। मामले में सीजेएम ने मुकदमा रद्द करने और विवेचना करने वाले पुलिस कर्मियों और अधिकारियों को दोबारा ट्रेनिंग पर भेजने के लिए कहा था।
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सुप्रीम कोर्ट ने फिर सुनवाई के दिए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीजेएम कन्नौज ने उपलब्ध सामग्री और साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन कर संज्ञान के चरण की सीमा से आगे जाकर आदेश पारित किया। अब पुलिस रिपोर्ट और उपलब्ध अभिलेखों को कानून के अनुरूप देखते हुए सीजेएम को मामले में नए सिरे से आदेश पारित करना होगा। पुलिस कर्मियों को दोबारा प्रशिक्षण पर भेजने का आदेश न्याय संगत नहीं है। सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू और यशार्थ कांत ने पैरवी की थी और सदर कोतवाल जितेंद प्रताप सिंह भी सुप्रीम कोर्ट में पुलिस की तरफ से पेश हुए।
वर्जन
नवाब सिंह यादव ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया है और डॉक्टर को धमकाने तथा गैंगस्टर के मुकदमे को सही करार दिया है।
-विनोद कुमार, पुलिस अधीक्षक
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सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को नवाब सिंह यादव की तरफ से दायर की गई याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट नंबर दो में न्यायमूर्ति बीवी नागरत्न और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने राज्य सरकार की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए मामला दोबारा सीजेएम न्यायालय को भेज दिया। सीजेएम ने 20 सितंबर 2025 को पुलिस की ओर से दाखिल आरोपपत्र पर संज्ञान लेने से इन्कार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को कानून के अनुरूप नहीं माना और नए सिरे से आदेश पारित करने के निर्देश दिए और एक जुलाई के हाईकोर्ट के आदेश को सही ठहराया।
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गवाही देने के बाद डॉक्टर को धमकी का था आरोप
मामला तिर्वा क्षेत्र की नाबालिग किशोरी से जुड़ा है। आरोप है कि पूर्व ब्लॉक प्रमुख नवाब सिंह यादव ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान जिला अस्पताल की महिला चिकित्सक डॉ. स्वास्तिका शालिनी ने चिकित्सा संबंधी साक्ष्य प्रस्तुत किए। आरोप है कि गवाही के बाद उन पर बयान बदलने का दबाव बनाया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। पुलिस ने इसकी अलग प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना के बाद आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया था। इसी मामले में नवाब सिंह यादव पहले हाईकोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। मामले में सीजेएम ने मुकदमा रद्द करने और विवेचना करने वाले पुलिस कर्मियों और अधिकारियों को दोबारा ट्रेनिंग पर भेजने के लिए कहा था।
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सुप्रीम कोर्ट ने फिर सुनवाई के दिए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीजेएम कन्नौज ने उपलब्ध सामग्री और साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन कर संज्ञान के चरण की सीमा से आगे जाकर आदेश पारित किया। अब पुलिस रिपोर्ट और उपलब्ध अभिलेखों को कानून के अनुरूप देखते हुए सीजेएम को मामले में नए सिरे से आदेश पारित करना होगा। पुलिस कर्मियों को दोबारा प्रशिक्षण पर भेजने का आदेश न्याय संगत नहीं है। सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू और यशार्थ कांत ने पैरवी की थी और सदर कोतवाल जितेंद प्रताप सिंह भी सुप्रीम कोर्ट में पुलिस की तरफ से पेश हुए।
वर्जन
नवाब सिंह यादव ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया है और डॉक्टर को धमकाने तथा गैंगस्टर के मुकदमे को सही करार दिया है।
-विनोद कुमार, पुलिस अधीक्षक