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Kannauj News: बिना चश्मदीद गवाह के सुनाई गई सजा
Sat, 30 Aug 2025 12:27 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
Updated Sat, 30 Aug 2025 12:27 AM IST
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-पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर मिले थे 17 चोटों के निशान, गर्दन पर लात रखकर मारा था
संवाद न्यूज एजेंसी
कन्नौज। बेटे की हत्या में पुलिस के पास कोई चश्मदीद गवाह भी नहीं था, फिर पुलिस ने मनोवैज्ञानिक तरीका अपनाया। मां ने अपना गुनाह कुबूल कर लिया तो प्रेमी भी टूट गया। बाकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने असलियत बयां कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक जतिन को बेरहमी से मारा गया था। उसके शरीर और गुप्तांग पर चोटों के 17 निशान थे। दिव्यांग और मानसिक रूप से कमजोर बेटे को रास्ते से हटाने के लिए सोनी ने प्रेमी के साथ मिलकर योजना पहले ही तैयार कर ली थी। भारतीय न्याय पालिका के इतिहास में ऐसे कम केस ही आए हैं, जिनमें बिना चश्मदीद गवाह के सजा सुनाई गई है।
नगला जमाली में बेटे की हत्या करने के बाद सोनी गिहार ने जतिन उर्फ भोलू की बीमारी से मौत होने का प्रचार कर दिया। पिता धर्मेंद्र गिहार को जब शक हुआ तो उसने पुलिस बुला ली। तत्कालीन सौरिख थाना प्रभारी दिग्विजय सिंह मौके पर गए तो परिजन एक राय होकर पोस्टमार्टम कराने को तैयार नहीं हुए। इंस्पेक्टर के मुताबिक एंटीमॉर्टम इंजरी मिलने पर उन्होंने जतिन के शव का पोस्टमार्टम कराया।
रिपोर्ट में पता चला कि उसकी बेरहमी से पिटाई की गई थी और गुप्तांग पर भी लात मारी गई थी। गुड्डू ने उसकी गर्दन को लात से दबा दिया था, जिससे उसके प्राण पखेरू उड़ गए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही अमानवीयता की सारी कहानी कह रही थी। दूसरी सबसे बड़ी समस्या थी कि पुलिस के पास कोई चश्मदीद गवाह भी नहीं था। ऐसे में केवल पोस्टमार्टम रिपोर्ट को ही कोर्ट ने आधार माना और दोषियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता नवीन दुबे ने बताया सोनी ने कोर्ट को बताया कि ससुराल वालों की मर्जी के खिलाफ उसने गुड्डू जाटव के साथ शादी तो कर ली, लेकिन दिव्यांग बेटा जतिन उर्फ भोलू उसकी मौज मस्ती में बाधा बन रहा था। उसे मारकर दोनों बाहर किसी शहर में जाकर नई दुनिया बसाना चाहते थे, लेकिन उनकी योजना पर पानी फिर गया। सजा सुनाए जाने के बाद वह पछता रही थी और रो-रोकर यही कर रही थी कि कोई मुझे भी मार दो। जीवन में ऐसा पाप कोई मत करना। शासकीय अधिवक्ता के मुताबिक अपराधी कितना भी होशियार हो लेकिन सजा के लिए कुछ न कुछ सुबूत छोड़ जाता है। बच्चे के शरीर पर मिले चोटों के निशान ने दोनों को आखिरी अंजाम तक पहुंचा दिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कन्नौज। बेटे की हत्या में पुलिस के पास कोई चश्मदीद गवाह भी नहीं था, फिर पुलिस ने मनोवैज्ञानिक तरीका अपनाया। मां ने अपना गुनाह कुबूल कर लिया तो प्रेमी भी टूट गया। बाकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने असलियत बयां कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक जतिन को बेरहमी से मारा गया था। उसके शरीर और गुप्तांग पर चोटों के 17 निशान थे। दिव्यांग और मानसिक रूप से कमजोर बेटे को रास्ते से हटाने के लिए सोनी ने प्रेमी के साथ मिलकर योजना पहले ही तैयार कर ली थी। भारतीय न्याय पालिका के इतिहास में ऐसे कम केस ही आए हैं, जिनमें बिना चश्मदीद गवाह के सजा सुनाई गई है।
नगला जमाली में बेटे की हत्या करने के बाद सोनी गिहार ने जतिन उर्फ भोलू की बीमारी से मौत होने का प्रचार कर दिया। पिता धर्मेंद्र गिहार को जब शक हुआ तो उसने पुलिस बुला ली। तत्कालीन सौरिख थाना प्रभारी दिग्विजय सिंह मौके पर गए तो परिजन एक राय होकर पोस्टमार्टम कराने को तैयार नहीं हुए। इंस्पेक्टर के मुताबिक एंटीमॉर्टम इंजरी मिलने पर उन्होंने जतिन के शव का पोस्टमार्टम कराया।
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रिपोर्ट में पता चला कि उसकी बेरहमी से पिटाई की गई थी और गुप्तांग पर भी लात मारी गई थी। गुड्डू ने उसकी गर्दन को लात से दबा दिया था, जिससे उसके प्राण पखेरू उड़ गए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही अमानवीयता की सारी कहानी कह रही थी। दूसरी सबसे बड़ी समस्या थी कि पुलिस के पास कोई चश्मदीद गवाह भी नहीं था। ऐसे में केवल पोस्टमार्टम रिपोर्ट को ही कोर्ट ने आधार माना और दोषियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता नवीन दुबे ने बताया सोनी ने कोर्ट को बताया कि ससुराल वालों की मर्जी के खिलाफ उसने गुड्डू जाटव के साथ शादी तो कर ली, लेकिन दिव्यांग बेटा जतिन उर्फ भोलू उसकी मौज मस्ती में बाधा बन रहा था। उसे मारकर दोनों बाहर किसी शहर में जाकर नई दुनिया बसाना चाहते थे, लेकिन उनकी योजना पर पानी फिर गया। सजा सुनाए जाने के बाद वह पछता रही थी और रो-रोकर यही कर रही थी कि कोई मुझे भी मार दो। जीवन में ऐसा पाप कोई मत करना। शासकीय अधिवक्ता के मुताबिक अपराधी कितना भी होशियार हो लेकिन सजा के लिए कुछ न कुछ सुबूत छोड़ जाता है। बच्चे के शरीर पर मिले चोटों के निशान ने दोनों को आखिरी अंजाम तक पहुंचा दिया।
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