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साढ़े चार लाख को नहीं मिले गोल्डन कार्ड
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आयुष्मान भारत योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए खड़े लोग।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना अफसरों की लापरवाही की भेंट चढ़ गई। जिले में करीब छह लाख गोल्डन कार्ड बनने थे। तीन साल में केवल डेढ़ लाख ही बन सके। तकरीबन साढ़े चार लाख लोगों को यह अब तक नसीब नहीं हो पाए हैं।
आयुष्मान भारत योजना (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना)के तहत जिला अस्पताल समेत सभी सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र)पर काउंटर लगा कर गोल्डन कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। योजना पर अफसरों की लापरवाही भारी पड़ गई। आंकड़ों के मुताबिक तीन साल में महज डेढ़ लाख लोगों को कार्ड उपलब्ध हो सके। बाकी को कार्ड मुहैया कराने में दिलचस्पी नहीं ली जा रही। पिछले दिनों समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्र ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई थी। उन्होंने अभियान चलाकर महकमे को कार्ड बनाने की हिदायत दी थी। इसके बाद भी जिम्मेदार नहीं चेते। वहीं गोल्डन कार्ड के प्रोग्राम मैनेजर डॉ. सतेंद्र कुमार का कहना है कि लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जागरुकता की कमी से पात्र नहीं आ रहे हैं।
इस बाबत सीएमओ डॉ. कृष्ण स्वरूप का कहना है कि जिले में जनसुविधा केंद्रों की 70 टीमों को प्लान के तहत निकाला गया है। यह टीमें निर्धारित तारीख के आधार पर ग्राम पंचायतों में पहुंच कर निशुल्क आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी कर रही हैं। जल्द हम लक्ष्य के करीब पहुंच जाएंगे।
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जिले में पांच लाख 93 हजार 400 लोगों को आयुष्मान योजना से गोल्डन कार्ड जारी होने हैं।
अब तक केवल एक लाख 40 हजार 339 लोगोें को ही जारी हुए।
गोल्डन कार्ड से पांच लाख रुपये तक निशुल्क इलाज कराया जा सकता है।
गोल्डन कार्ड के लिए पात्रों को वर्ष 2011 की डाटाबेस गणना के आधार पर शामिल किया गया है। सामाजिक, आर्थिक व जातिगत जनगणना के आधार पर सूची तैयार की गई है। इसी के आधार पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री ने पात्र लोगों को गोल्डन कार्ड के लिए पत्र भेजे थे।
इस तरह बनता गोल्डन कार्ड
आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी कराने के लिए पात्र परिवार को राशन कार्ड, आधार कार्ड, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री की ओर से भेजा गया पत्र लेकर कैफे सेंटर या सीएचसी, जिला अस्पताल पर जाना होगा। इसी को आधार मान कर कार्ड जारी कर दिया जाता है।
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आयुष्मान भारत योजना (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना)के तहत जिला अस्पताल समेत सभी सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र)पर काउंटर लगा कर गोल्डन कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। योजना पर अफसरों की लापरवाही भारी पड़ गई। आंकड़ों के मुताबिक तीन साल में महज डेढ़ लाख लोगों को कार्ड उपलब्ध हो सके। बाकी को कार्ड मुहैया कराने में दिलचस्पी नहीं ली जा रही। पिछले दिनों समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्र ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई थी। उन्होंने अभियान चलाकर महकमे को कार्ड बनाने की हिदायत दी थी। इसके बाद भी जिम्मेदार नहीं चेते। वहीं गोल्डन कार्ड के प्रोग्राम मैनेजर डॉ. सतेंद्र कुमार का कहना है कि लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जागरुकता की कमी से पात्र नहीं आ रहे हैं।
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इस बाबत सीएमओ डॉ. कृष्ण स्वरूप का कहना है कि जिले में जनसुविधा केंद्रों की 70 टीमों को प्लान के तहत निकाला गया है। यह टीमें निर्धारित तारीख के आधार पर ग्राम पंचायतों में पहुंच कर निशुल्क आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी कर रही हैं। जल्द हम लक्ष्य के करीब पहुंच जाएंगे।
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जिले में पांच लाख 93 हजार 400 लोगों को आयुष्मान योजना से गोल्डन कार्ड जारी होने हैं।
अब तक केवल एक लाख 40 हजार 339 लोगोें को ही जारी हुए।
गोल्डन कार्ड से पांच लाख रुपये तक निशुल्क इलाज कराया जा सकता है।
गोल्डन कार्ड के लिए पात्रों को वर्ष 2011 की डाटाबेस गणना के आधार पर शामिल किया गया है। सामाजिक, आर्थिक व जातिगत जनगणना के आधार पर सूची तैयार की गई है। इसी के आधार पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री ने पात्र लोगों को गोल्डन कार्ड के लिए पत्र भेजे थे।
इस तरह बनता गोल्डन कार्ड
आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी कराने के लिए पात्र परिवार को राशन कार्ड, आधार कार्ड, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री की ओर से भेजा गया पत्र लेकर कैफे सेंटर या सीएचसी, जिला अस्पताल पर जाना होगा। इसी को आधार मान कर कार्ड जारी कर दिया जाता है।