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Kannauj News: 32 साल बाद जेल से आने पर रिश्तेदारों ने बंद किए दरवाजा
Sun, 02 Apr 2023 11:17 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
Updated Sun, 02 Apr 2023 11:17 PM IST
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छिबरामऊ। 32 साल पहले 22 वर्ष की उम्र में बरात में जेवरों से भरा बैग छीनने का आरोप में जेल गया युवक युवक अब 54 वर्ष की उम्र में लौटा है। उसे दो दिन पहले अदालत ने बाइज्जत बरी कर दिया था। उम्र का आधा हिस्सा जेल में गुजारने के बाद बाहर तो आ गया, लेकिन अब रिश्तेदारों ने दरवाजा बंद कर दिया है। मोहल्ले के लोगों ने चाय-नाश्ता कराया। छिबरामऊ के मोहल्ला बजरिया निवासी विनोद तिवारी उर्फ कुलिया ने बताया कि वर्ष 1991 में मोहल्ले में फिरोजाबाद से आई बरात में बैंड पर बज रहे गाना प्यार की धुन सुनाता हूं, डांस नया दिखाता हूं, पर नाचने के लिए अपने साथियों के साथ शामिल हो गया। सभी नशे में थे। तभी बरात में चढ़ने वाले जेवरों से भरा झोला गायब हो गया। यह आरोप उसके अलावा साथियों पर भी लगा। पुलिस सभी को पकड़कर थाने ले गई और यातनाएं दीं। वह बेकसूर होने की बात कहता रहा, लेकिन किसी ने नहीं सुना। झूठे आरोप में उसे जेल भेज दिया गया।
जेल के साथियों से पैसे लेकर जुटाया किराया
विनोद उर्फ कुलिया को न्यायालय ने दो दिन पहले शुक्रवार को उसे दोषमुक्त कर दिया था। कोर्ट से उसे हरदोई जेल भेज दिया गया था। घर आने के लिए किराए की जुगाड़ करने में दो दिनों का समय लग गया। जेल में उसने मित्रों से 10 से लेकर 20 रुपये की मदद मांगी। किराया पूरा होने के बाद वह जेल से अपने घर के लिए निकला।
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हिस्से में जमीन है लेकिन लोगों ने कर रखा है कब्जा
न्यायालय से दोषमुक्त कर दिए गए विनोद ने बताया कि यहां उसका पैतृक मकान था, जो उसके पिता की मृत्यु के बाद बिक गया। हालांकि मकान का बिक्री में उसे उसके हिस्सा का पैसा दिया गया था। उसके हिस्से में गांव अतरौली में उसके हिस्से की जमीन है, लेकिन उस पर लोगों ने कब्जा कर रखा है। न्यायिक तरीके से वह अब अपनी जमीन के लिए लड़ेगा।
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मां-बाप की मौत के बाद टूटी बाहर आने की उम्मीद
विनोद ने बताया कि सजा होने के बाद उसके पिता ने जमानत के लिए काफी प्रयास किए। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद कुछ दिनों के लिए जेल से बाहर आया था। वारंट जारी होने के बाद उसे दोबारा जेल भेज दिया गया। पिता मुन्नालाल तिवारी की मृत्यु के बाद उसकी मां दो बार हरदोई जेल में मिलने गई। इससे पहले ही उसके सगे-संबंधी उससे नाता तोड़ चुके थे। मां की मौत के बाद उसने जेल से बाहर आने की आस छोड़ दी थी।
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पहले नहीं मिली कोई न्यायिक मदद, अब मिला वकील
विनोद उर्फ कुलिया ने बताया कि 32 साल जेल में रहने के दौरान सुनवाई के लिए उसे कई बार कोर्ट में पेश किया गया। वकील न होने के कारण उसकी सुनवाई की जा सकी। बाद में उसकी मांग पर 17 मार्च 2023 को वकील श्वेतांक तिवारी को उसकी पैरवी के लिए नियुक्त किया गया। 18 मार्च से लगातार उसके केस की सुनवाई हो रही थी। न्यायिक अधिकारी एडीजे द्वितीय नंदकुमार ने उसे दोष मुक्त करार दिया।
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32 साल चले केस में तीन जेलों में काटी सजा
बेकसूर होने के बाद भी 32 साल तक चले केस में उसने अपने जीवन के अहम साल जेल में काटे। झूठे आरोप में पकड़े जाने के बाद सबसे पहले फर्रुखाबाद जेल में रहा। उसके बाद जनपद का सृजन व जेल का निर्माण होने के बाद यहां कन्नौज जिला जेल भेज दिया गया। साल 2013 कन्नौज से उसे हरदोई जेल में शिफ्ट कर दिया गया। वहीं से अब उसकी रिहाई हो सकी है।
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जेल के साथियों से पैसे लेकर जुटाया किराया
विनोद उर्फ कुलिया को न्यायालय ने दो दिन पहले शुक्रवार को उसे दोषमुक्त कर दिया था। कोर्ट से उसे हरदोई जेल भेज दिया गया था। घर आने के लिए किराए की जुगाड़ करने में दो दिनों का समय लग गया। जेल में उसने मित्रों से 10 से लेकर 20 रुपये की मदद मांगी। किराया पूरा होने के बाद वह जेल से अपने घर के लिए निकला।
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हिस्से में जमीन है लेकिन लोगों ने कर रखा है कब्जा
न्यायालय से दोषमुक्त कर दिए गए विनोद ने बताया कि यहां उसका पैतृक मकान था, जो उसके पिता की मृत्यु के बाद बिक गया। हालांकि मकान का बिक्री में उसे उसके हिस्सा का पैसा दिया गया था। उसके हिस्से में गांव अतरौली में उसके हिस्से की जमीन है, लेकिन उस पर लोगों ने कब्जा कर रखा है। न्यायिक तरीके से वह अब अपनी जमीन के लिए लड़ेगा।
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मां-बाप की मौत के बाद टूटी बाहर आने की उम्मीद
विनोद ने बताया कि सजा होने के बाद उसके पिता ने जमानत के लिए काफी प्रयास किए। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद कुछ दिनों के लिए जेल से बाहर आया था। वारंट जारी होने के बाद उसे दोबारा जेल भेज दिया गया। पिता मुन्नालाल तिवारी की मृत्यु के बाद उसकी मां दो बार हरदोई जेल में मिलने गई। इससे पहले ही उसके सगे-संबंधी उससे नाता तोड़ चुके थे। मां की मौत के बाद उसने जेल से बाहर आने की आस छोड़ दी थी।
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पहले नहीं मिली कोई न्यायिक मदद, अब मिला वकील
विनोद उर्फ कुलिया ने बताया कि 32 साल जेल में रहने के दौरान सुनवाई के लिए उसे कई बार कोर्ट में पेश किया गया। वकील न होने के कारण उसकी सुनवाई की जा सकी। बाद में उसकी मांग पर 17 मार्च 2023 को वकील श्वेतांक तिवारी को उसकी पैरवी के लिए नियुक्त किया गया। 18 मार्च से लगातार उसके केस की सुनवाई हो रही थी। न्यायिक अधिकारी एडीजे द्वितीय नंदकुमार ने उसे दोष मुक्त करार दिया।
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32 साल चले केस में तीन जेलों में काटी सजा
बेकसूर होने के बाद भी 32 साल तक चले केस में उसने अपने जीवन के अहम साल जेल में काटे। झूठे आरोप में पकड़े जाने के बाद सबसे पहले फर्रुखाबाद जेल में रहा। उसके बाद जनपद का सृजन व जेल का निर्माण होने के बाद यहां कन्नौज जिला जेल भेज दिया गया। साल 2013 कन्नौज से उसे हरदोई जेल में शिफ्ट कर दिया गया। वहीं से अब उसकी रिहाई हो सकी है।