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बारिश और तूफान से तबाह हुआ किसान
अमर उजाला कन्नाैैज
Updated Tue, 03 Mar 2015 11:22 PM IST
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करीब 48 घंटों की बेमौसम बरसात ने किसानों को हिलाकर रख दिया है। तेज बारिश और हवाओं ने गेहूं की फसल में करीब 75 फीसदी का नुकसान पहुंचाया है। खेतों में खड़ी फसल पूरी तरह से पलट गई है। इससे उत्पादन में भारी गिरावट आएगी। मार्केट में इस बार गेहूं के दाम आसमान छुएंगे।
कच्ची फसल के दौरान बरसात ने किसानों को पहला झटका दिया। तब किसान आलू की कच्ची फसल खोदने को लेकर कई बार तैयार हुए, लेकिन बारिश के चलते वह अपनी फसल को खोद नहीं सके, और जिले में अधिकांश किसानों ने मौसम की खराबी के चलते कच्ची फसल को भी पक्की में तब्दील कर दिया।
नतीजा यह रहा कि हर वर्ष से पक्की आलू की फसल का एरिया काफी बढ़ गया। जिसका खामियाजा किसानों को अब भुगतने पर विवश होना पड़ रहा है। जिले में पड़ोसी जनपद फर्रुखाबाद से करीब आधा सैकड़ा के लगभग शीतगृह अधिक हैं। इसी सत्र में करीब छह शीतगृह नए शुरू होने के साथ कोल्डों की संख्या 101 पहुंच गई है।
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इसके बावजूद किसानों को शीतगृहों में आलू भंडारित करने के लिए जुगाड़ लगानी पड़ रही है, और कई-कई दिनों तक आलू भंडारित करने के लिए शीतगृह के बाहर खड़ा रहना पड़ रहा है। तब कहीं जाकर उनका आलू भंडारित हो पा रहा है। आलू की मंडी गिर जाने से किसान पहले से ही काफी परेशान था, रही कसर बरसात ने पूरी कर दी।
बरसात के चलते खेतों में खड़ी करीब पच्चीस फीसदी चिप्सोना व हालैंड आलू की फसल बर्बाद हो गई। अब किसानों के समय महज एक ही विकल्प बचा है कि वह इस आलू की खुदाई करके शीतगृहों में भंडारित न करके अपना किसी तरह से रुपया सीधा कर लें। क्योंकि यह आलू अब ज्यादा दिनों तक शीतगृह में भी नहीं रुक पाएगा। शीतगृहों में सड़ने से अच्छा है कि औने-पौने दामों में बिक्री कर ली जाए।
उधर बरसात से गेहूं की फसल को जबरदस्त नुकसान हुआ है। खेतों में खड़ी गेहूं की फसल बाली व फूल होने के कारण झड़ गया है। इसके अलावा फसल का अधिक वजन होने से फसल पूरी तरीके से खेतों में लेट गई। जिसका धूप निकलने के बाद भी खड़ा हो पाना मुश्किल दिख रहा है। इसके अलावा राई की फसल फली पर होने के कारण जिले के कई क्षेत्रों में पिछले दिनों ओलावृष्टि से दाने झड़ गए, और अब तेज हवाओं ने रही कसर पूरी कर दी।
खेतों में खड़ी चना की फसल को भी जबरदस्त नुकशान हुआ है। जानकार किसानों का कहना है कि चना की फसल मौजूदा समय में पूरी तरह से फूल पर आई थी। हवाओं से सारे फूल झड़ गए हैं। जिससे अब उसमें किसी तरह का चने की फसल का उत्पादन निकल पाना मुश्किल है।
बिचौलियों ने शुरू की दिमागी कसरत
डीएम के निर्देश पर वहीं शासन की ओर से जारी फरमान के मद्देनजर तहसीलों में एसडीएम ने सारे राजस्व कर्मियों को लगाकर फसलों में हुए नुकसान का आंकलन शुरू कर दिया है। ताकि किसानों को समय से उचित मुआवजा दिलाया जा सके। हलांकि इस बार गेहूं का उत्पादन कम होने से मार्केट में गेहूं की फसल आने पर भारी उछाल रहने की भी संभावनाएं तेज हो गई हैं। बिचौलियों ने अभी से इस फसल पर अपनी दिमागी कसरत शुरू कर दी है।
78 हजार हेक्टेयर में बोया गया था गेहूं
जिले में इस बार गेहूं की फसल के लिए शासन से 78 हजार 165 हेक्टेयर क्षेत्रफल का लक्ष्य मिला था। जिसके तहत गेहूं फसल की बुआई हुई थी। इस बार गेहूं की फसल के हिसाब से मौसम भी अच्छा रहा। बीच में दो से तीन बार बारिश हो जाने से किसानों को सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ी। उम्मीद जताई जा रही थी कि इस बार पिछली वर्ष की तुलना में गेहूं का उत्पादन बढ़ेगा, लेकिन तेज बारिश व तेज हवाओं ने सबकुछ चौपट कर दिया। हवाओं से बालियां काफी कमजोर हो गई हैं। मोटा आंकलन के अनुसार उत्पादन में करीब तीस फीसदी की गिरावट होगी।
किसानों को मुआवजा दिलाने की गुहार
मलिकपुर (कन्नौज)। बरसात व तेज हवाओं से फसल के भारी नुकसान से किसान हायतौबा करने के लिए मजबूर हैं। लोगों ने मुख्यमंत्री से मुआवजा दिलाए जाने की मांग की है। किसान विनोद कुमार, मान सिंह, भूरा, राम नरायन आदि लोगों ने बताया कि गेहूं की फसल तहस-नहस हो गई है। सरसों की फसल को भी काफी नुकसान पहुंचा है। पानी बरसने के बाद हवा चलने से गेहूं की फसल खेत में ही पलट गई है। उत्पादन भी काफी कम होने का खतरा बढ़ गया है। किसानों ने मांग की है कि जिला प्रशासन नुकसान का जायजा ले। पीड़ित किसानों को हुए नुकसान की समीक्षा कर मुआवजा दिलाए।
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कच्ची फसल के दौरान बरसात ने किसानों को पहला झटका दिया। तब किसान आलू की कच्ची फसल खोदने को लेकर कई बार तैयार हुए, लेकिन बारिश के चलते वह अपनी फसल को खोद नहीं सके, और जिले में अधिकांश किसानों ने मौसम की खराबी के चलते कच्ची फसल को भी पक्की में तब्दील कर दिया।
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नतीजा यह रहा कि हर वर्ष से पक्की आलू की फसल का एरिया काफी बढ़ गया। जिसका खामियाजा किसानों को अब भुगतने पर विवश होना पड़ रहा है। जिले में पड़ोसी जनपद फर्रुखाबाद से करीब आधा सैकड़ा के लगभग शीतगृह अधिक हैं। इसी सत्र में करीब छह शीतगृह नए शुरू होने के साथ कोल्डों की संख्या 101 पहुंच गई है।
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इसके बावजूद किसानों को शीतगृहों में आलू भंडारित करने के लिए जुगाड़ लगानी पड़ रही है, और कई-कई दिनों तक आलू भंडारित करने के लिए शीतगृह के बाहर खड़ा रहना पड़ रहा है। तब कहीं जाकर उनका आलू भंडारित हो पा रहा है। आलू की मंडी गिर जाने से किसान पहले से ही काफी परेशान था, रही कसर बरसात ने पूरी कर दी।
बरसात के चलते खेतों में खड़ी करीब पच्चीस फीसदी चिप्सोना व हालैंड आलू की फसल बर्बाद हो गई। अब किसानों के समय महज एक ही विकल्प बचा है कि वह इस आलू की खुदाई करके शीतगृहों में भंडारित न करके अपना किसी तरह से रुपया सीधा कर लें। क्योंकि यह आलू अब ज्यादा दिनों तक शीतगृह में भी नहीं रुक पाएगा। शीतगृहों में सड़ने से अच्छा है कि औने-पौने दामों में बिक्री कर ली जाए।
उधर बरसात से गेहूं की फसल को जबरदस्त नुकसान हुआ है। खेतों में खड़ी गेहूं की फसल बाली व फूल होने के कारण झड़ गया है। इसके अलावा फसल का अधिक वजन होने से फसल पूरी तरीके से खेतों में लेट गई। जिसका धूप निकलने के बाद भी खड़ा हो पाना मुश्किल दिख रहा है। इसके अलावा राई की फसल फली पर होने के कारण जिले के कई क्षेत्रों में पिछले दिनों ओलावृष्टि से दाने झड़ गए, और अब तेज हवाओं ने रही कसर पूरी कर दी।
खेतों में खड़ी चना की फसल को भी जबरदस्त नुकशान हुआ है। जानकार किसानों का कहना है कि चना की फसल मौजूदा समय में पूरी तरह से फूल पर आई थी। हवाओं से सारे फूल झड़ गए हैं। जिससे अब उसमें किसी तरह का चने की फसल का उत्पादन निकल पाना मुश्किल है।
बिचौलियों ने शुरू की दिमागी कसरत
डीएम के निर्देश पर वहीं शासन की ओर से जारी फरमान के मद्देनजर तहसीलों में एसडीएम ने सारे राजस्व कर्मियों को लगाकर फसलों में हुए नुकसान का आंकलन शुरू कर दिया है। ताकि किसानों को समय से उचित मुआवजा दिलाया जा सके। हलांकि इस बार गेहूं का उत्पादन कम होने से मार्केट में गेहूं की फसल आने पर भारी उछाल रहने की भी संभावनाएं तेज हो गई हैं। बिचौलियों ने अभी से इस फसल पर अपनी दिमागी कसरत शुरू कर दी है।
78 हजार हेक्टेयर में बोया गया था गेहूं
जिले में इस बार गेहूं की फसल के लिए शासन से 78 हजार 165 हेक्टेयर क्षेत्रफल का लक्ष्य मिला था। जिसके तहत गेहूं फसल की बुआई हुई थी। इस बार गेहूं की फसल के हिसाब से मौसम भी अच्छा रहा। बीच में दो से तीन बार बारिश हो जाने से किसानों को सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ी। उम्मीद जताई जा रही थी कि इस बार पिछली वर्ष की तुलना में गेहूं का उत्पादन बढ़ेगा, लेकिन तेज बारिश व तेज हवाओं ने सबकुछ चौपट कर दिया। हवाओं से बालियां काफी कमजोर हो गई हैं। मोटा आंकलन के अनुसार उत्पादन में करीब तीस फीसदी की गिरावट होगी।
किसानों को मुआवजा दिलाने की गुहार
मलिकपुर (कन्नौज)। बरसात व तेज हवाओं से फसल के भारी नुकसान से किसान हायतौबा करने के लिए मजबूर हैं। लोगों ने मुख्यमंत्री से मुआवजा दिलाए जाने की मांग की है। किसान विनोद कुमार, मान सिंह, भूरा, राम नरायन आदि लोगों ने बताया कि गेहूं की फसल तहस-नहस हो गई है। सरसों की फसल को भी काफी नुकसान पहुंचा है। पानी बरसने के बाद हवा चलने से गेहूं की फसल खेत में ही पलट गई है। उत्पादन भी काफी कम होने का खतरा बढ़ गया है। किसानों ने मांग की है कि जिला प्रशासन नुकसान का जायजा ले। पीड़ित किसानों को हुए नुकसान की समीक्षा कर मुआवजा दिलाए।