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प्रदूषण प्रमाण पत्र न होने पर लगेगा 10 हजार जुर्माना
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कन्नौज। बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने के लिए शासन की ओर से कड़े फैसले लिए जा रहे हैं। अब तय हुआ है कि बगैर प्रदूषण प्रमाण पत्र के वाहन मिलने पर भारी भरकम जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा प्रदूषण जांच कराने के लिए वाहन मालिकों को अधिक फीस चुकानी होगी।
वाहन चलाने के लिए रजिस्ट्रेशन, बीमा, डीएल के साथ प्रदूषण प्रमाण पत्र भी अनिवार्य होता है। परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस की चेकिंग के दौरान अधिकांश वाहनों के चालकों के पास वाहन का प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं मिलता था। ऐसे में हल्का जुर्माना लगाकर या हिदायत देकर छोड़ दिया जाता था। इससे यह वाहन अधिक प्रदूषण फैलाने का कारण बनते हैं। इससे शासन ने अब सख्त फैसला लिया है। अगर किसी वाहन का प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं है तो उसके चालक या मालिक पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। उत्तर प्रदेश ऑनलाइन मोटरयान प्रदूषण जांच केंद्र योजना-2020 के तहत निर्धारित फीस में भी इजाफा कर दिया गया है।
पहले पेट्रोल से चलने वाले दो पहिया वाहन की जांच के लिए 30 रुपये शुल्क लिया जाता था। अब इसे बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया गया है। पेट्रोल, सीएनजी, एलपीजी से चलित तिपहिया या चार पहिया वाहन के लिए पहले 40 रुपये शुल्क लिया जाता था, अब इसके बदले में 70 रुपये लिए जाएंगे। वहीं डीजल से चलने वाले वाहनों के लिए 50 रुपये लिए जाते थे। अब 100 रुपये प्रदूषण जांच केंद्र संचालकों द्वारा लिए जाएंगे।
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इस मामले में एआरटीओ संजय कुमार झा ने बताया कि बगैर प्रदूषण प्रमाण पत्र के वाहन मिलता है तो 10 हजार का जुर्माना लगाया जाएगा। जुर्माना करने पर कोर्ट में भी वाहन स्वामी को राहत नहीं मिलती है। इसके अतिरिक्त प्रदूषण जांच का शुल्क भी बढ़ा दिया गया है।
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वाहन चलाने के लिए रजिस्ट्रेशन, बीमा, डीएल के साथ प्रदूषण प्रमाण पत्र भी अनिवार्य होता है। परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस की चेकिंग के दौरान अधिकांश वाहनों के चालकों के पास वाहन का प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं मिलता था। ऐसे में हल्का जुर्माना लगाकर या हिदायत देकर छोड़ दिया जाता था। इससे यह वाहन अधिक प्रदूषण फैलाने का कारण बनते हैं। इससे शासन ने अब सख्त फैसला लिया है। अगर किसी वाहन का प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं है तो उसके चालक या मालिक पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। उत्तर प्रदेश ऑनलाइन मोटरयान प्रदूषण जांच केंद्र योजना-2020 के तहत निर्धारित फीस में भी इजाफा कर दिया गया है।
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पहले पेट्रोल से चलने वाले दो पहिया वाहन की जांच के लिए 30 रुपये शुल्क लिया जाता था। अब इसे बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया गया है। पेट्रोल, सीएनजी, एलपीजी से चलित तिपहिया या चार पहिया वाहन के लिए पहले 40 रुपये शुल्क लिया जाता था, अब इसके बदले में 70 रुपये लिए जाएंगे। वहीं डीजल से चलने वाले वाहनों के लिए 50 रुपये लिए जाते थे। अब 100 रुपये प्रदूषण जांच केंद्र संचालकों द्वारा लिए जाएंगे।
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इस मामले में एआरटीओ संजय कुमार झा ने बताया कि बगैर प्रदूषण प्रमाण पत्र के वाहन मिलता है तो 10 हजार का जुर्माना लगाया जाएगा। जुर्माना करने पर कोर्ट में भी वाहन स्वामी को राहत नहीं मिलती है। इसके अतिरिक्त प्रदूषण जांच का शुल्क भी बढ़ा दिया गया है।