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मेडिकल कालेज में तड़प रहे हैं मरीज
अमर उजाला कन्नाैैज
Updated Thu, 30 Apr 2015 12:03 AM IST
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के डीम प्रोजेक्ट के रूप में स्थापित राजकीय मेडिकल कालेज की व्यवस्थाएं चरमरा गई हैँ। चिकित्सकों की कमी की वजह से यहां आने वाले मरीजों को घंटों तड़पना पड़ता है। स्थिति यह है कि इमरजेंसी में आने वाले ज्यादातर मरीजों को मरहम पट्टी के बाद रेफर कर दिया जाता है। ट्रांसफर पर आने वाले चिकित्सक ज्वाइन करने के बाद से ही गायब हैं।
राजकीय मेडिकल कालेज की फैकल्टी में 75 प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व लेक्चरर कार्यरत हैं। जो टीचिंग के अलावा गंभीर मरीजों का भी उपचार करते हैं। इसके अलावा इमरजेंसी व ओपीडी व जनरल वार्ड की सेवाओं के लिए 25 सीनियर रेजीडेंट चिकित्सक व 60 जूनियर रेजीडेंट चिकित्सक तैनात हैं। मेडिकल कालेज में कार्यरत सभी चिकित्सकों को आवास भी आवंटित हैं।
इसके बावजूद भी इन आवासों में जूनियर चिकित्सकों के अलावा रात्रि में कोई नहीं रुकता। कई सीनियर चिकित्सक तो ऐसे हैं, जो माह में एक या दो बार ही आते हैं। मंगलवार दोपहर कालेज की ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ी। मरीज कराह रहे थे, लेकिन ओपीडी के ज्यादातर कक्ष बंद थे।
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ओपीडी कक्ष में मेडिसिन के डा.राकेश चंद्र, डा.हरीश गुप्ता, डा.मनीष गुप्ता, सर्जरी कक्ष में डा.निखिल सिंह, डा.सोनल सचदेवा, अस्थि रोग कक्ष में डा.संजय यादव, गाइनी कक्ष में डा.अंशू मिश्रा, डा.अमृता शाह, ईएनटी में डा.मोनिका सचान, बाल रोग कक्ष में डा.एसजी मिश्रा, नेत्र रोग कक्ष में डा.संजीव रोहतिगी, दंत रोग में डा.नीरज अग्रवाल, डा.राजीव पाठक, डा.गौरव शर्मा, कैंसर कक्ष में डा.आर सिंह, त्वचा रोग में डा.रतन सिंह, मनोरोग में डा.विपुल सिंह, टीवी व चेस्ट कक्ष में डा.संजय वर्मा की डयूटी थी।
लेकिन हकीकत यह थी कि अधिकांश डाक्टरों के केबिन खाली पड़े थे। त्वचा रोग कक्ष में न तो डाक्टर थे और न ही कोई स्टाफ। इसी तरह मनोरोग कक्ष, टीवी व चेस्ट रोग कक्ष खाली पड़ा मिला। मेडिसिन कक्ष व अस्थि रोग कक्ष में डाक्टर मौजूद मिले।
अटेंडेंस लगाने में भी डाक्टर करते खेल
मेडिकल कालेज में ड्यूटी में भी खेल हो रहा है। सूत्रों की मानें तो डाक्टर ड्यूटी से पूर्व प्राचार्य कक्ष में पहुंचकर अपना हस्ताक्षर करते हैं और फिर ओपीडी व अन्य वार्डो में पहुंचकर ड्यूटी संभालते हैं। लेकिन ज्यादातर डाक्टर एक दिन में ही सप्ताहभर की हाजिरी लगा देते हैं। डयूटी रजिस्टर प्राचार्य कक्ष में रखा रहता है।
इसकी जिम्मेदारी एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पर है। कभी-कभार तो एक ही डाक्टर कई डाक्टरों के अटेडेंस लगा जाता है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सबकुछ देखता है पर कुछ कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। पिछले दिनों मुख्यमंत्री की प्रमुख सचिव अनीता सिंह मेडिकल कालेज आई थी।
वरिष्ठ डाक्टरों के न आने की शिकायत पर उन्होंने जिलाधिकारी को निर्देश दिया था कि वह खुद कभी-कभार मेडिकल कालेज आकर डाक्टरों की हाजिरी की चेकिंग करें, पर आज तक चेकिंग नहीं हुई। इस मामले में मेडिकल कालेज के प्रभारी सीएमएस डा.दिलीप सिंह का कहना है कि कर्मचारियों की अटेडेंस तो उनके कार्यालय में लगती है पर पूर्व प्राचार्य के आदेश से डाक्टरों की अटेडेंस प्राचार्य कक्ष में होती है। इस पर उनका कोई जोर नहीं है।
विशेष सचिव को जब बैरंग वापस होना पड़ा
राजकीय मेडिकल कालेज का सूरतेहाल जानने के लिए मंगलवार की दोपहर तीन बजे के करीब प्रदेश के संस्थागत वित्त के महानिदेशक व विशेष सचिव शिव सिंह यादव का काफिला मेडिकल कालेज पहुंचा। उनके काफिले में सीडीओ उदयराज यादव, जिला विकास अधिकारी एके वैश्य, एसडीएम तिर्वा महेश चंद्र शर्मा सहित कई अधिकारी थे।
काफिला प्राचार्य कक्ष में पहुंचा पर वहां कोई मौजूद नहीं मिला। एसडीएम ने प्रभारी प्राचार्य डा.आईए अंसारी के मोबाइल पर भी संपर्क साधा। घंटी बजती रही, काल रिसीव नहीं हुई। इस पर काफिला वापस लौट आया। बाद में विशेष सचिव ने मीडिया को बताया कि मामले की पूरी जानकारी मुख्यमंत्री को दी जाएगी।
ट्रांसफर पर आए और गायब हो गए
राजकीय मेडिकल कालेज में कई चिकित्सक कानपुर मेडिकल कालेज से भेजे गए। इसी तरह आगरा मेडिकल कालेज से दो व मेरठ मेडिकल कालेज से एक विशेषज्ञ चिकित्सक का तबादला राजकीय मेडिकल कालेज कन्नौज किया गया। लेकिन सभी गायब हैं। मेडिकल कालेज के सर्जन डा. आईए अंसारी प्रभारी प्राचार्य के रूप में कार्य देख रहे हैं।
उनका कहना है कि कानपुर से आए चारों चिकित्सक गायब हैं। जबकि आगरा व मेरठ से आने वाले चिकित्सकों के अटैचमेंट निरस्त कर दिए गए। चारों चिकित्सकों के बिना किसी सूचना के गायब होने के संबंध में प्रदेश के डीजीएमई को बता दिया गया है।
प्राचार्य की तैनाती न होने से डाक्टर व कर्मचारी निरंकुश
राजकीय मेडिकल कालेज में पिछले दो माह से स्थाई प्राचार्य की नियुक्ति न होने के कारण स्थिति गंभीर होने लगी है। मेडिकल कालेज के पूर्व प्राचार्य डा.वीएन त्रिपाठी को प्रदेश शासन ने चिकित्सा शिक्षा का महानिदेशक बना दिया। तब से से प्राचार्य का पद रिक्त चल रहा है। कार्यवाहक प्राचार्य के रूप में ईएनटी के विभागाध्यक्ष डा. संदीप कौशिक को चार्ज दिया गया था।
मार्च में एमसीआई के निरीक्षण को देखते हुए कानपुर मेडिकल कालेज की डा. किरन पांडेय को कार्यवाहक प्रधानाचार्य का चार्ज सौंपा गया। डा. किरन पांडेय ने दो दिन यहां आकर एमसीआई का विजिट तो करा दिया पर इसके बाद वह यहां नहीं आई। अब मेडिकल कालेज के सर्जन डा. आईए अंसारी प्रभारी प्राचार्य के रूप में कार्य देख रहे हैं। उनकी व्यवस्तताओं के चलते कर्मचारी व डाक्टर निरंकुश हो रहे हैं।
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राजकीय मेडिकल कालेज की फैकल्टी में 75 प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व लेक्चरर कार्यरत हैं। जो टीचिंग के अलावा गंभीर मरीजों का भी उपचार करते हैं। इसके अलावा इमरजेंसी व ओपीडी व जनरल वार्ड की सेवाओं के लिए 25 सीनियर रेजीडेंट चिकित्सक व 60 जूनियर रेजीडेंट चिकित्सक तैनात हैं। मेडिकल कालेज में कार्यरत सभी चिकित्सकों को आवास भी आवंटित हैं।
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इसके बावजूद भी इन आवासों में जूनियर चिकित्सकों के अलावा रात्रि में कोई नहीं रुकता। कई सीनियर चिकित्सक तो ऐसे हैं, जो माह में एक या दो बार ही आते हैं। मंगलवार दोपहर कालेज की ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ी। मरीज कराह रहे थे, लेकिन ओपीडी के ज्यादातर कक्ष बंद थे।
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ओपीडी कक्ष में मेडिसिन के डा.राकेश चंद्र, डा.हरीश गुप्ता, डा.मनीष गुप्ता, सर्जरी कक्ष में डा.निखिल सिंह, डा.सोनल सचदेवा, अस्थि रोग कक्ष में डा.संजय यादव, गाइनी कक्ष में डा.अंशू मिश्रा, डा.अमृता शाह, ईएनटी में डा.मोनिका सचान, बाल रोग कक्ष में डा.एसजी मिश्रा, नेत्र रोग कक्ष में डा.संजीव रोहतिगी, दंत रोग में डा.नीरज अग्रवाल, डा.राजीव पाठक, डा.गौरव शर्मा, कैंसर कक्ष में डा.आर सिंह, त्वचा रोग में डा.रतन सिंह, मनोरोग में डा.विपुल सिंह, टीवी व चेस्ट कक्ष में डा.संजय वर्मा की डयूटी थी।
लेकिन हकीकत यह थी कि अधिकांश डाक्टरों के केबिन खाली पड़े थे। त्वचा रोग कक्ष में न तो डाक्टर थे और न ही कोई स्टाफ। इसी तरह मनोरोग कक्ष, टीवी व चेस्ट रोग कक्ष खाली पड़ा मिला। मेडिसिन कक्ष व अस्थि रोग कक्ष में डाक्टर मौजूद मिले।
अटेंडेंस लगाने में भी डाक्टर करते खेल
मेडिकल कालेज में ड्यूटी में भी खेल हो रहा है। सूत्रों की मानें तो डाक्टर ड्यूटी से पूर्व प्राचार्य कक्ष में पहुंचकर अपना हस्ताक्षर करते हैं और फिर ओपीडी व अन्य वार्डो में पहुंचकर ड्यूटी संभालते हैं। लेकिन ज्यादातर डाक्टर एक दिन में ही सप्ताहभर की हाजिरी लगा देते हैं। डयूटी रजिस्टर प्राचार्य कक्ष में रखा रहता है।
इसकी जिम्मेदारी एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पर है। कभी-कभार तो एक ही डाक्टर कई डाक्टरों के अटेडेंस लगा जाता है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सबकुछ देखता है पर कुछ कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। पिछले दिनों मुख्यमंत्री की प्रमुख सचिव अनीता सिंह मेडिकल कालेज आई थी।
वरिष्ठ डाक्टरों के न आने की शिकायत पर उन्होंने जिलाधिकारी को निर्देश दिया था कि वह खुद कभी-कभार मेडिकल कालेज आकर डाक्टरों की हाजिरी की चेकिंग करें, पर आज तक चेकिंग नहीं हुई। इस मामले में मेडिकल कालेज के प्रभारी सीएमएस डा.दिलीप सिंह का कहना है कि कर्मचारियों की अटेडेंस तो उनके कार्यालय में लगती है पर पूर्व प्राचार्य के आदेश से डाक्टरों की अटेडेंस प्राचार्य कक्ष में होती है। इस पर उनका कोई जोर नहीं है।
विशेष सचिव को जब बैरंग वापस होना पड़ा
राजकीय मेडिकल कालेज का सूरतेहाल जानने के लिए मंगलवार की दोपहर तीन बजे के करीब प्रदेश के संस्थागत वित्त के महानिदेशक व विशेष सचिव शिव सिंह यादव का काफिला मेडिकल कालेज पहुंचा। उनके काफिले में सीडीओ उदयराज यादव, जिला विकास अधिकारी एके वैश्य, एसडीएम तिर्वा महेश चंद्र शर्मा सहित कई अधिकारी थे।
काफिला प्राचार्य कक्ष में पहुंचा पर वहां कोई मौजूद नहीं मिला। एसडीएम ने प्रभारी प्राचार्य डा.आईए अंसारी के मोबाइल पर भी संपर्क साधा। घंटी बजती रही, काल रिसीव नहीं हुई। इस पर काफिला वापस लौट आया। बाद में विशेष सचिव ने मीडिया को बताया कि मामले की पूरी जानकारी मुख्यमंत्री को दी जाएगी।
ट्रांसफर पर आए और गायब हो गए
राजकीय मेडिकल कालेज में कई चिकित्सक कानपुर मेडिकल कालेज से भेजे गए। इसी तरह आगरा मेडिकल कालेज से दो व मेरठ मेडिकल कालेज से एक विशेषज्ञ चिकित्सक का तबादला राजकीय मेडिकल कालेज कन्नौज किया गया। लेकिन सभी गायब हैं। मेडिकल कालेज के सर्जन डा. आईए अंसारी प्रभारी प्राचार्य के रूप में कार्य देख रहे हैं।
उनका कहना है कि कानपुर से आए चारों चिकित्सक गायब हैं। जबकि आगरा व मेरठ से आने वाले चिकित्सकों के अटैचमेंट निरस्त कर दिए गए। चारों चिकित्सकों के बिना किसी सूचना के गायब होने के संबंध में प्रदेश के डीजीएमई को बता दिया गया है।
प्राचार्य की तैनाती न होने से डाक्टर व कर्मचारी निरंकुश
राजकीय मेडिकल कालेज में पिछले दो माह से स्थाई प्राचार्य की नियुक्ति न होने के कारण स्थिति गंभीर होने लगी है। मेडिकल कालेज के पूर्व प्राचार्य डा.वीएन त्रिपाठी को प्रदेश शासन ने चिकित्सा शिक्षा का महानिदेशक बना दिया। तब से से प्राचार्य का पद रिक्त चल रहा है। कार्यवाहक प्राचार्य के रूप में ईएनटी के विभागाध्यक्ष डा. संदीप कौशिक को चार्ज दिया गया था।
मार्च में एमसीआई के निरीक्षण को देखते हुए कानपुर मेडिकल कालेज की डा. किरन पांडेय को कार्यवाहक प्रधानाचार्य का चार्ज सौंपा गया। डा. किरन पांडेय ने दो दिन यहां आकर एमसीआई का विजिट तो करा दिया पर इसके बाद वह यहां नहीं आई। अब मेडिकल कालेज के सर्जन डा. आईए अंसारी प्रभारी प्राचार्य के रूप में कार्य देख रहे हैं। उनकी व्यवस्तताओं के चलते कर्मचारी व डाक्टर निरंकुश हो रहे हैं।