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Kannauj News: दिवंगत साहित्यकार की स्मृति में पडुकिया पुस्तक का विमोचन
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कन्नौज। दिवंगत साहित्यकार रमेश तिवारी की स्मृति में शहर के सेंट जेवियर्स स्कूल में रविवार को कन्नौजी लोकरंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कन्नौजी भाषा में लिखी गई पुस्तक पडुकिया और अवध ज्योति पत्रिका का विमोचन हुआ। कार्यक्रम में कन्नौजी भाषा के शब्दों का महाकुंभ भी देखने को मिला, जिसका उद्देश्य स्थानीय भाषा के प्रचलन को बढ़ाना है।
पुस्तक पडुकिया को दिवंगत साहित्यकार की पुत्री डॉ. अपूर्वा अवस्थी ने लिखा है। उन्होंने बताया कि उनके पिता रमेश तिवारी ने कन्नौजी भाषा में पुस्तक लिखने की इच्छा व्यक्त की थी। पिता ने ही पुस्तक का शीर्षक पडुकिया सुझाया था, जो कन्नौज में बेटियों के लिए अक्सर इस्तेमाल होने वाला शब्द है। डॉ. अवस्थी ने कहा कि उनके पिता चाहते थे कि कन्नौजी भाषा का प्रचलन बढ़े।
कार्यक्रम में कवियों और साहित्यकारों ने कन्नौजी भाषा को बढ़ावा देने पर जोर दिया। कवि सुशील राकेश, शिव कुशवाहा और गौरव ने विधानसभा में कन्नौजी भाषा का अनुवादन शुरू कराने की मांग की। संग्राम सिंह ने अपने बेटे कृष्णा के साथ आल्हा गायन प्रस्तुत किया, जिसे सुनकर लोगों ने उत्साह से तालियां बजाईं। शिवा अवस्थी ने फाग गाकर सभी को होली की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी राहुल श्रीवास्तव कानपुर जोन, सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी इज्या तिवारी, राम बहादुर मिसिर और अशोक बनर्जी आदि रहे।
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कन्नौजी भाषा के संरक्षण की पहल
यह कार्यक्रम दिवंगत साहित्यकार रमेश तिवारी को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ कन्नौजी भाषा के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। डॉ. अपूर्वा अवस्थी द्वारा लिखित पडुकिया पुस्तक इस भाषा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है। कन्नौजी भाषा के शब्दों का महाकुंभ आयोजित कर स्थानीय बोली को जीवंत रखने का संदेश दिया गया। इस पुस्तक से प्रदेश में अब कन्नौजी भाषा का प्रचलन बढ़ने की उम्मीद है। इस पहल से स्थानीय संस्कृति और साहित्य को भी बढ़ावा मिलेगा।
विधानसभा में अनुवादन की मांग
कार्यक्रम में उपस्थित कवियों और साहित्यकारों ने कन्नौजी भाषा को आधिकारिक मंच पर लाने की मांग की। उन्होंने विधानसभा में कन्नौजी भाषा का अनुवादन शुरू कराने का आग्रह किया। यह मांग कन्नौजी भाषा को उचित सम्मान दिलाने और उसके दायरे को विस्तृत करने के उद्देश्य से की गई है। इस तरह की पहल से स्थानीय भाषाओं को मुख्यधारा में लाने में मदद मिल सकती है।
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पुस्तक पडुकिया को दिवंगत साहित्यकार की पुत्री डॉ. अपूर्वा अवस्थी ने लिखा है। उन्होंने बताया कि उनके पिता रमेश तिवारी ने कन्नौजी भाषा में पुस्तक लिखने की इच्छा व्यक्त की थी। पिता ने ही पुस्तक का शीर्षक पडुकिया सुझाया था, जो कन्नौज में बेटियों के लिए अक्सर इस्तेमाल होने वाला शब्द है। डॉ. अवस्थी ने कहा कि उनके पिता चाहते थे कि कन्नौजी भाषा का प्रचलन बढ़े।
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कार्यक्रम में कवियों और साहित्यकारों ने कन्नौजी भाषा को बढ़ावा देने पर जोर दिया। कवि सुशील राकेश, शिव कुशवाहा और गौरव ने विधानसभा में कन्नौजी भाषा का अनुवादन शुरू कराने की मांग की। संग्राम सिंह ने अपने बेटे कृष्णा के साथ आल्हा गायन प्रस्तुत किया, जिसे सुनकर लोगों ने उत्साह से तालियां बजाईं। शिवा अवस्थी ने फाग गाकर सभी को होली की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी राहुल श्रीवास्तव कानपुर जोन, सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी इज्या तिवारी, राम बहादुर मिसिर और अशोक बनर्जी आदि रहे।
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कन्नौजी भाषा के संरक्षण की पहल
यह कार्यक्रम दिवंगत साहित्यकार रमेश तिवारी को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ कन्नौजी भाषा के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। डॉ. अपूर्वा अवस्थी द्वारा लिखित पडुकिया पुस्तक इस भाषा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है। कन्नौजी भाषा के शब्दों का महाकुंभ आयोजित कर स्थानीय बोली को जीवंत रखने का संदेश दिया गया। इस पुस्तक से प्रदेश में अब कन्नौजी भाषा का प्रचलन बढ़ने की उम्मीद है। इस पहल से स्थानीय संस्कृति और साहित्य को भी बढ़ावा मिलेगा।
विधानसभा में अनुवादन की मांग
कार्यक्रम में उपस्थित कवियों और साहित्यकारों ने कन्नौजी भाषा को आधिकारिक मंच पर लाने की मांग की। उन्होंने विधानसभा में कन्नौजी भाषा का अनुवादन शुरू कराने का आग्रह किया। यह मांग कन्नौजी भाषा को उचित सम्मान दिलाने और उसके दायरे को विस्तृत करने के उद्देश्य से की गई है। इस तरह की पहल से स्थानीय भाषाओं को मुख्यधारा में लाने में मदद मिल सकती है।