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Kannauj News: राष्ट्रीय स्मारक बनेगी पद्मश्री गुलाब बाई की कोठी

Sun, 19 Oct 2025 12:38 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 19 Oct 2025 12:38 AM IST
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Padma Shri Gulab Bai's mansion will become a national monument.
कन्नौज। नदी नारे न जाओ श्याम पैयां परूं...और पान खाए सैयां हमारो...जैसे कालजयी गीतों को रचने वालीं पद्मश्री गुलाब बाई की कोठी को अब राष्ट्रीय स्मारक के रूप में पहचान मिलेगी। भारत सरकार के भारतीय कला एवं न्यास संगठन (इनटेक) और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारी कोठी का भ्रमण कर इसके विकास की रूपरेखा तैयार करेंगे। साथ ही इत्रनगरी की सभी प्राचीन एवं ऐतिहासिक इमारतों को विकसित करने के लिए भी एक सार्थक पहल की जाएगी।
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उत्तर भारत में 400 के अंतराल में नौटंकी विधा की जानी-मानी शख्सियत, निर्विवाद छवि रखने वाली पद्मश्री गुलाब बाई इत्रनगरी का वह सितारा हैं, जो कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में दैदीप्यमान हैं। ठठिया क्षेत्र के बल्लपुरवा गांव में जन्मीं गुलाब बाई ने नौटंकी को शिखर पर पहुंचाया और उनका डंका विदेशों में भी बजने लगा। बल्लपुरवा में वीरान हो चुकी उनकी कोठी को अब नई पहचान मिलेगी। पर्यटन विभाग की नजर अब उनकी कोठी पर पड़ी है, जिसको राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित कर जिले के पर्यटन उद्योग को पंख दिए जाएंगे और आने वाली पीढ़ी गुलाब बाई के बारे में भी जान सकेगी। दीपावली के बाद भारत सरकार के निर्देश पर भारतीय कला एवं न्यास संगठन (इनटेक) और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) बल्लपुरवा का भ्रमण करेगा और इस कोठी को कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित करने की आधारशिला रखी जाएगी।
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दे ग्रेट गुलाब थियेटर ने दिलाई दुनिया में पहचान



पद्मश्री गुलाब बाई ने महज 12 साल में नौटंकी की दुनिया में कदम रखा। कन्नौज गजेटियर लिखने वालीं प्रख्यात इतिहासकार डॉ. सुमन शुक्ला बाजपेयी बतातीं हैं कि उस समय कानपुर के त्रिमोहन की नौटंकी प्रसिद्ध थी और महिलाओं का अभिनय भी पुरुष ही करते थे। मकनपुर के मेला में जब गुलाब बाई अपने पिता के साथ नौटंकी देखने गईं तो उन्होंने महिला का किरदार स्वयं करने की ठान ली और कंपनी ज्वाइन कर ली। गुलाब बाई ने त्रिमोहन की कंपनी को पूरे देश में पहचान दिलाई। बाद में मतभेदों के चलते उन्हाेंने द ग्रेट गुलाब थियेटर कंपनी की स्थापना कर ली। 1990 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. रामास्वामी वेंकटरमण ने उन्हें पद्मश्री सम्मान प्रदान किया।
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सिनेमा के रुपहले पर्दे पर भी छाई गुलाब की खुशबू



पद्मश्री गुलाब बाई की प्रसिद्धि यहां तक थी उनके लिखे गीत कई फिल्मों में हिट हो गए। नदी नारे न जाओ श्याम पैयां परूं...पान खाए सैयां हमारो...दरोगा जी चोरी हो गई...भरतपुर लुट गओ हाय मोरी अम्मा...मोहे पीहर में मत छेड़...पटना शहरिया में अकेले डर लागे...जैसे गीतों ने रुपहले पर्दे पर अपनी छाप छोड़ी। सुल्ताना डाकू, लैला-मजनूं, हरिश्चंद्र-तारामती, सत्यावान-सावित्री जैसे नाटकों पर फिल्में भी बनाईं गईं। गुलाब बाई के जीवन संघर्ष पर अध्ययन करने वाले डॉ. मोहम्मद नकवी जामी बताते हैं कि वह लोक कला नौटंकी की पर्याय थीं। 1996 में उनके निधन के बाद नौटंकी का स्वर्णिम युग समाप्त हो गया।

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अंग्रेज के अपमान से आहत गुलाब ने बेटियों को रखा दूर



गुलाब बाई की तीन बेटियां हैं। एक बार कानपुर के फूलबाग में नौटंकी के दौरान गुलाब बाई फरीदा नाम की लड़की के किरदार में मंच पर पहुंचीं तो अंग्रेस अफसर ने अभद्र टिप्पणी कर दी। गुलाब ने उसे थप्पड़ जड़ दिए। अंग्रेज अफसर ने उनकी नौटंकी पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था।


इसके बाद उन्होंने फैसला किया कि वह अपनी बेटियों को नौटंकी से दूर रखेंगीं। बड़ी बेटी कानपुर, मंझली बेटी मुंबई तो सबसे छोटी बेटी लखनऊ में रहती है।



वर्जन इत्रनगरी की ऐतिहासिक इमारतों को राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए डीएम ने उन्हें नोडल अधिकारी के रूप में नामित किया है। पद्मश्री गुलाब बाई की कोठी का भ्रमण करने के लिए दीपावली के बाद इनटेक व एएसआई की टीम आ रही है।



-डॉ. मोहम्मद मकबूल, जिला पर्यटन अधिकारी
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