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बवाल ने इत्र उद्योग की भी कमर तोड़ी
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Mon, 26 Oct 2015 12:03 AM IST
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शहर में हुए बवाल ने इत्र उद्योग पर भी ब्रेक लगा
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दिया। इससे न सिर्फ सैकड़ों कारोबारी, बल्कि 10 हजार से अधिक श्रमिक और
मजदूर वर्ग भी प्रभावित हुआ। कच्चा माल जहां का तहां पड़ा रहा। वहीं
परफ्यूम बनाकर बाहर विदेशों व देश के कई शहरों में सप्लाई करने वाले भी
परेशान नजर आए, क्योंकि इस माह वे वादे के मुताबिक अपने माल की आपूर्ति
खरीददार तक समय से नहीं पहुंचा सकेंगे।
इससे सरकार को इस माह लाखों रुपये राजस्व कम मिलेगा। शहर में स्थित छोटे-बड़े 300 इत्र कारखानों के गेट पर भी ताले लटकते रहे। इत्र उद्यमी अपने घरों से ही नहीं निकले। कारखानों के दरवाजे बंद करके सुरक्षा के लिए निजी कर्मचारी तैनात कर दिए। फोन के जरिए वे बार-बार कारखाने का हाल पता करते रहे।
वहीं कुछ कारखानों में नाइट ड्यूटी करने वाले मजदूर जहां के तहां ठहर गए। गली और रोड पर निकलने की मनाही होने के कारण वे शुक्रवार से फैक्ट्री के अंदर ही रहने को मजबूर हैं, वहीं कटरी क्षेत्र के गांव डहलेपुर, चिंतामणि, पैंदाबाद, तहसीपुर, जलालपुर कटरी बांगर और कछियापुर आदि गांवों में गुलाब, गेंदा, मेहंदी आदि फूलों की खेती करने वाले किसान भी गांवों से बाहर नहीं निकले।
किसानों की मानें तो बवाल के कारण फूलों की तुड़ाई रोकनी पड़ी है। समय पर फूल न तोड़ने के कारण काफी मात्रा में फूल बर्बाद भी हुआ है। वहीं गांव से आकर इत्र, अगरबत्ती, धूपबत्ती, गुलाबजल आदि बनाने वाले कारखानों में मजदूरी और माल ढुलाई की पल्लेदारी करने वाले भी शहर की तरफ आने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।
आरा मशीनों पर भी न तो सूखी लकड़ी काटी गई और न ही उसे ट्रैक्टर में लादकर इत्र कारखानों तक पहुंचाने का काम हुआ। घरों में अगरबत्ती बनाकर रोजी-रोटी कमाने वाली महिलाएं भी परेशान दिखीं। बताया कि तैयार की गईं अगरबत्तियों के बंडल उद्यमियों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। नई अगरबत्ती बनाने के लिए कच्चा माल भी देने के लिए कारखानों से लोग नहीं आ पा रहे हैं।
इससे सरकार को इस माह लाखों रुपये राजस्व कम मिलेगा। शहर में स्थित छोटे-बड़े 300 इत्र कारखानों के गेट पर भी ताले लटकते रहे। इत्र उद्यमी अपने घरों से ही नहीं निकले। कारखानों के दरवाजे बंद करके सुरक्षा के लिए निजी कर्मचारी तैनात कर दिए। फोन के जरिए वे बार-बार कारखाने का हाल पता करते रहे।
वहीं कुछ कारखानों में नाइट ड्यूटी करने वाले मजदूर जहां के तहां ठहर गए। गली और रोड पर निकलने की मनाही होने के कारण वे शुक्रवार से फैक्ट्री के अंदर ही रहने को मजबूर हैं, वहीं कटरी क्षेत्र के गांव डहलेपुर, चिंतामणि, पैंदाबाद, तहसीपुर, जलालपुर कटरी बांगर और कछियापुर आदि गांवों में गुलाब, गेंदा, मेहंदी आदि फूलों की खेती करने वाले किसान भी गांवों से बाहर नहीं निकले।
किसानों की मानें तो बवाल के कारण फूलों की तुड़ाई रोकनी पड़ी है। समय पर फूल न तोड़ने के कारण काफी मात्रा में फूल बर्बाद भी हुआ है। वहीं गांव से आकर इत्र, अगरबत्ती, धूपबत्ती, गुलाबजल आदि बनाने वाले कारखानों में मजदूरी और माल ढुलाई की पल्लेदारी करने वाले भी शहर की तरफ आने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।
आरा मशीनों पर भी न तो सूखी लकड़ी काटी गई और न ही उसे ट्रैक्टर में लादकर इत्र कारखानों तक पहुंचाने का काम हुआ। घरों में अगरबत्ती बनाकर रोजी-रोटी कमाने वाली महिलाएं भी परेशान दिखीं। बताया कि तैयार की गईं अगरबत्तियों के बंडल उद्यमियों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। नई अगरबत्ती बनाने के लिए कच्चा माल भी देने के लिए कारखानों से लोग नहीं आ पा रहे हैं।