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सर्वे में लापरवाही, कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन

Wed, 15 Apr 2015 11:40 PM IST
अमर उजाला कन्नाैैज
अमर उजाला कन्नाैैज Updated Wed, 15 Apr 2015 11:40 PM IST
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Negligence in the survey , performed in Collectorate
शासन-प्रशासन को धता बताते हुए लेखपाल फसलों का सर्वे करने में उदासीनता बरत रहे हैं। खेतों में न जाकर लेखपाल प्रधान के घरों में बैठकर असरदार लोगों के नाम लिख रहे हैं। कम रकवा वाले किसानों के सर्वे कार्य में ढिलाई बरती जा रही है। वहीं किसानों के विरोध करने पर उनको पुलिस से भी पकड़वाया जा रहा है। बुधवार को करीब आधा दर्जन ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट में नारेबाजी की। उन्होंने डीएम को संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा।
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जिन किसानों की 33 फीसदी तक फसल में नुकसान हुआ है। उन खेतों का सर्वे कार्य करने के प्रशासन क्षेत्रीय लेखपालों को निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद बराबर लापरवाही बरती जा रही है। हसेरन ब्लाक के राजपुर गांव के किसान संतोष कुमार, गंधर्व सिंह, घनश्याम सिंह, सुरेश चंद्र, संजय, रामबरन सिंह, शिवकुमार, आमोद कुमार, लेखराम, गंगाराम, अनिल कुमार, सत्यकुमार, मान सिंह, अहिबरन, प्रदीप, संदीप यादव, जगराम ने कहा कि लेखपाल विजयपाल ने फसलों का अभी तक सर्वे नहीं किया है।
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प्रधान के कहने पर असरदार लोगों के नाम सूची में लिखे गए हैं। जबकि सारे गांव की फसलें बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं। लेखपाल किसानों से सर्वे के नाम पर पैसे की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा कुछ ग्रामीणों ने बताया कि जब लेखपाल का विरोध किया गया तो चौकी खड़नी पुलिस से पकड़वाकर रात्रि में बंद कराकर सुबह छुड़वा दिया गया। इसके अलावा ब्लाक हसेरन के गांव अमोलर, बरगांवा, सकरानी, कांकरकुई के ग्रामीण शेरपाल, शिवकुमार, रामप्रकाश, सुभाष चंद्र, अवधेश, नंदकिशोर, संदीप कुमार, राजेश ने भी सर्वे कार्य में उदासीनता के आरोप जड़े।
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एडीएम ने लेखपालों को दी चेतावनी
एडीएम रमेश चंद्र यादव ने क्षेत्रीय लेखपालों को चेतावनी दी कि वह सर्वे का कार्य अविलंब पूरा कर रिपोर्ट सौंप दें। अन्यथा की स्थित अब लेखपालों पर कार्रवाई शुरू की जाएगी। कहा कि जिन किसानों से फसल के नाम पर सुविधा शुल्क लिए जाने के मामले प्रकाश में आ रहे हैं। आरोप सिद्ध होने पर उनके खिलाफ कार्रवाई तय है। कहा कि अधिकतर लेखपाल उन किसानों से सुविधा शुल्क ले रहे हैं, जिनके खेतों में गेहूं, चना, सरसों के अलावा दूसरी फसलें खड़ी थी। किसानों से भी अपील की कि वह किसी भी किसान को सुविधा शुल्क न दें।


भूमिधर खेत मालिक मानवता अपनाएं
एडीएम रमेश चंद्र यादव ने कहा कि कन्नौज की तीनों तहसीलों में बड़े पैमाने पर लोग भूमिधर खेती का कार्य करते हैं। भूमिधर खेती करने वालों की संख्या हजारों में है। फसलों के मुआवजे की बनने वाली चेक खेत मालिक के नाम ही काटी जाएगी। ऐसे में फसल करने वाले किसान को फसल का कोई भी मुआवजा नहीं मिल सकेगा। ऐसे भूमिधर मालिकों से प्रशासन ने अपील की कि ऐसी विपरीत परिस्थिति में भूमिधर मालिक मानवता अपनाएं। कहा कि यदि उन भू स्वामियों को लगता है कि मुआवजे का पहला हक फसल उगाने वाले का है तो उसके हक को न मारें।
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