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मेडिकल कालेज में फेफड़ों की बीमारी का भी नहीं मिला इलाज

Wed, 18 Mar 2020 12:33 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 18 Mar 2020 12:33 AM IST
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medikal kaalej mein phephadon kee beemaaree ka bhee nahin mila ilaaj
माया देवी के परिजनों से पूछताछ करती स्वास्थ्य विभाग की टीम। - फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। मेडिकल कालेज रेफर सेंटर बन गया है। करोड़ों से बने मेडिकल कालेज में फेफड़ों के संक्रमण का भी इलाज संभव नहीं है। मरीज की हालत गंभीर देखकर रेफर कर दिया जाता है। मिढ़ईपुरवा गांव की माया देवी के साथ भी कुछ ऐसा हुआ। माया देवी को यहां इलाज की जगह रेफर स्लिप पकड़ाकर कानपुर हैलट भेज दिया गया। यहां भी कुछ घंटे इलाज के बाद लखनऊ मेडिकल कालेज ले जाने की सलाह दी गई। परिजन आखिर में घर ले आए। यहां सुबह करीब चार बजे माया देवी की मौत हो गई। माया देवी ही वह महिला थीं जिन्हें कोरोना की आशंका पर एंबुलेंस लेने नहीं गई थी।
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इंदरगढ़ के मिढ़ईपुरवा गांव की 55 वर्षीय माया देवी पत्नी श्याम बिहारी को फेफड़ों की समस्या और बुखार होने पर रविवार को परिजन मेडिकल कालेज लेकर पहुंचे थे। हालत गंभीर देख मेडिकल कालेज से माया देवी को कानपुर के हैलट अस्पताल रेफर कर दिया गया था। यहां मेडिसिन विभाग के डॉ. बृजेश कुमार की देखरेख में इलाज शुरू किया गया। सोमवार शाम को हालत में सुधार न होने पर माया देवी को लखनऊ मेडिकल कालेज रेफर किया गया। परिजन लखनऊ ले जाने की जगह घर लेकर आ गए। मंगलवार तड़के करीब चार बजे मौत हो गई।
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माया देवी की मौत के बाद कन्नौज सीएचसी प्रभारी डॉ. बृजेश कुमार शुक्ला और डॉ. आतिफ हसन की टीम महिला के गांव मिढ़ईपुरवा पहुंची। पति और बेटों से बातचीत और मेडिकल कालेज में इलाज की जानकारी के बाद टीम ने अपनी रिपोर्ट सीएमओ डॉ. कृष्ण स्वरूप को सौंप दी।
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सीएमओ ने बताया कि महिला छह-सात साल से फेफड़ों के संक्रमण से जूझ रही थी। फेफड़ों की पुरानी बीमारी (सेप्टीसीमिया) हो गई थी। इसी से मौत हुई। ऐसे में जिले की चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़ा होना लाजिमी है। जो अस्पताल मरीजों को इलाज देने के लिए खोले गए, वह सिर्फ रेफर सेंटर क्यों बनकर रह गए हैं।
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