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नौकरी के आश्वासन पर माने महेश के परिजन
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Sat, 24 Oct 2015 12:30 AM IST
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महेश का शव पोस्टमार्टम होने के बाद कई घंटे तक जिला अस्पताल में ही रखा
रहा। करीब दो घंटे तक चली मानमनौवल के दौरान जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने
मृतक की पत्नी को नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया, तब कहीं जाकर परिजनों ने
शव को घर ले जाने की जिद छोड़ी।
बाद में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच महादेवी गंगा घाट पर मृतक का अंतिम संस्कार किया गया। शुक्रवार की सुबह महेश कुशवाहा के परिजन और रिश्तेदार शव को मकरंदनगर स्थित घर पर ले जाने की तैयारी करने लगे। वहीं पुलिस ने शव को घर ले जाने से रोक दिया। इस पर तनातनी पैदा हो गई।
सूचना पाकर डीएम, एसपी, एडीएम, एएसपी खुद पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और मृतक के पिता, भाई व अन्य परिजनों से वार्ता की। सपा नेता दिवारी लाल कुशवाहा, अवधेश कुशवाहा, सभासद कोतवाल गिहार, बलवंत कुशवाहा आदि ने परिजनों से अलग-अलग वार्ता कर उन्हें शांत कराया और कहा कि यदि शव मकरंदनगर स्थित घर पर गया तो वहां शरारती तत्व उपद्रव कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में बवाल बढ़ जाएगा।
इस पर मृतक के पिता महावीर, भाई रमेश कुशवाहा व रिश्तेदारों ने महेश की पत्नी व छोटे-छोटे बच्चों के भरण पोषण के लिए नौकरी की मांग की। इस पर तत्काल प्रार्थनापत्र लिखवाकर मृतक की पत्नी रिंकू के दस्तखत कराए गए। प्रार्थनापत्र को जिलाधिकारी ने अपने पास रखा और सार्वजनिक रूप से महेश की पत्नी को नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया।
भरोसा दिलाया कि यदि महेश के नाम जमीन है तो उसे किसान दुर्घटना बीमा योजना के तहत भी पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद दिलाई जाएगी। उधर, पोस्टमार्टम हाउस के अंदर मृतक की पत्नी रिंकी, मां व अन्य परिवार की महिलाएं दहाड़े मार मारकर रो रही थीं। छोटे-छोटे बच्चे भी बेहाल थे।
यह चीखपुकार और करुण क्रंदन देखकर सुरक्षा एवं पीड़िता को समझाने के लिए तैनात दो महिला सिपाही भी रो पड़ीं। काफी देर तक महिला सिपाहियों की आंखों से आंसुओं की धार बहती रही।
बाद में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच महादेवी गंगा घाट पर मृतक का अंतिम संस्कार किया गया। शुक्रवार की सुबह महेश कुशवाहा के परिजन और रिश्तेदार शव को मकरंदनगर स्थित घर पर ले जाने की तैयारी करने लगे। वहीं पुलिस ने शव को घर ले जाने से रोक दिया। इस पर तनातनी पैदा हो गई।
सूचना पाकर डीएम, एसपी, एडीएम, एएसपी खुद पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और मृतक के पिता, भाई व अन्य परिजनों से वार्ता की। सपा नेता दिवारी लाल कुशवाहा, अवधेश कुशवाहा, सभासद कोतवाल गिहार, बलवंत कुशवाहा आदि ने परिजनों से अलग-अलग वार्ता कर उन्हें शांत कराया और कहा कि यदि शव मकरंदनगर स्थित घर पर गया तो वहां शरारती तत्व उपद्रव कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में बवाल बढ़ जाएगा।
इस पर मृतक के पिता महावीर, भाई रमेश कुशवाहा व रिश्तेदारों ने महेश की पत्नी व छोटे-छोटे बच्चों के भरण पोषण के लिए नौकरी की मांग की। इस पर तत्काल प्रार्थनापत्र लिखवाकर मृतक की पत्नी रिंकू के दस्तखत कराए गए। प्रार्थनापत्र को जिलाधिकारी ने अपने पास रखा और सार्वजनिक रूप से महेश की पत्नी को नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया।
भरोसा दिलाया कि यदि महेश के नाम जमीन है तो उसे किसान दुर्घटना बीमा योजना के तहत भी पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद दिलाई जाएगी। उधर, पोस्टमार्टम हाउस के अंदर मृतक की पत्नी रिंकी, मां व अन्य परिवार की महिलाएं दहाड़े मार मारकर रो रही थीं। छोटे-छोटे बच्चे भी बेहाल थे।
यह चीखपुकार और करुण क्रंदन देखकर सुरक्षा एवं पीड़िता को समझाने के लिए तैनात दो महिला सिपाही भी रो पड़ीं। काफी देर तक महिला सिपाहियों की आंखों से आंसुओं की धार बहती रही।