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मानपुर उपकेंद्र की जर्जर मशीनों से अन्नदाता परेशान
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मानपुर उपकेंद्र पर बांस की लाठी से जर्जर मशीन बंद करता आपरेटर।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। मानपुर बिजली उपकेंद्र की जर्जर इनकमिंग और आउटगोइंग मशीनें अन्नदाताओं के लिए मुसीबत बनी हुई हैं। निजी नलकूपों को 10 घंटे बिजली देने के आदेश के बावजूद छह घंटे भी सप्लाई नहीं मिल पा रही है। पुराने तार भी बिजली आपूर्ति में बाधा हैं। इससे फसलों को समय पर पानी नहीं मिल पाता है।
अन्नदाता मानपुर बिजली उपकेंद्र की जर्जर मशीनों से परेशान हैं। यहां 15 वर्ष पुरानी कम क्षमता की मशीनों पर अधिक लोड रखा जा रहा है। इससे मशीनें गड़बड़ हो चुकी हैं। यह अक्सर खराब रहती हैं। इन मशीनों के स्विच खराब हो चुके हैं। इन्हें बांस की लाठी के सहारे बंद करना पड़ता है। अधिकारियों के निरीक्षण में इस समस्या को रखे जाने के बाद भी निराकरण नहीं हो सका है। कर्मचारी अपनी नौकरी सुरक्षित रखने के लिए अधिकारियों से ज्यादा नहीं कह पाते हैं। मशीनें खराब होने पर मरम्मत में पूरा दिन बीत जाता है। इससे दस की जगह निजी नलकूपों को छह घंटे भी आपूर्ति नहीं मिल पाती है। कभी-कभी पूरे दिन आपूर्ति गुल रहती है। इनकमिंग और आउटगोइंग मशीनों के खराब होने पर एक मशीन पर दो-दो फीडरों का लोड रख दिया जाता है। एक फीडर में फाल्ट होने पर दोनों बंद हो जाते हैं। इससे फसलों की सिंचाई पर संकट गहरा जाता है।
वहीं अधिशासी अभियंता शादाब अहमद का कहना है कि मानपुर उपकेंद्र की खराब मशीनों की मरम्मत कराई जाएगी। मरम्मत न हो पाने वाली मशीनों की जगह दूसरी रखवाई जाएंगी।
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तार टूटने पर भी बंद नहीं होतीं मशीनें
मानपुर उपकेंद्र की मशीनों (इनकमिंग और आउटगोइंग )का आलम यह है कि तार टूट कर जमीन पर गिरने पर भी यह बंद नहीं होती हैं। इस दौरान किसी के तारों की चपेट में आने से जान चली जाती है।
चालीस साल पुरानी लाइन से हो रही आपूर्ति
मानपुर उपकेंद्र से चालीस वर्ष पुरानी लाइन से आपूर्ति हो रही है। इससे लाइन अक्सर टूट जाती है। रात में तार टूटने पर सप्लाई बंद रहती है। सुबह होने पर कर्मचारी जोड़ते हैं। तब तक दिन का आधा समय बीत जाता है।
80 गांवों के 495 निजी नलकूप हैं इस उपकेंद्र के सहारे
मानपुर उपकेंद्र से 80 गांवों के उपभोक्ता जुड़े हैं। 595 निजी नलकूपों को यहीं से सप्लाई दी जाती है। मशीनों में फाल्ट से सभी निजी नलकूप बंद हो जाते हैं। जब तक मशीन की मरम्मत नहीं हो जाती, नलकूप बंद रहते हैं।
आठ फीडरों में बंटा है मानपुर उपकेंद्र
मानपुर उपकेंद्र को आठ फीडरों में बांट कर बिजली की सप्लाई दी जाती है। इनमें कोल्ड स्टोरेज, मलिकापुर, मलिकापुर नलकूप, उदैतापुर, कलक्ट्रेट, नजरापुर, नजरापुर नलकूप व गणेश फीडर हैं।
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अन्नदाता मानपुर बिजली उपकेंद्र की जर्जर मशीनों से परेशान हैं। यहां 15 वर्ष पुरानी कम क्षमता की मशीनों पर अधिक लोड रखा जा रहा है। इससे मशीनें गड़बड़ हो चुकी हैं। यह अक्सर खराब रहती हैं। इन मशीनों के स्विच खराब हो चुके हैं। इन्हें बांस की लाठी के सहारे बंद करना पड़ता है। अधिकारियों के निरीक्षण में इस समस्या को रखे जाने के बाद भी निराकरण नहीं हो सका है। कर्मचारी अपनी नौकरी सुरक्षित रखने के लिए अधिकारियों से ज्यादा नहीं कह पाते हैं। मशीनें खराब होने पर मरम्मत में पूरा दिन बीत जाता है। इससे दस की जगह निजी नलकूपों को छह घंटे भी आपूर्ति नहीं मिल पाती है। कभी-कभी पूरे दिन आपूर्ति गुल रहती है। इनकमिंग और आउटगोइंग मशीनों के खराब होने पर एक मशीन पर दो-दो फीडरों का लोड रख दिया जाता है। एक फीडर में फाल्ट होने पर दोनों बंद हो जाते हैं। इससे फसलों की सिंचाई पर संकट गहरा जाता है।
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वहीं अधिशासी अभियंता शादाब अहमद का कहना है कि मानपुर उपकेंद्र की खराब मशीनों की मरम्मत कराई जाएगी। मरम्मत न हो पाने वाली मशीनों की जगह दूसरी रखवाई जाएंगी।
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तार टूटने पर भी बंद नहीं होतीं मशीनें
मानपुर उपकेंद्र की मशीनों (इनकमिंग और आउटगोइंग )का आलम यह है कि तार टूट कर जमीन पर गिरने पर भी यह बंद नहीं होती हैं। इस दौरान किसी के तारों की चपेट में आने से जान चली जाती है।
चालीस साल पुरानी लाइन से हो रही आपूर्ति
मानपुर उपकेंद्र से चालीस वर्ष पुरानी लाइन से आपूर्ति हो रही है। इससे लाइन अक्सर टूट जाती है। रात में तार टूटने पर सप्लाई बंद रहती है। सुबह होने पर कर्मचारी जोड़ते हैं। तब तक दिन का आधा समय बीत जाता है।
80 गांवों के 495 निजी नलकूप हैं इस उपकेंद्र के सहारे
मानपुर उपकेंद्र से 80 गांवों के उपभोक्ता जुड़े हैं। 595 निजी नलकूपों को यहीं से सप्लाई दी जाती है। मशीनों में फाल्ट से सभी निजी नलकूप बंद हो जाते हैं। जब तक मशीन की मरम्मत नहीं हो जाती, नलकूप बंद रहते हैं।
आठ फीडरों में बंटा है मानपुर उपकेंद्र
मानपुर उपकेंद्र को आठ फीडरों में बांट कर बिजली की सप्लाई दी जाती है। इनमें कोल्ड स्टोरेज, मलिकापुर, मलिकापुर नलकूप, उदैतापुर, कलक्ट्रेट, नजरापुर, नजरापुर नलकूप व गणेश फीडर हैं।