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बाल विवाह के खिलाफ छेड़ी मुहिम

Wed, 14 Oct 2015 11:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो कन्नौज।
अमर उजाला ब्यूरो कन्नौज। Updated Wed, 14 Oct 2015 11:49 PM IST
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Launched a campaign against child marriage

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कन्नौज। वह जब 15 साल की थीं तो उनकी शादी कर दी गई। इसके बाद जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। भागमभाग जिंदगी और प्रतिस्पर्धा के इस दौर में कड़ी मेहनत कर खड़े होने के लिए भीड़ में जगह भी खुद बनाई। अब वह बाल विवाह के खिलाफ आंदोलन कर रही हैं। कक्षा आठ के बाद आगे की शिक्षा के लिए भी वह लड़कियों का संभव सहयोग करती हैं।

पूर्व माध्यमिक स्कूल गूरा में तैनात सहायक अध्यापिका रेखा भंतू कानपुर की रहने वाली हैं। उन्होंने बताया कि उनकी शादी कम उम्र में हुई थी, इसलिए वह सभी परेशानियों को समझती हैं। जहां भी उनको जानकारी मिलती है कि अमुक लड़की की शादी निर्धारित 18 साल से कम उम्र में हो रही है तो वह उसके घर पहुंच जाती हैं। अभिभावकों को समझाने के बाद लड़की से भी बात करती हैं। रेखा ने बताया कि उनको याद है गांव की एक लड़की संतोषी उनके यहां पढ़ी थी। कक्षा आठ पास करने के बाद उसके मां-बाप ने संतोषी की शादी तय कर दी।
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जब उनको यह पता चला तो वह संतोषी के घर पहुंचीं। काफी प्रयास किया तो सफलता भी मिली। शादी टाल दी गई। जब लड़की की उम्र पूरी हुई तो शादी हुई। पहली सफलता मिलने के बाद रेखा काफी खुश हुईं। उन्होंने बताया कि भेदभाव व गरीबी की वजह से कई अभिभावक अपने बच्चों खासतौर से लड़कियों को शिक्षित करना नहीं चाहते हैं। ऐसा ही मामला उनके गांव की रोहिणी के साथ हुआ। गूरा स्कूल से कक्षा आठ पास करने के बाद रोहिणी के परिवार ने आगे पढ़ाने को मुनासिब नहीं समझा।
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 पता चलने पर उन्होंने रोहिणी के परिजनों से संपर्क ही नहीं साधा घर भी पहुंच गईं। बाद में गदनापुर स्थित एक इंटर कॉलेज में प्रिंसिपल से बात करके कक्षा नौ में उसका प्रवेश कराया। रेखा ने बताया कि बाद में वहां के प्रिंसिपल ने फीस भी माफ कर दी। इतना ही नहीं वह लड़कियों को यह भी समझाती हैं कि रिश्तेदारों व परिवार के कई निकटतम लोगों से भी सावधान रहें। अपना अच्छा-बुरा का आंकलन करें। इस काम में वह अभिभावकों का सहयोग भी चाहती हैं। रेखा का कहना है कि उनको अपने मिशन में सौ फीसदी सफलता तो नहीं मिली, लेकिन जब भी समय मिलता है समाजसेवा में लगाते हैं। 
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