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किसानों का हक मार बीमा कंपनियों ने भर ली झोली

Fri, 21 Feb 2020 12:30 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 21 Feb 2020 12:30 AM IST
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kisaanon ka hak maar beema kampaniyon ne bhar lee jholee
जनवरी में भीषण ठंड से आलू की प्रभावित फसल दिखाता किसान। - फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। फसल को नुकसान होने पर मुआवजे का सब्ज बाग दिखाकर बीमा कंपनियों ने अपनी झोली भर ली। किसानों के हाथ खाली रहे। फरवरी 2016 से अमल में आई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अभी तक रिलायंस और इफ्को टोकियो जनरल इंश्योरेंस जैसी कंपनियों ने 2.48 लाख किसानों का बीमा कर 66 करोड़ से ज्यादा वसूले। देने की बारी आई तो मदद करीब 35 हजार किसानों तक ही सिमट कर रह गई। किसानों के साथ ऐसा छलावा कर बीमा कंपनियां मालामाल हो गईं। अब कैबिनेट की बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने फसल बीमा की व्यवस्था वैकल्पिक की है तो उम्मीद है कि बीमा कंपनियों पर लगाम लगेगी और किसानों को वाजिब हक मिलेगा।
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कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक खरीफ से ज्यादा रबी सीजन बीमा कंपनियों को रास आया। फरवरी 2016 से 2019 तक खरीफ की तुलना में रबी सीजन में 40 हजार से ज्यादा किसानों ने फसल बीमा कराया। बीमा कंपनियों को प्रीमियम के तौर पर करीब 34 करोड़ रुपये अदा किए गए। देने की बारी आई तो खरीफ में बीमित किसानों को 6.24 करोड़ का मुआवजा दिया गया। रबी में मुआवजे की धनराशि करीब 10 करोड़ पर सिमट गई।
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इस वर्ष दिसंबर के अंत और जनवरी माह में हुई रिकार्ड बारिश और भीषण ठंड के कारण आलू की फसल को झुलसा रोग लग गया। 36532 किसानों ने फसल का बीमा करा रखा है। अभी तक सर्वे का काम शुरू नहीं हो सका है। क्रॉप कटिंग के आधार रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद बीमा कंपनी को जानकारी दी जानी है। तब मुआवजे का निर्धारण किया जाएगा।
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डीएम की फटकार के बाद बांटे 3.31 करोड़ रुपये
वर्ष 2018 में खरीफ सीजन में किसानों को बड़ा झटका लगा था। धान, मक्का और तिल की फसल बर्बाद होने पर 45219 बीमित किसानों में से 8305 ने मुआवजे के लिए दावा किया था। बीमा कंपनी मुआवजे के नाम पर इन्हें टहला रही थीं। मामला जिलाधिकारी रवींद्र कुमार के पास पहुंचा तो उन्होंने बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों को बुलाकर मुकदमा दर्ज कराने की चेतावनी दी। तब मुआवजा वितरण की शुरुआत हुई। इसके बाद बीमा कंपनी ने 3,31,49,757 रुपये मुआवजे के तौर पर बांटे।
ये हैं खरीफ और रबी की अधिसूचित फसलें
रबी में आलू, गेहूं और सरसों वहीं खरीफ में धान, मक्का और तिल जिले में अधिसूचित फसलें हैं। किसान अधिसूचित फसलों के अलावा किसी अन्य का बीमा कराते हैं तो प्रीमियम देने के बाद भी बीमा कंपनी मुआवजा देने की हकदार नहीं होती हैं। इससे अधिसूचित फसलों को ध्यान में रख बीमा कराएं।

फसल बीमा कराने का ये है समय
खरीफ सीजन की फसलों का बीमा एक अप्रैल से 31 जुलाई और रबी सीजन की फसलों का बीमा एक अक्तूबर से 31 दिसंबर के मध्य कराया जा सकता है। प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद एक अप्रैल 2020 से किसान खरीफ सीजन के लिए फसल बीमा की वैकल्पिक व्यवस्था का लाभ ले सकेंगे। कैश क्राप के लिए बीमित धनराशि का पांच फीसदी व अन्य फसलों पर डेढ़ फीसदी प्रीमियम देना होगा।
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