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मुआवजा के लिए कर्मी के परिजनों का हंगामा
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kannauj news
- फोटो : CHIBRAMAU
सौरिख। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर कार्यदायी संस्था एनसीसी कंपनी में तैनात कर्मी की मौत के बाद मुआवजा के लिए परिजनों ने ग्रामीणों के साथ हंगामा किया। इस दौरान ग्रामीणों की एनसीसी कर्मियों से तीखी झड़प भी हुई।
थाना क्षेत्र के सिकंदरपुर गांव निवासी शेर सिंह कई वर्षों से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के कार्यदायी संस्था एनसीसी में स्वीपर पद पर तैनात था। 17 फरवरी की रात को डंपर पंचर की सूचना पर किलोमीटर 121 पर कर्मियों के साथ पहुंचा था और बचाव कार्य कर रहा था। तभी आगरा की तरफ से आई तेज रफ्तार बस ने डंपर में टक्कर मार दी थी, जिससे डंपर चालक वीरेंद्र सिंह व शेर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया था। घायलों को मिनी पीजीआई सैफई में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई थी। सोमवार को मृतक की पत्नी नीलम देवी अपने दो छोटे बच्चों व जेठ तहसीलदार एवं पचास ग्रामीणों के साथ कार्यालय पहुंच गई और पांच लाख रुपये मुआवजा की मांग करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। इस बीच ड्यूटी पर तैनात एनसीसी कर्मियों से कई बार झड़प भी हुई।
स्थिति को बिगड़ता देख यूपीडा सहायक सुरक्षा अधिकारी नामवर सिंह को भी बुलाया गया। उन्होंने कंपनी के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर संजय मिश्रा को मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च अधिकारियों से वार्ता करने के निर्देश दिए। डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि कंपनी की ओर से मृतक की पत्नी को ढाई लाख रुपये की धनराशि व मृतक को दिया जाने वाला प्रति माह का वेतन उसके खाते में देने के साथ ही बड़े भाई को नौकरी देने की बात कही गई है। जबकि पीड़ित परिवार पांच लाख मुआवजे की मांग को लेकर कार्यालय के बाहर ग्रामीणों के साथ लगभग चार घंटे तक बैठा रहा। डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर ने ग्रामीणों को समझाते हुए यह कहकर घर भेज दिया कि कंपनी के उच्च अधिकारियों से बात कर अवगत कराया जाएगा।
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थाना क्षेत्र के सिकंदरपुर गांव निवासी शेर सिंह कई वर्षों से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के कार्यदायी संस्था एनसीसी में स्वीपर पद पर तैनात था। 17 फरवरी की रात को डंपर पंचर की सूचना पर किलोमीटर 121 पर कर्मियों के साथ पहुंचा था और बचाव कार्य कर रहा था। तभी आगरा की तरफ से आई तेज रफ्तार बस ने डंपर में टक्कर मार दी थी, जिससे डंपर चालक वीरेंद्र सिंह व शेर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया था। घायलों को मिनी पीजीआई सैफई में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई थी। सोमवार को मृतक की पत्नी नीलम देवी अपने दो छोटे बच्चों व जेठ तहसीलदार एवं पचास ग्रामीणों के साथ कार्यालय पहुंच गई और पांच लाख रुपये मुआवजा की मांग करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। इस बीच ड्यूटी पर तैनात एनसीसी कर्मियों से कई बार झड़प भी हुई।
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स्थिति को बिगड़ता देख यूपीडा सहायक सुरक्षा अधिकारी नामवर सिंह को भी बुलाया गया। उन्होंने कंपनी के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर संजय मिश्रा को मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च अधिकारियों से वार्ता करने के निर्देश दिए। डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि कंपनी की ओर से मृतक की पत्नी को ढाई लाख रुपये की धनराशि व मृतक को दिया जाने वाला प्रति माह का वेतन उसके खाते में देने के साथ ही बड़े भाई को नौकरी देने की बात कही गई है। जबकि पीड़ित परिवार पांच लाख मुआवजे की मांग को लेकर कार्यालय के बाहर ग्रामीणों के साथ लगभग चार घंटे तक बैठा रहा। डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर ने ग्रामीणों को समझाते हुए यह कहकर घर भेज दिया कि कंपनी के उच्च अधिकारियों से बात कर अवगत कराया जाएगा।
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