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गोशाला : ठंड से ठिठुर रहे गोवंश
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छिबरामऊ। गोशाला में रहने वाले गोवंश को सर्दी से बचाने को तिरपाल की व्यवस्था करवाए जाने का फरमान शासन से जारी हुआ है, पर बजट न मिलने के कारण गोवंश ठिठुर रहे हैं। चारे के नाम पर दोयम दर्जे का भूसे से अपना पेट भर रहे हैं।
विकास खंड क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों में तेरह तथा छिबरामऊ व सिकंदरपुर में एक- एक गोशाला संचालित है। इनमें सैकड़ो गोवंश पल रहे हैं। सर्दी व कोहरे के मौसम को देखते हुए शासन ने सभी गोवंशों को झूल से ढंकने व टीन शेड के चारों तरफ तिरपाल की व्यवस्था करने का फरमान जारी हुआ हैं। पर बजट नहीं मिला है। अब इसकी व्यवस्था पंचायत सचिवों के कंधों पर डाल दी गई है। रविवार को ग्राम लडै़ता व हमीरपुर गोशाला में किसी भी गोवंश पर झूल नजर नहीं आई। बताते कि अभिलेखों में ग्राम लड़ैता की गोशाला उत्कृष्ट गोशालाओं में शामिल हैं।
हमीरपुर के प्रधान प्रतिनिधि राजीव यादव व लडै़ता के प्रधान ईश्वरदयाल ने बताया कि शासन ने फरमान जरूर जारी हुआ पर बजट नहीं दिया गया। सात माह से चारे के लिए शासन से पैसा नहीं भेजा गया। जब से गोशाला का संचालन शुरू हुआ केयरटेकर का मानदेय भी प्रधानों ने स्वयं ही वहन किया हैं। अपने निजी खर्चों से गोशालाओं का संचालन नहीं हो सकता है।
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विकास खंड क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों में तेरह तथा छिबरामऊ व सिकंदरपुर में एक- एक गोशाला संचालित है। इनमें सैकड़ो गोवंश पल रहे हैं। सर्दी व कोहरे के मौसम को देखते हुए शासन ने सभी गोवंशों को झूल से ढंकने व टीन शेड के चारों तरफ तिरपाल की व्यवस्था करने का फरमान जारी हुआ हैं। पर बजट नहीं मिला है। अब इसकी व्यवस्था पंचायत सचिवों के कंधों पर डाल दी गई है। रविवार को ग्राम लडै़ता व हमीरपुर गोशाला में किसी भी गोवंश पर झूल नजर नहीं आई। बताते कि अभिलेखों में ग्राम लड़ैता की गोशाला उत्कृष्ट गोशालाओं में शामिल हैं।
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हमीरपुर के प्रधान प्रतिनिधि राजीव यादव व लडै़ता के प्रधान ईश्वरदयाल ने बताया कि शासन ने फरमान जरूर जारी हुआ पर बजट नहीं दिया गया। सात माह से चारे के लिए शासन से पैसा नहीं भेजा गया। जब से गोशाला का संचालन शुरू हुआ केयरटेकर का मानदेय भी प्रधानों ने स्वयं ही वहन किया हैं। अपने निजी खर्चों से गोशालाओं का संचालन नहीं हो सकता है।
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