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‘सरकार’ की कार में प्रदूषण मुक्त का प्रमाण ही नहीं
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सड़क पर फर्राटा भरता सरकारी वाहन। संवाद
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। यह भी खूब रही। वाहनों की जांच के लिए चलने वाले अभियानों में पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारी सिर्फ जन सामान्य के वाहनों की ही जांच करते हैं। कोई भी खामी मिलते ही चालान और जुर्माना कर दिया जाता है। खास बात यह है कि पुलिस महकमे समेत कई सरकारी विभागों के 204 वाहन नियम के विपरीत सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। प्रदूषण मुक्त प्रमाण पत्र हासिल किए बिना ही सरकारी वाहन सड़क पर दौड़ रहे हैं। शासन ने इसको लेकर सख्त रुख दिखाया है और जल्द से जल्द सभी सरकारी वाहनों के प्रदूषण मुक्त प्रमाण पत्र तलब किए हैं।
लगभग सभी जनपदों में पुलिस, राजस्व विभाग, वन विभाग, ग्राम्य विकास विभाग के सरकारी वाहन हैं। इन सरकारी वाहनों में ब्लॉक और थाना स्तर के अधिकारियों से लेकर जिले के आला अफसरों तक के सरकारी वाहन शामिल हैं। नियम के मुताबिक बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र के कोई भी वाहन भले ही वह सरकारी क्यों न हो, सड़क पर नहीं दौड़ सकता। इसके बावजूद कई सरकारी वाहन बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र के ही दौड़ रहे हैं।
शासन स्तर पर बीते दिनों इसकी समीक्षा परिवहन विभाग ने की। समीक्षा में पता चला कि पूरे प्रदेश में 60,545 सरकारी वाहन पंजीकृत हैं, लेकिन इनमें से कुछ के पास ही वैध प्रदूषण मुक्त का प्रमाण पत्र है। इसी क्रम में जब अपर परिवहन आयुक्त (आईटी) देवेंद्र कुमार त्रिपाठी ने सभी जनपदों के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) को पत्र भेजा, तो खलबली मच गई। शासन से 248 सरकारी वाहनों की सूची भी एआरटीओ को भेजी गई है। इसमें 204 वाहनों के प्रदूषण मुक्त प्रमाण पत्र नहीं हैं। इनमें सबसे ज्यादा वाहन पुलिस महकमे के हैं। इसके बाद राजस्व, ग्राम्य विकास, वन आदि विभागों के वाहन शामिल हैं।
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जिम्मेदारों की सुनिए
एआरटीओ प्रशासन एसके झा ने बताया कि शासन से आदेश मिला है। 248 वाहनों की सूची भी उपलब्ध कराई गई है। संबंधित सभी विभागों को इन वाहनों का उल्लेख करते हुए नोटिस जारी किए गए हैं। साथ ही दो दिन के अंदर प्रदूषण मुक्त प्रमाण पत्र भी मांगा गया है।
जनपद में आठ स्थानों से मिलता प्रदूषण मुक्त होने का प्रमाण पत्र
एआरटीओ एसके झा ने बताया कि जनपद में कुल आठ प्राइवेट केंद्र प्रदूषण की जांच के लिए हैं। इन आठों केंद्रों को प्रदूषण जांचने का लाइसेंस मिला है और यह प्रदूषण मुक्त होने का प्रमाण पत्र दे सकते हैं। हर वाहन का प्रदूषण मुक्त प्रमाण पत्र एक वर्ष के लिए वैध होता है।
इनसेट
दस हजार रुपये जुर्माने का है प्रावधान
प्रदूषण मुक्त प्रमाण पत्र के बिना वाहन चलाने में जुर्माने का प्रावधान है। एआरटीओ एसके झा बताते हैं कि अगर कोई वाहन प्रदूषण मुक्त प्रमाण पत्र के बिना चलता हुआ पाया जाता है, तो उस पर दस हजार रुपये का जुर्माना किए जाने का नियम है।
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लगभग सभी जनपदों में पुलिस, राजस्व विभाग, वन विभाग, ग्राम्य विकास विभाग के सरकारी वाहन हैं। इन सरकारी वाहनों में ब्लॉक और थाना स्तर के अधिकारियों से लेकर जिले के आला अफसरों तक के सरकारी वाहन शामिल हैं। नियम के मुताबिक बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र के कोई भी वाहन भले ही वह सरकारी क्यों न हो, सड़क पर नहीं दौड़ सकता। इसके बावजूद कई सरकारी वाहन बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र के ही दौड़ रहे हैं।
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शासन स्तर पर बीते दिनों इसकी समीक्षा परिवहन विभाग ने की। समीक्षा में पता चला कि पूरे प्रदेश में 60,545 सरकारी वाहन पंजीकृत हैं, लेकिन इनमें से कुछ के पास ही वैध प्रदूषण मुक्त का प्रमाण पत्र है। इसी क्रम में जब अपर परिवहन आयुक्त (आईटी) देवेंद्र कुमार त्रिपाठी ने सभी जनपदों के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) को पत्र भेजा, तो खलबली मच गई। शासन से 248 सरकारी वाहनों की सूची भी एआरटीओ को भेजी गई है। इसमें 204 वाहनों के प्रदूषण मुक्त प्रमाण पत्र नहीं हैं। इनमें सबसे ज्यादा वाहन पुलिस महकमे के हैं। इसके बाद राजस्व, ग्राम्य विकास, वन आदि विभागों के वाहन शामिल हैं।
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जिम्मेदारों की सुनिए
एआरटीओ प्रशासन एसके झा ने बताया कि शासन से आदेश मिला है। 248 वाहनों की सूची भी उपलब्ध कराई गई है। संबंधित सभी विभागों को इन वाहनों का उल्लेख करते हुए नोटिस जारी किए गए हैं। साथ ही दो दिन के अंदर प्रदूषण मुक्त प्रमाण पत्र भी मांगा गया है।
जनपद में आठ स्थानों से मिलता प्रदूषण मुक्त होने का प्रमाण पत्र
एआरटीओ एसके झा ने बताया कि जनपद में कुल आठ प्राइवेट केंद्र प्रदूषण की जांच के लिए हैं। इन आठों केंद्रों को प्रदूषण जांचने का लाइसेंस मिला है और यह प्रदूषण मुक्त होने का प्रमाण पत्र दे सकते हैं। हर वाहन का प्रदूषण मुक्त प्रमाण पत्र एक वर्ष के लिए वैध होता है।
इनसेट
दस हजार रुपये जुर्माने का है प्रावधान
प्रदूषण मुक्त प्रमाण पत्र के बिना वाहन चलाने में जुर्माने का प्रावधान है। एआरटीओ एसके झा बताते हैं कि अगर कोई वाहन प्रदूषण मुक्त प्रमाण पत्र के बिना चलता हुआ पाया जाता है, तो उस पर दस हजार रुपये का जुर्माना किए जाने का नियम है।