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न्याय की आस छोड़ी तो 25 साल बाद ग्राम न्यायालय ने सुनाया फैसला
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कन्नौज। सड़क हादसे में परिवार के तीन लोगों की मौत के मुकदमे में वादी ने इंसाफ की आस छोड़ थी और कोर्ट आना बंद कर दिया। 25 साल से चल रहे मुकदमे को एक साल पहले ही ग्राम न्यायालय ने संज्ञान लिया था। बुधवार को ट्रक चालक को दोषी करार दिया और एक साल की सजा और एक हजार रुपये जुर्माना लगाया।
इंदरगढ़ थाना क्षेत्र के लाख गांव निवासी आलमशेर खां 21 अगस्त 1996 को परिवार के साथ जीप से कन्नौज में रहने वाले रिश्तेदार के घर आ रहे थे। इस दौरान तिर्वा-कन्नौज रोड पर ईशन नदी के पास कानपुर देहात के थाना रसूलाबाद के गांव नलखानपुर निवासी ट्रक चालक लईक अहमद ने लापरवाही से जीप में टक्कर मार दी थी। हादसे में आलमशेर की बहू सायरा बानो पत्नी मोहम्मद एजाज, बेबी यास्मीन पत्नी मोहम्मद शकील और पौत्री गुड़िया की मौत हो गई थी। हादसे में आलमशेर, पत्नी बफातिन, मां रहमत, बेटे मोहम्मद एजाज, भाई नूर मोहम्मद, बुशकूर, हाफिज महबूब, अहमद, अनीस, अंजुम और जीप चालक राजेश घायल हो गए थे। आलमशेर ने तिर्वा कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। ग्राम न्यायालय तिर्वा के न्यायधीश ऋषभ चतुर्वेदी मामले की सुनवाई की और ट्रक चालक लईक अहमद को एक साल की सजा और एक हजार रुपये के अर्थदंड सुनाया। अर्थदंड जमा न करने पर 20 दिन की अतिरिक्त कैद की सजा सुनाई। ग्राम न्यायालय के सहायक अभियोजन अधिकारी संजीव यादव ने बताया कि करीब 10 साल से वादी ने तारीख पर आना छोड़ दिया था। सिर्फ चालक तारीख करने आता था। काफी लंबित मुकदमा होनेे के कारण पहली बार ग्राम न्यायालय ने फैसला लिया सुनाया। 2021 में हाईकोर्ट के आदेश पर जिला जज ने ग्राम न्यायालय तिर्वा की स्थापना की थी। इससे पहले यह मुकदमा तहसील न्यायालय में चल रहा था।
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इंदरगढ़ थाना क्षेत्र के लाख गांव निवासी आलमशेर खां 21 अगस्त 1996 को परिवार के साथ जीप से कन्नौज में रहने वाले रिश्तेदार के घर आ रहे थे। इस दौरान तिर्वा-कन्नौज रोड पर ईशन नदी के पास कानपुर देहात के थाना रसूलाबाद के गांव नलखानपुर निवासी ट्रक चालक लईक अहमद ने लापरवाही से जीप में टक्कर मार दी थी। हादसे में आलमशेर की बहू सायरा बानो पत्नी मोहम्मद एजाज, बेबी यास्मीन पत्नी मोहम्मद शकील और पौत्री गुड़िया की मौत हो गई थी। हादसे में आलमशेर, पत्नी बफातिन, मां रहमत, बेटे मोहम्मद एजाज, भाई नूर मोहम्मद, बुशकूर, हाफिज महबूब, अहमद, अनीस, अंजुम और जीप चालक राजेश घायल हो गए थे। आलमशेर ने तिर्वा कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। ग्राम न्यायालय तिर्वा के न्यायधीश ऋषभ चतुर्वेदी मामले की सुनवाई की और ट्रक चालक लईक अहमद को एक साल की सजा और एक हजार रुपये के अर्थदंड सुनाया। अर्थदंड जमा न करने पर 20 दिन की अतिरिक्त कैद की सजा सुनाई। ग्राम न्यायालय के सहायक अभियोजन अधिकारी संजीव यादव ने बताया कि करीब 10 साल से वादी ने तारीख पर आना छोड़ दिया था। सिर्फ चालक तारीख करने आता था। काफी लंबित मुकदमा होनेे के कारण पहली बार ग्राम न्यायालय ने फैसला लिया सुनाया। 2021 में हाईकोर्ट के आदेश पर जिला जज ने ग्राम न्यायालय तिर्वा की स्थापना की थी। इससे पहले यह मुकदमा तहसील न्यायालय में चल रहा था।
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