{"_id":"61ae5083a64ac610253e0481","slug":"kannauj-agricultural-kannauj-news-kannauj-news-knp6680959121","type":"story","status":"publish","title_hn":"पान उत्पादन कर बढ़ा सकते आमदनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पान उत्पादन कर बढ़ा सकते आमदनी
विज्ञापन
उमर्दा। पान उत्पादक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सेंटर आफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल में दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हुआ है। किसानों को आधुनिक ढंग से पान की खेती करने के हुनर बताए गए। आयोजित प्रशिक्षण में कई जनपदों से आए किसानों ने भाग लिया।
सेंटर आफ एक्सीलेंस फार वेजिटेबल में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत सोमवार से दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हुआ। इसमें गैर जनपद से आए पान उत्पादक किसानों को आधुनिक ढंग से अनुदान प्राप्त कर पान की खेती करने का तरीका बताया गया। केंद्र प्रभारी डा. डीएस यादव ने बताया कि प्रदेश के 18 जिलों में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत पान उत्पादक किसानों के लिए अनुदान योजना संचालित की जा रही है। इससे महोबा, कानपुर, उन्नाव, हरदोई, लखनऊ से किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इसमें उन्होंने किसानों को बताया कि देशावरी और कपूरी प्रजातियों के पान व्यवसाय के लिए अच्छे हैं। पान के सौ पत्तों की गड्डियां बनाकर बाजार में बेची जाती है। पान के रोपाई के समय ऑक्सीलेट के 50 प्रतिशत को दो लीटर पानी में मिला कर घोल बना लें और एक गांठ पत्ते समेत संशोधन कर रोपाई करें। पत्तों को काटते समय सावधानी रखें। अधिक उत्पादन से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सेंटर आफ एक्सीलेंस फार वेजिटेबल में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत सोमवार से दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हुआ। इसमें गैर जनपद से आए पान उत्पादक किसानों को आधुनिक ढंग से अनुदान प्राप्त कर पान की खेती करने का तरीका बताया गया। केंद्र प्रभारी डा. डीएस यादव ने बताया कि प्रदेश के 18 जिलों में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत पान उत्पादक किसानों के लिए अनुदान योजना संचालित की जा रही है। इससे महोबा, कानपुर, उन्नाव, हरदोई, लखनऊ से किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
विज्ञापन
इसमें उन्होंने किसानों को बताया कि देशावरी और कपूरी प्रजातियों के पान व्यवसाय के लिए अच्छे हैं। पान के सौ पत्तों की गड्डियां बनाकर बाजार में बेची जाती है। पान के रोपाई के समय ऑक्सीलेट के 50 प्रतिशत को दो लीटर पानी में मिला कर घोल बना लें और एक गांठ पत्ते समेत संशोधन कर रोपाई करें। पत्तों को काटते समय सावधानी रखें। अधिक उत्पादन से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।
विज्ञापन