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कन्नौज में ईसन नदी सूखी, सौ गांवों में पानी का संकट
अमर उजाला ब्यूरो/कन्नौज
Updated Thu, 28 Apr 2016 11:49 PM IST
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dry Isn river
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सौरिख, तालग्राम, तिर्वा व ठठिया क्षेत्र के करीब एक सैकड़ा गांवों के लिए जीवनदायिनी मानी जाने वाली ईसन नदी सूख गई है। इससे सिंचाई के अभाव में नदी किनारे लहलहाती हरी-भरी फसल सूखने लगी है। इसके बाद भी जिला प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। नदी में पानी न होने से प्यासे पशु-पक्षी भी इधर-उधर भटक रहे हैं। मैनपुरी जिले से आने वाली ईसन नदी सौरिख के बाद कन्नौज जिले की सीमा में प्रवेश करती है।
इसके बाद जिले के बीचोबीच होते हुए यह कानपुर नगर जिले की बिल्हौर सीमा के आगे चली जाती है। कन्नौज जिले में करीब 50 किलोमीटर दूरी में यह नदी बहती है। नदी के किनारे होने के कारण इन गांवों में जल निगम के अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधि तक हैंडपंप लगाने में कंजूसी करते हैं। ट्यूबवेलों की संख्या भी कम है क्योंकि लोग खेत सींचने के लिए भी पंपिंग सेट लगाकर नदी के पानी का इस्तेमाल कर लेते हैं।
ताहपुर के वीरेंद्र, तिलकसराय के लाल बहादुर वर्मा, खबरामऊ के राम सिंह जाटव, कुढ़री के किसान जीवालाल का कहना है कि नदी किनारे किसानों के खेतों में तैयार मक्का, तरबूज, खरबूजा, ककड़ी, सब्जियों की खेती सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं। यदि समय रहते नदी में पानी न आया और फसल न सिंच पाई तो आने वाले समय में हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
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कलुआपुर के पूर्व जिला पंचायत सदस्य यशवंत राजपूत, क्षेत्र पंचायत सदस्य अजब सिंह राजपूत ने बताया कि जंगली जीव-जंतुओं व पशु-पक्षियों के लिए पानी का भीषण संकट है। फिरोजपुर के दरबारी लाल ने बताया कि नदी किनारे पांच हजार बीघा से अधिक क्षेत्रफल में खड़ी मक्का, मूंगफली, तरबूज, खरबूजा, पिपरमेंट मेंथा, सब्जियों की खेती सूखने से बर्बाद हो रही है।
उमर्दा ब्लाक प्रमुख इंद्रेश यादव ने बताया कि नदी के सूख जाने से खड़े हुए पानी के संकट का समाधान एक सप्ताह के अंदर कराएंगे। रामनगर झाल से नदी में पानी छोड़े जाने के लिए जिलाधिकारी समेत अन्य अफसरों से वार्ता करेंगे। कन्नौज के अपर जिलाधिकारी संतोष कुमार वैश्य ने कहा कि ईसन नदी की जलधारा सूखने की जानकारी मिली है। पता कराएंगे कि नदी कहां से निकलती है। इसके बाद इसमें पानी छोड़े जाने का प्रयास करेंगे, ताकि नदी किनारे क्षेत्र में पानी संकट दूर हो सके।
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इसके बाद जिले के बीचोबीच होते हुए यह कानपुर नगर जिले की बिल्हौर सीमा के आगे चली जाती है। कन्नौज जिले में करीब 50 किलोमीटर दूरी में यह नदी बहती है। नदी के किनारे होने के कारण इन गांवों में जल निगम के अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधि तक हैंडपंप लगाने में कंजूसी करते हैं। ट्यूबवेलों की संख्या भी कम है क्योंकि लोग खेत सींचने के लिए भी पंपिंग सेट लगाकर नदी के पानी का इस्तेमाल कर लेते हैं।
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ताहपुर के वीरेंद्र, तिलकसराय के लाल बहादुर वर्मा, खबरामऊ के राम सिंह जाटव, कुढ़री के किसान जीवालाल का कहना है कि नदी किनारे किसानों के खेतों में तैयार मक्का, तरबूज, खरबूजा, ककड़ी, सब्जियों की खेती सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं। यदि समय रहते नदी में पानी न आया और फसल न सिंच पाई तो आने वाले समय में हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
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कलुआपुर के पूर्व जिला पंचायत सदस्य यशवंत राजपूत, क्षेत्र पंचायत सदस्य अजब सिंह राजपूत ने बताया कि जंगली जीव-जंतुओं व पशु-पक्षियों के लिए पानी का भीषण संकट है। फिरोजपुर के दरबारी लाल ने बताया कि नदी किनारे पांच हजार बीघा से अधिक क्षेत्रफल में खड़ी मक्का, मूंगफली, तरबूज, खरबूजा, पिपरमेंट मेंथा, सब्जियों की खेती सूखने से बर्बाद हो रही है।
उमर्दा ब्लाक प्रमुख इंद्रेश यादव ने बताया कि नदी के सूख जाने से खड़े हुए पानी के संकट का समाधान एक सप्ताह के अंदर कराएंगे। रामनगर झाल से नदी में पानी छोड़े जाने के लिए जिलाधिकारी समेत अन्य अफसरों से वार्ता करेंगे। कन्नौज के अपर जिलाधिकारी संतोष कुमार वैश्य ने कहा कि ईसन नदी की जलधारा सूखने की जानकारी मिली है। पता कराएंगे कि नदी कहां से निकलती है। इसके बाद इसमें पानी छोड़े जाने का प्रयास करेंगे, ताकि नदी किनारे क्षेत्र में पानी संकट दूर हो सके।