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Kannauj News: गोशाला में दो ट्राली पराली के बदले मिलेगा एक ट्राली गोबर
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कन्नौज। पराली जलाने से रोकने के लिए प्रशासन ने नई पहल की है। दो ट्राली पराली देने पर गोशाला से एक ट्राली गोबर किसान को मिलेगा। कलक्ट्रेट में हुई बैठक के दौरान डीएम ने इसकी जानकारी दी।
सोमवार को हुई बैठक में डीएम शुभ्रांत शुक्ला ने पराली जलाने की घटनाओं पर विराम लगाने पर चर्चा की। कहा कि पराली को जलाने से पर्यावरण दूषित होता है। खेत की मिट्टी की गुणवत्ता में कमी आती है। इसलिए किसानों को जागरूक किया जाए कि खेतों में पराली न जलाएं। फसल अवशेष जलाने के बजाय उसे खेत में ही सड़ाकर खाद के रूप में प्रयोग करें।
उन्होंने कहा कि डी-कंपोजर का वितरण प्रारंभ हो गया है, किसान इसका लाभ उठा सकते हैं। कहा कि अगर किसान दो ट्राली पराली गोशाला में पहुंचाते हैं तो उन्हें एक ट्राली गोबर की खाद दी जाएगी। उन्होंने कहा कि बिना एसडीएम के मंजूरी के कंबाइन मशीन नहीं चलेगी। अब कंबाइन वही मशीन चलेगी, जिसमें कंबाइन हारवेस्टर के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगा होगा।
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कहा कि यह यंत्र कंबाइन हारवेस्टर में अटैच किया जाता है, जो कंबाइन द्वारा काटी गई फसल के अवशेष को छोटे-छोटे टुकड़ों में करके खेतों में बिखेर देता है। इससे फसल अवशेष को आसानी से मिट्टी में मिलाया जा सकता है। बैठक में सीडीओ आरएन सिंह, जॉइंट मजिस्ट्रेट पवन मीना, डीडीओ नरेंद्र देव द्विवेदी, डीडी कृषि प्रमोद सिरोही, जिला उद्यान अधिकारी सीपी अवस्थी, जिला कृषि अधिकारी आवेश सिंह, जिला कृषि रक्षा अधिकारी आदि मौजूद रहे।
इनसेट-- --
कई जगह ज्यादा जल रही पराली, लगेगा जुर्माना
डीएम ने बताया कि उमर्दा, छिबरामऊ, हसेरन, सौरिख आदि क्षेत्रों में पराली जलाए जाने कि घटनाएं अधिक हो रही हैं। सौरिख क्षेत्र में दो घटनाएं संज्ञान में भी आई हैं। अधिक घटनाओं वाले क्षेत्रों में न्याय, ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता के कार्यक्रम चलाए जाएं। बताया जाए कि सरकार की ओर से सेटेलाइट के माध्यम से पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी की जा रही है। पराली जलाते हुए पकड़े जाने पर दोषी कृषक पर दो एकड़ से कम क्षेत्र के लिए 2500 रुपये व दो से पांच एकड़ क्षेत्र के लिए पांच हजार रुपये और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिए 15000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
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सोमवार को हुई बैठक में डीएम शुभ्रांत शुक्ला ने पराली जलाने की घटनाओं पर विराम लगाने पर चर्चा की। कहा कि पराली को जलाने से पर्यावरण दूषित होता है। खेत की मिट्टी की गुणवत्ता में कमी आती है। इसलिए किसानों को जागरूक किया जाए कि खेतों में पराली न जलाएं। फसल अवशेष जलाने के बजाय उसे खेत में ही सड़ाकर खाद के रूप में प्रयोग करें।
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उन्होंने कहा कि डी-कंपोजर का वितरण प्रारंभ हो गया है, किसान इसका लाभ उठा सकते हैं। कहा कि अगर किसान दो ट्राली पराली गोशाला में पहुंचाते हैं तो उन्हें एक ट्राली गोबर की खाद दी जाएगी। उन्होंने कहा कि बिना एसडीएम के मंजूरी के कंबाइन मशीन नहीं चलेगी। अब कंबाइन वही मशीन चलेगी, जिसमें कंबाइन हारवेस्टर के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगा होगा।
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कहा कि यह यंत्र कंबाइन हारवेस्टर में अटैच किया जाता है, जो कंबाइन द्वारा काटी गई फसल के अवशेष को छोटे-छोटे टुकड़ों में करके खेतों में बिखेर देता है। इससे फसल अवशेष को आसानी से मिट्टी में मिलाया जा सकता है। बैठक में सीडीओ आरएन सिंह, जॉइंट मजिस्ट्रेट पवन मीना, डीडीओ नरेंद्र देव द्विवेदी, डीडी कृषि प्रमोद सिरोही, जिला उद्यान अधिकारी सीपी अवस्थी, जिला कृषि अधिकारी आवेश सिंह, जिला कृषि रक्षा अधिकारी आदि मौजूद रहे।
इनसेट
कई जगह ज्यादा जल रही पराली, लगेगा जुर्माना
डीएम ने बताया कि उमर्दा, छिबरामऊ, हसेरन, सौरिख आदि क्षेत्रों में पराली जलाए जाने कि घटनाएं अधिक हो रही हैं। सौरिख क्षेत्र में दो घटनाएं संज्ञान में भी आई हैं। अधिक घटनाओं वाले क्षेत्रों में न्याय, ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता के कार्यक्रम चलाए जाएं। बताया जाए कि सरकार की ओर से सेटेलाइट के माध्यम से पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी की जा रही है। पराली जलाते हुए पकड़े जाने पर दोषी कृषक पर दो एकड़ से कम क्षेत्र के लिए 2500 रुपये व दो से पांच एकड़ क्षेत्र के लिए पांच हजार रुपये और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र के लिए 15000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।