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काली और गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से धुकधुकी बढ़ी
अमर उजाला ब्यूराो/कन्नौज
Updated Thu, 06 Jul 2017 12:21 AM IST
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घाटों की ओर बढ़ती गंगा।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
मानसूनी बारिश का असर नदियों में दिखने लगा है। काली और गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है। इससे नदियों किनारे बसे लोगों की धुकधुकी बढ़ने लगी है। कटरी की खेती पानी डूबने लगी है। इससे सब्जियों के दामों पर भी असर दिखाई दे रहा है। बुधवार को काली नदी व गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी देखी गई है। लोगों ने नदियों के किनारे से अपना सामान समेटना शुरू कर दिया है। वहीं, जिला प्रशासन ने बाढ़ जैसे हालातों से निपटने के लिए अभी से तैयारियां पूरी कर ली हैं। स्थानीय स्तर पर अधिकारियों को सचेत किया गया है। केंद्रीय जल आयोग जल स्तर पर लगातार निगरानी बरत रहा है। बुधवार को गंगा का जल स्तर 122.05 मीटर रहा है।
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यहां लेते हैं बाढ़पीड़ित शरण
बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए तहसीलवार शरण स्थल बनाए जाते हैं। इसमें सदर कन्नौज तहसील में मेहंदीघाट, चिंतामणि मंदिर, कृषि उत्पादन मंडी समिति कन्नौज, मेहंदीपुर निरीक्षण भवन, प्राथमिक पाठशाला मल्लपुरवा, गुगरापुर बांगर आदि हैं। इसी प्रकार छिबरामऊ तहसील में प्राथमिक पाठशाला रायपुर, प्राथमिक पाठशाला जाफराबाद, गुरसहायगंज डाक बंगला, नहर निरीक्षण भवन, हीरालाल, नेहरू डिग्री कालेज आदि बनाए जाते हैं।
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हाई फ्लड में शामिल गांव
जिला प्रशासन बाढ़ प्रभावित गांवों को तीन श्रेणियों में बांटता है। जिसमें हाई फ्लड, मीडियम फ्लड व लो फ्लड हैं। हाई फ्लड के गांव में सबसे पहले पानी घुसता है। जिसमें कटरी गंगपुर, कासिमपुर, फिरोजपुर, महाबलीपुर, अमीनाबाद, डूंगरपुर, जलालपुर उमरा, तेरारागी, चौधरियापुर कछोहा, दरियापुर पट्टी, गुगरापुर बांगर, बलिदादपुर, कपूरपुर कटरी, साडियापुर बांगर, मिश्रीपुर, दरियापुर, सलेमपुर आदि गांव हैं।
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2010 को 126.780 मीटर पहुंचा था जलस्तर
गंगा का जल स्तर साल 2010 में खतरे का निशान पार कर गया था। जल स्तर पर नजर डाले तो खतरे का निशान 125.970 मीटर है। जिसमें 1998 में 126.0 मीटर, 24 सितंबर 2010 को 126.600 मीटर पानी पहुंच गया था। यह खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर चल रहा था। जिसमें लगभग 46 हजार की आबादी प्रभावित हुई थी।