{"_id":"61a9118bdca3a87f272b9757","slug":"health-kannauj-kannauj-news-kannauj-news-knp6673493186","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं लगे कोरोना से बचाव के टीके, बैरंग लौटे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहीं लगे कोरोना से बचाव के टीके, बैरंग लौटे
विज्ञापन
प्रदर्शन करते स्वास्थ्य कर्मी।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। एनएचएम के संविदा कर्मचारियों और आशा ने सात सूत्री मांगों को पूरा कराने के लिए दूसरे दिन भी सीएमओ कार्यालय परिसर में प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने कहा कि उनकी मांगों को नहीं माना गया, तो कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। हड़ताल से गुरुवार को भी कोविड टेस्टिंग, टीकाकरण प्रभावित हुआ। कम्यूनिटी हेल्थ सेेटरों में ओपीडी ठप रही।
सीएमओ कार्यालय पर गुरुवार को भी एनएचएम के संविदा कर्मचारी और सैकड़ों आशा ने प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सात सूत्री मांगों को पूरा कराने पर जोर दिया। सीएमओ कार्यालय में तैनात संविदा कर्मचारी भी प्रदर्शन में शामिल हुए। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष डॉ.पकज वर्मा ने कहा कि संविदा कर्मचारी पिछले दो साल से कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी में दिन-रात मेहनत कर रहे। तमाम मरीजों की जान बचाई। इसमें कई कर्मचारी फर्ज निभाते हुए जान गंवा बैठे। इनको राजकीय कर्मचारी का दर्जा मिलना चाहिए। उन्होंने कर्मचारियों को विनियमितीकरण, वेतन विसंगति, सातवां वेतन आयोग का लाभ व जॉब सिक्योरिटी, रिक्त पदों पर गैर जिलों में तबादले, आउटसोर्स नीति समाप्त करने और बीमा पालिसी को लागू करने पर जोर दिया। इसके अलावा आशा से सभी कार्य लिए जा रहे हैं, उनके मानदेय में बढ़ोतरी हो और अन्य सरकारी सुविधाएं भी मिलें।
आयुष डॉक्टरों ने भी किया कार्य बहिष्कार
प्रदर्शन से कोविड-19 की टेस्टिंग और टीकाकरण प्रभावित रहा। कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर में आयुष डॉक्टरों ने भी कार्य बहिष्कार किया। उन लोगों ने ओपीडी नहीं संचालित किया। सीएमओ समेत सभी कार्यालयों में कामकाज ठप रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
सीएमओ कार्यालय पर गुरुवार को भी एनएचएम के संविदा कर्मचारी और सैकड़ों आशा ने प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सात सूत्री मांगों को पूरा कराने पर जोर दिया। सीएमओ कार्यालय में तैनात संविदा कर्मचारी भी प्रदर्शन में शामिल हुए। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष डॉ.पकज वर्मा ने कहा कि संविदा कर्मचारी पिछले दो साल से कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी में दिन-रात मेहनत कर रहे। तमाम मरीजों की जान बचाई। इसमें कई कर्मचारी फर्ज निभाते हुए जान गंवा बैठे। इनको राजकीय कर्मचारी का दर्जा मिलना चाहिए। उन्होंने कर्मचारियों को विनियमितीकरण, वेतन विसंगति, सातवां वेतन आयोग का लाभ व जॉब सिक्योरिटी, रिक्त पदों पर गैर जिलों में तबादले, आउटसोर्स नीति समाप्त करने और बीमा पालिसी को लागू करने पर जोर दिया। इसके अलावा आशा से सभी कार्य लिए जा रहे हैं, उनके मानदेय में बढ़ोतरी हो और अन्य सरकारी सुविधाएं भी मिलें।
विज्ञापन
आयुष डॉक्टरों ने भी किया कार्य बहिष्कार
प्रदर्शन से कोविड-19 की टेस्टिंग और टीकाकरण प्रभावित रहा। कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर में आयुष डॉक्टरों ने भी कार्य बहिष्कार किया। उन लोगों ने ओपीडी नहीं संचालित किया। सीएमओ समेत सभी कार्यालयों में कामकाज ठप रहा।
विज्ञापन